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धार्मिक स्थल में मिली शराब की खाली बोतलें, तनाव
अमर उजाला ब्यूरो/हापुड़
Updated Mon, 23 Jan 2017 12:46 PM IST
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हंगामा
- फोटो : अमर उजाला
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बहादुरगढ़ गांव में शनिवार रात असामाजिक तत्वों ने धार्मिक स्थल में शराब की खाली बोतलें रख दीं, साथ ही धार्मिक स्थल के सामान के साथ छेड़छाड़ भी की। सुबह मामले की जानकारी पर क्षेत्र के लोेगों में तनाव फैल गया।
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रविवार सुबह सूचना पर पहुंचे एएसपी और एसडीएम ने लोगों को किसी तरह शांत कराया। मामले में 12 ग्रामीणों की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, गांव में तनाव की स्थिति को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है।
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जानकारी के मुताबिक, संवेदनशील गांव बहादुरगढ़ में शनिवार देर रात को कुछ शरारती तत्वों ने धार्मिक स्थल में शराब की खाली बोतलें और कुछ गिलास रख दिए। साथ ही धार्मिक स्थल में रखे सामान को भी इधर-उधर फैला दिया।
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खबर मिलते ही क्षेत्र के लोगों में तनाव फैल गया। सैकड़ों की संख्या में मौके पर पहुंचे लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। एसडीएम आरएन पांडेय, सीओ सतीश चंद्र पांडेय और एसओ संजीव शुक्ला मौके पर पहुंचे।
एएसपी आरएन यादव ने शरारती तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कराने का भरोसा देकर गुस्साए लोगों को शांत कराया। वहीं, करीब एक दर्जन ग्रामीणों ने संयुक्त तौर पर अज्ञात शरारती तत्वों के खिलाफ तहरीर दी है। एसओ संजीव शुक्ला ने बताया कि मामले में रिपोर्ट दर्ज कर शरारती तत्वों की तलाश की जा रही है। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
गांव में पुलिस बल तैनात
चुनावी दौर में हुई इस घटना की सूचना से पुलिस-प्रशासन में हड़कंप मच गया। गांव में शांति बरकरार रखने और तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया है। गांव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। सीओ सतीश चंद्र पांडेय ने बताया कि अमनचैन और भाईचारे की भावना को पलीता लगाने की नापाक कोशिश करने वाले शरारती तत्वों को किसी भी दशा में बख्शा नहीं जाएगा। आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी दंगों की आग में झुलस चुका है बहादुरगढ़
संवेदनशील बहादुरगढ़ गांव पहले भी दंगों की आग में झुलस चुका है। 2014 में छात्रा से छेड़खानी की घटना के विरोध पर हुई मारपीट ने सांप्रदायिक दंगे का रूप ले लिया था। दंगे में दर्जनों दुकानें और मकानों में लूटपाट के बाद उपद्रवियों ने आगजनी की थी।
गौरतलब है कि अगस्त 2014 में एक कॉलेज की छात्रा से छेड़खानी के विरोध में हुई मारपीट दंगे के रूप में बदल गई थी। उपद्रवियों ने धर्म स्थल में भी जमकर तोड़फोड़ की थी।
बहादुरगढ़ गांव में हुई सांप्रदायिक हिंसा के चलते आसपास के अधिकांश गांवों में बड़े स्तर पर तनाव व्याप्त हो गया था। पुलिस-प्रशासन के आला अफसरों समेत पीएसी को कई सप्ताह तक गांव में पड़ाव डालकर हालात संभालने पड़े थे।
घटना के दौरान गरीब-मजदूर और कमजोर तबके के सैकड़ों परिवार दहशत के चलते घर बार छोड़कर पलायन कर गए थे। दोनों ही पक्षों के लोगों ने नामजद कर एफआईआर दर्ज कराई थी।