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प्राइवेट लैब में डेंगू पॉजिटिव, सरकारी जांच में निगेटिव
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प्राइवेट लैब में डेंगू पॉजिटिव, सरकारी जांच में निगेटिव
हापुड़। प्राइवेट लैब डेंगू की जांच में खेल कर रही हैं, इसका खुलासा सरकारी लैब में जांच होकर आए संदिग्ध मरीजों के सैंपल से हुआ है। अब तक प्राइवेट लैबों ने उनके यहां डेंगू पॉजिटिव मिले करीब 80 मरीजों के सैंपल स्वास्थ्य विभाग को सौंपे थे, जिसमें महज 22 ही एलाइजा टेस्ट में पॉजिटिव मिले हैं, बाकी सभी में डेंगू निगेटिव मिला है। स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में जांच बैठा दी है।
जिले के प्राइवेट अस्पतालों के वार्ड बुखार के मरीजों से फुल हैं, इसमें हर दूसरा मरीज डेंगू से पीड़ित है। ऐसा हम नहीं बल्कि निजी प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट कह रही है। स्वास्थ्य विभाग पूरे जिले में 22 ही मरीज खोज पाया है, लेकिन प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती मरीजों की आहट विभाग को नहीं है। अमर उजाला की पड़ताल में 40 से भी अधिक मरीजों ने खुद के डेंगू संक्रमित होने का प्रमाण दिखाया था।
दिलचस्प बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग ने हर पॉजिटिव मरीज का सैंपल विभाग को उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं। इसी क्रम में अब तक प्राइवेट लैब के करीब 80 मरीजों के सैंपल स्वास्थ्य विभाग को दे चुकी हैं, हैरत की बात यह है कि प्राइवेट लैब में डेंगू पॉजिटिव आने वाले अधिकांश मरीज सरकारी जांच में निगेटिव आ रहे हैं।
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मुख्य बात यह भी है कि डेंगू पॉजिटिव आते ही प्राइवेट अस्पतालों में मरीज का बिल 50 हजार से एक लाख रुपये तक बनना तय है। ब्लड प्लेटलेट्स गिरने पर यह खर्च और भी बढ़ जाता है। बहरहाल, सीएमओ ने इस मामले में जांच कमेटी गठित कर दी है, जो मरीजों से फीडबैक लेगी और प्रयोगशालाओं से भी उनका पक्ष सुनेगी।
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-हाल ही में भेजे आठ सैंपल की रिपोर्ट भी निगेटिव-
हाल ही में प्रयोगशालाओं से विभाग को आठ मरीजों के सैंपल मिले हैं, जिनका एलाइजा टेस्ट कराया गया। इनकी रिपोर्ट डेंगू निगेटिव आयी है, जबकि प्राइवेट लैबों ने इन मरीजों में डेंगू की पुष्टि की थी।
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-डेंगू को लेकर रिपोर्ट से खिलवाड़ की तो होगी कार्रवाई
डेंगू को लेकर यदि गलत रिपोर्ट बनायी तो सख्त कार्रवाई होगी। टीम को जांच में लगा दिया गया है, मरीजों से फीडबैक लिया जा रहा है। गलत कार्य करने वाली प्रयोगशालाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।--डॉ. सुनील कुमार, सीएमओ।
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हापुड़। प्राइवेट लैब डेंगू की जांच में खेल कर रही हैं, इसका खुलासा सरकारी लैब में जांच होकर आए संदिग्ध मरीजों के सैंपल से हुआ है। अब तक प्राइवेट लैबों ने उनके यहां डेंगू पॉजिटिव मिले करीब 80 मरीजों के सैंपल स्वास्थ्य विभाग को सौंपे थे, जिसमें महज 22 ही एलाइजा टेस्ट में पॉजिटिव मिले हैं, बाकी सभी में डेंगू निगेटिव मिला है। स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में जांच बैठा दी है।
जिले के प्राइवेट अस्पतालों के वार्ड बुखार के मरीजों से फुल हैं, इसमें हर दूसरा मरीज डेंगू से पीड़ित है। ऐसा हम नहीं बल्कि निजी प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट कह रही है। स्वास्थ्य विभाग पूरे जिले में 22 ही मरीज खोज पाया है, लेकिन प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती मरीजों की आहट विभाग को नहीं है। अमर उजाला की पड़ताल में 40 से भी अधिक मरीजों ने खुद के डेंगू संक्रमित होने का प्रमाण दिखाया था।
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दिलचस्प बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग ने हर पॉजिटिव मरीज का सैंपल विभाग को उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं। इसी क्रम में अब तक प्राइवेट लैब के करीब 80 मरीजों के सैंपल स्वास्थ्य विभाग को दे चुकी हैं, हैरत की बात यह है कि प्राइवेट लैब में डेंगू पॉजिटिव आने वाले अधिकांश मरीज सरकारी जांच में निगेटिव आ रहे हैं।
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मुख्य बात यह भी है कि डेंगू पॉजिटिव आते ही प्राइवेट अस्पतालों में मरीज का बिल 50 हजार से एक लाख रुपये तक बनना तय है। ब्लड प्लेटलेट्स गिरने पर यह खर्च और भी बढ़ जाता है। बहरहाल, सीएमओ ने इस मामले में जांच कमेटी गठित कर दी है, जो मरीजों से फीडबैक लेगी और प्रयोगशालाओं से भी उनका पक्ष सुनेगी।
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-हाल ही में भेजे आठ सैंपल की रिपोर्ट भी निगेटिव-
हाल ही में प्रयोगशालाओं से विभाग को आठ मरीजों के सैंपल मिले हैं, जिनका एलाइजा टेस्ट कराया गया। इनकी रिपोर्ट डेंगू निगेटिव आयी है, जबकि प्राइवेट लैबों ने इन मरीजों में डेंगू की पुष्टि की थी।
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-डेंगू को लेकर रिपोर्ट से खिलवाड़ की तो होगी कार्रवाई
डेंगू को लेकर यदि गलत रिपोर्ट बनायी तो सख्त कार्रवाई होगी। टीम को जांच में लगा दिया गया है, मरीजों से फीडबैक लिया जा रहा है। गलत कार्य करने वाली प्रयोगशालाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।--डॉ. सुनील कुमार, सीएमओ।