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जलस्तर हुआ कम तो गंगा का कटान शुरू
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गढ़ खादर क्षेत्र के गंगा तट से लगे खेतों में हो रहा भू कटान।
- फोटो : GARH
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जलस्तर हुआ कम तो गंगा का कटान शुरू
गढ़मुक्तेश्वर। खादर क्षेत्र में गंगा का जलस्तर कम हो रहा है लेकिन अब भू-कटान से किसानों की मुसीबत बढ़ गई है। गंगा के कटान से खादर क्षेत्र के किनारे की भूमि और उस पर खड़ी फसलगंगा में समा गई है।
जनपद में सबसे पिछड़ा क्षेत्र कहलाए जाने वाला गढ़ खादर का इलाका कृषि प्रधान क्षेत्र है, जिसमें रहने वाले 85 प्रतिशत परिवारों की जीविका खेती और उससे जुड़े काम-धंधों पर आधारित है। लेकिन कुदरत के कहर से खेतीबाड़ी के सहारे जिंदगी बिताने वाले किसानों की हालत बेहद बदतर होती जा रही है। क्योंकि मानसूनी बरसात के चलते गंगा का जलस्तर कई बार उफान पर आया। खेतों में पानी भरने से किसानों द्वारा मेहनत से उगाई गई फसलों में जमकर बर्बादी हुई। जलभराव के कारण धान, चारा समेत सब्जी की फसल में काफी नुकसान हुआ।
अब गंगा का उफान पूरी तरह थम चुका है। जलस्तर में गिरावट के बाद गंगा अपनी पुरानी सीमा में लौट रही है, जिसके चलते गंगा के तट और उसके आसपास की भूमि में तेजी से कटान हो रहा है। गंगा नदी ने गढ़ की साइड में सैकड़ों एकड़ भूमि का कटान कर उसे अपनी जलधारा में निगल लिया है। जिससे क्षेत्र का किसान बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। किसानो का कहना है कि इस बार मुसीबत पीछा छोड़ने को तैयार नहीं है। क्योंकि गंगा के उफान से जलभराव होने पर फसलें पहले ही बुरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं, लेकिन अब जलस्तर में गिरावट होने से भू-कटान होने पर बेशकीमती जमीन भी गंगा की जलधारा में समा रही हैं।
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तहसीलदार सुरेंद्र सिंह सिंह का कहना है कि गंगा का जलस्तर कम होने के दौरान भू-कटान होना एक सामान्य बात है, जिसकी जांच कराकर शासन को रिपोर्ट भिजवाई जाएगी।
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गढ़मुक्तेश्वर। खादर क्षेत्र में गंगा का जलस्तर कम हो रहा है लेकिन अब भू-कटान से किसानों की मुसीबत बढ़ गई है। गंगा के कटान से खादर क्षेत्र के किनारे की भूमि और उस पर खड़ी फसलगंगा में समा गई है।
जनपद में सबसे पिछड़ा क्षेत्र कहलाए जाने वाला गढ़ खादर का इलाका कृषि प्रधान क्षेत्र है, जिसमें रहने वाले 85 प्रतिशत परिवारों की जीविका खेती और उससे जुड़े काम-धंधों पर आधारित है। लेकिन कुदरत के कहर से खेतीबाड़ी के सहारे जिंदगी बिताने वाले किसानों की हालत बेहद बदतर होती जा रही है। क्योंकि मानसूनी बरसात के चलते गंगा का जलस्तर कई बार उफान पर आया। खेतों में पानी भरने से किसानों द्वारा मेहनत से उगाई गई फसलों में जमकर बर्बादी हुई। जलभराव के कारण धान, चारा समेत सब्जी की फसल में काफी नुकसान हुआ।
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अब गंगा का उफान पूरी तरह थम चुका है। जलस्तर में गिरावट के बाद गंगा अपनी पुरानी सीमा में लौट रही है, जिसके चलते गंगा के तट और उसके आसपास की भूमि में तेजी से कटान हो रहा है। गंगा नदी ने गढ़ की साइड में सैकड़ों एकड़ भूमि का कटान कर उसे अपनी जलधारा में निगल लिया है। जिससे क्षेत्र का किसान बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। किसानो का कहना है कि इस बार मुसीबत पीछा छोड़ने को तैयार नहीं है। क्योंकि गंगा के उफान से जलभराव होने पर फसलें पहले ही बुरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं, लेकिन अब जलस्तर में गिरावट होने से भू-कटान होने पर बेशकीमती जमीन भी गंगा की जलधारा में समा रही हैं।
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तहसीलदार सुरेंद्र सिंह सिंह का कहना है कि गंगा का जलस्तर कम होने के दौरान भू-कटान होना एक सामान्य बात है, जिसकी जांच कराकर शासन को रिपोर्ट भिजवाई जाएगी।