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मेडिकल रिपोर्ट में खेल कर पुलिस ने बदल दी धारा

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 07 Sep 2019 12:03 AM IST
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hapur news
मेडिकल रिपोर्ट में खेल कर पुलिस ने बदल दी धारा
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गढ़मुक्तेश्वर। सिंभावली पुलिस ने फर्जी मेडिकल के आधार पर मारपीट के मामले में आरोपियों के खिलाफ धारा बढ़ा दी। पीड़ित ने जब रिपोर्ट देखी तो व्हाइटनर का निशान दिखने पर उसे शक हुआ। रिपोर्ट की दूसरी कॉपी निकलवाने पर मामले का खुलासा हुआ। मामले में प्रतिवादी पक्ष ने कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद कोर्ट ने मेरठ के डायग्नोस्टिक सेंटर की रिपोर्ट को तलब कर लिया। पीड़ित ने पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर आईजी मेरठ को पत्र भेजा है।

सिंभावली क्षेत्र के गांव मुरादपुर में 21 जुलाई की रात हुए विवाद में दो पक्षों के आधा दर्जन से अधिक लोग गंभीर रुप से घायल हो गए थे। जिसमें एक पक्ष से मुरादपुर निवासी इमरान अली को भी चोट आई थी। जिसे सिंभावली पीएचसी के चिकित्सकों ने गंभीर हालत में मेरठ के लिए रेफर कर दिया था। जहां चिकित्सक के परमार्श के आधार पर 27 जुलाई 2019 को इमरान का सीटी स्कैन कराया गया। मेरठ के एक डायग्नोस्टिक सेंटर में सिटी स्कैन होने के बाद वहां से जारी रिपोर्ट में इमरान के सिर में गंभीर चोट दर्शाई गई, जिसके आधार पर सिंभावली पुलिस ने आरोपी पक्ष के सात लोगों के खिलाफ धारा 308 के तहत रिपोर्ट दर्ज की, जिनमें से पांच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा जा चुका है, लेकिन सीटी स्कैन की रिपोर्ट में व्हाइटनर का निशान देखकर प्रतिवादी पक्ष डायग्नोस्टिक सेंटर पहुंचा और रिपोर्ट की दूसरी कापी निकलवा ली। प्रतिवादी पक्ष का कहना है कि दूसरी रिपोर्ट में इमरान के सिर में किसी भी तरह की चोट से इंकार किया गया है। प्रतिवादी पक्ष का आरोप है कि पुलिस ने व्हाइटनर लगी हुई रिपोर्ट को आधार मानते हुए कार्रवाई की है, जिससे पुलिस और दूसरे पक्ष की मिलीभगत नजर आ रही है। प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता की शिकायत पर कोर्ट ने डायग्नोस्टिक सेंटर के चिकित्सक को सही रिपोर्ट समेत कोर्ट में तलब किया है। जबकि प्रतिवादी पक्ष के पांच लोग 24 जुलाई से जेल में बंद है। एडीजे न्यायालय से आकिब, साजिद और मुसाहिद की जमानत अर्जी 13 अगस्त खारिज कर दी गई, जबकि 29 अगस्त को तालिब और शाहनवाज की भी जमानत अर्जी खारिज कर दी गई है। प्रतिवादी पक्ष की तरफ से मुस्ते हसन ने आईजी मेरठ को पत्र देकर पुलिस व डायग्नोस्टिक सेंटर के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।
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कोट
सीओ अशोक कुमार शुक्ल का कहना है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है। विवेचना अधिकारी के खिलाफ नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया गया है।
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