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Hapur News: बच्चे से कुकर्म करने के दोषी को पांच वर्ष के कारावास की सजा
Tue, 01 Aug 2023 10:00 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Tue, 01 Aug 2023 10:00 PM IST
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हापुड़। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कोर्ट ने नाबालिग से कुकर्म करने के मामले में मंगलवार को निर्णय सुनाया। जिसमें न्यायाधीश ने मामले के दोषी को पॉक्सो सहित कुकर्म का दोषी करार देते हुए पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी पर 17 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
विशेष लोक अभियोजक हरेंद्र त्यागी ने बताया कि हाफिजपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव निवासी व्यक्ति ने थाने में तहरीर दी। जिसमें उसने कहा कि एक जनवरी 2019 को उसके नौ वर्षीय नाबालिग पुत्र से गांव चितौली निवासी मोनू पुत्र सुमंत ने कुकर्म की घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने आरोपी मोनू के खिलाफ पॉक्सो, कुकर्म सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। जिसके बाद पुलिस ने 28 फरवरी 2019 मामले का आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। जहां पर न्यायाधीश श्वेता दीक्षित ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मंगलवार को मामले में निर्णय सुनाया। जिसमें आरोपी मोनू को पॉक्सो की धारा दस लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, कुकर्म, मारपीट सहित विभिन्न धाराओं का दोषी करार दिया। न्यायाधीश ने दोषी को पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 17 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड जमा न करने पर दोषी को छह माह पांच दिन का अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
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विशेष लोक अभियोजक हरेंद्र त्यागी ने बताया कि हाफिजपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव निवासी व्यक्ति ने थाने में तहरीर दी। जिसमें उसने कहा कि एक जनवरी 2019 को उसके नौ वर्षीय नाबालिग पुत्र से गांव चितौली निवासी मोनू पुत्र सुमंत ने कुकर्म की घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने आरोपी मोनू के खिलाफ पॉक्सो, कुकर्म सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। जिसके बाद पुलिस ने 28 फरवरी 2019 मामले का आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। जहां पर न्यायाधीश श्वेता दीक्षित ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मंगलवार को मामले में निर्णय सुनाया। जिसमें आरोपी मोनू को पॉक्सो की धारा दस लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, कुकर्म, मारपीट सहित विभिन्न धाराओं का दोषी करार दिया। न्यायाधीश ने दोषी को पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 17 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड जमा न करने पर दोषी को छह माह पांच दिन का अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
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