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Hapur News: आज दिखा चांद तो कल होगा पहला रोजा
Thu, 27 Feb 2025 10:12 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Thu, 27 Feb 2025 10:12 PM IST
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गढ़मुक्तेश्वर। अपने दामन में रहमत और बरकत को समेटे मुकद्दस रमजान-उल-मुबारक शुरू होने को है। आज यानि शुक्रवार की शाम इस पाक महीने का चांद दिख जाता है तो शनिवार से पहला रोजा शुरू हो जाएगा। चांद देखते ही इबादत का सिलसिला भी शुरू होगा। शुक्रवार शाम चांद नहीं दिखता है तो रमजान माह रविवार से शुरू होगा।
इस्लामिक कैलेंडर के नौवें महीने को रमजान-उल-मुबारक कहा जाता है। शाबान का महीना पूरा होने के बाद चांद देखने पर इस मुकद्दस महीने की शुरुआत होगी। उर्दू कैलेंडर में महीने 29 या 30 दिन के होते हैं। शुक्रवार को इस महीने का 29वां दिन है। लोग शुक्रवार की शाम चांद देखने की कोशिश करेंगे। चांद दिखने पर पहला रोजा शनिवार से होगा। उलेमाओं के मुताबिक पूरे दिन भूखे-प्यासे रहकर रोजा रखा जाता है। रोजा की हालत में इबादत करने से आम दिनों के मुकाबले ज्यादा शबाब हासिल होता है। इस पाक महीने के इस्तकबाल के लिए सभी घरों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। मस्जिदों में भी खास तैयारियां की जा रही हैं। चांद देखने के बाद रोजा तो अगले दिन से शुरू होगा, लेकिन तरावीह की नमाज चांद की रात से ही शुरू हो जाएगी। रमजान के महीने में रात के समय इशा की नमाज के बाद जमाअत के साथ कुरआन पाक सुनी जाती है। इसे तरावीह की नमाज कहते हैं। कमोबेश सभी मस्जिदों में यह नमाज अदा की जाएगी। इसके अलावा भी लोग अपनी-अपनी सहूलियत के मुताबिक अलग-अलग जगहों पर भी तरावीह की नमाज का इंतजाम करते हैं।
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इस्लामिक कैलेंडर के नौवें महीने को रमजान-उल-मुबारक कहा जाता है। शाबान का महीना पूरा होने के बाद चांद देखने पर इस मुकद्दस महीने की शुरुआत होगी। उर्दू कैलेंडर में महीने 29 या 30 दिन के होते हैं। शुक्रवार को इस महीने का 29वां दिन है। लोग शुक्रवार की शाम चांद देखने की कोशिश करेंगे। चांद दिखने पर पहला रोजा शनिवार से होगा। उलेमाओं के मुताबिक पूरे दिन भूखे-प्यासे रहकर रोजा रखा जाता है। रोजा की हालत में इबादत करने से आम दिनों के मुकाबले ज्यादा शबाब हासिल होता है। इस पाक महीने के इस्तकबाल के लिए सभी घरों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। मस्जिदों में भी खास तैयारियां की जा रही हैं। चांद देखने के बाद रोजा तो अगले दिन से शुरू होगा, लेकिन तरावीह की नमाज चांद की रात से ही शुरू हो जाएगी। रमजान के महीने में रात के समय इशा की नमाज के बाद जमाअत के साथ कुरआन पाक सुनी जाती है। इसे तरावीह की नमाज कहते हैं। कमोबेश सभी मस्जिदों में यह नमाज अदा की जाएगी। इसके अलावा भी लोग अपनी-अपनी सहूलियत के मुताबिक अलग-अलग जगहों पर भी तरावीह की नमाज का इंतजाम करते हैं।
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