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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय में बह रही आध्यात्मिकता की लहर
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प्रवचन और प्रदर्शनी के माध्यम से दिया जा रहा ज्ञान
गढ़मुक्तेश्वर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के कैंप में श्रद्धा और भक्ति की लहर दिखाई पड़ रही है। जहां प्रवचन और प्रदर्शनी के माध्यम से लोगों को ज्ञान दिया जा रहा है।
गढ़ गंगा कार्तिक पूर्णिमा मेले में प्रति वर्ष प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के तत्वावधान में कैंप का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भी मेला परिक्षेत्र में कैंप लगाकर लोगों को भक्ति मार्ग पर चलने का आह्वान किया जा रहा है। रविवार को आयोजित प्रवचन में बीके स्वर्णा ने कहा कि भगवान शिव और मां गंगा का बहुत गहरा संबंध है। शिव की जटाओं से निकली गंगा अर्थात भगवान शिव धरा पर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। जिससे मनुष्य की आत्मा पावन बन जाती है। परमात्मा शिव को पतित पावन कहा जाता है। इसलिए ही मां गंगा पतित पावनी कहलाई गई। उन्होंने कहा कि जब तक आत्मा पावन नहीं हो जाती, तब तक मुक्ति की अधिकारी नहीं बन सकती। बीके स्वर्णा ने कहा कि मनुष्य के पापों को मिटाने और पुण्यकर्म की ओर अग्रसर करने के लिए ही गढ़ गंगा में कार्तिक पूर्णिमा मेले का आयोजन किया जाता है। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के कैंप में मेडिटेशन(ध्यान) कक्ष बनाया गया है। जहां आने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान कराकर मन की शांति का अनुभव कराया जा रहा है। इसके अलावा 12 ज्योर्तिलिंग दर्शन और आध्यात्मिक चित्र प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जा रहा है। जिसमें भारत के कोने-कोने में स्थापित ज्योर्तिलिंगों दर्शन श्रद्धालुओं को मिल रहा है। इस मौके पर हापुड़ सेवा केंद्र संचालिका बीके ज्योति, बीके सोनाली, सुरेश चंद, सुनील कुमार, लक्ष्मण शर्मा, यतेंद्र, सोमपाल पवार, राजकुमार, जयलाल, मदनपाल चौधरी, धनश्याम, यजदेव, रजज चौहान आदि मौजूद रहे।
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गढ़मुक्तेश्वर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के कैंप में श्रद्धा और भक्ति की लहर दिखाई पड़ रही है। जहां प्रवचन और प्रदर्शनी के माध्यम से लोगों को ज्ञान दिया जा रहा है।
गढ़ गंगा कार्तिक पूर्णिमा मेले में प्रति वर्ष प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के तत्वावधान में कैंप का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भी मेला परिक्षेत्र में कैंप लगाकर लोगों को भक्ति मार्ग पर चलने का आह्वान किया जा रहा है। रविवार को आयोजित प्रवचन में बीके स्वर्णा ने कहा कि भगवान शिव और मां गंगा का बहुत गहरा संबंध है। शिव की जटाओं से निकली गंगा अर्थात भगवान शिव धरा पर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। जिससे मनुष्य की आत्मा पावन बन जाती है। परमात्मा शिव को पतित पावन कहा जाता है। इसलिए ही मां गंगा पतित पावनी कहलाई गई। उन्होंने कहा कि जब तक आत्मा पावन नहीं हो जाती, तब तक मुक्ति की अधिकारी नहीं बन सकती। बीके स्वर्णा ने कहा कि मनुष्य के पापों को मिटाने और पुण्यकर्म की ओर अग्रसर करने के लिए ही गढ़ गंगा में कार्तिक पूर्णिमा मेले का आयोजन किया जाता है। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के कैंप में मेडिटेशन(ध्यान) कक्ष बनाया गया है। जहां आने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान कराकर मन की शांति का अनुभव कराया जा रहा है। इसके अलावा 12 ज्योर्तिलिंग दर्शन और आध्यात्मिक चित्र प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जा रहा है। जिसमें भारत के कोने-कोने में स्थापित ज्योर्तिलिंगों दर्शन श्रद्धालुओं को मिल रहा है। इस मौके पर हापुड़ सेवा केंद्र संचालिका बीके ज्योति, बीके सोनाली, सुरेश चंद, सुनील कुमार, लक्ष्मण शर्मा, यतेंद्र, सोमपाल पवार, राजकुमार, जयलाल, मदनपाल चौधरी, धनश्याम, यजदेव, रजज चौहान आदि मौजूद रहे।
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