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Hapur News: 500 लोगों से की करोड़ों की ठगी, सात शातिर गिरफ्तार

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 26 Feb 2024 01:43 AM IST
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Cheated 500 people of crores, seven criminals arrested
इंदिरापुरम। तकनीकी दिक्कत दूर करने का झांसा देकर अमेरिका व अन्य दूसरे देशों के 500 ये ज्यादा लोगों के साथ करोड़ों की ठगी करने वाले सात शातिरों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इंदिरापुरम कोतवाली क्षेत्र के शक्तिखंड-4 में फर्जी कॉल सेंटर बनाकर शातिरों ने वारदात की। गिरोह का मास्टरमाइंड बीकॉम पास राजेश दास, देवव्रत और देवी सिंह है। पुलिस ने मौके से 17,79,800 रुपये नकद, 11 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, दो हेडफोन और एक लैपटॉप का चार्जर बरामद किया है।
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डीसीपी निमिष पाटिल ने बताया कि शक्तिखंड-4 में एक फ्लैट के अंदर फर्जी कॉल सेंटर चलाकर से विदेशियों के साथ ठगी व धोखाधड़ी करने की सूचना मिली थी। टीम ने छापा मारकर सरगना राजेश दस पुत्र रमाकांत निवासी ज्ञानखंड-2, देवव्रत पुत्र मनोज कुमार निवासी आम्रपाली विलेज सोसायटी-मकनपुर, देवी प्रसाद मोहंती पुत्र भागीरथी मोहंती निवासी अलीगंज, दिल्ली स्टाफ के अमित राजदान पुत्र शुभम कृष्ण निवासी बिसरख गौतमबुद्धनगर, विशाल सिंह पुत्र ईश्वर सिंह निवासी मालवीय नगर दिल्ली, मनीष पांडेय पुत्र अशोक पांडेय निवासी महरौली और अतुल पुत्र गंगाराम निवासी गोपालपुर थाना नूरपुर बिजनौर को गिरफ्तार कर लिया।
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सरगना राजेश दास ने पूछताछ में बताया कि वे सभी कॉल सेंटर में बैठकर अमेरिका और अन्य देशों के लोगों से स्काइप पर बात करके एनीडेस्क व अल्ट्रा व्यूअर एप के माध्यम से उनके कंप्यूटर व मोबाइल फोन को अपने कंट्रोल में ले लेते थे। फिर उनके बैंक की डिटेल लेकर उनके ही लैपटॉप व फोन के जरिए धोखे से गिफ्ट वाउचर में राशि ले लेते थे। इसके अलावा विदेशियों से ऑनलाइन संपर्क करके उनके इलेक्ट्रॉनिक गैजेट पर पॉपअप व बल्क मैसेज भेजकर राशि अपने खाते में ट्रांसफर करा लेते थे। अब तक कई विदेशियों को जाल में फंसाकर करोड़ों रुपये ऐंठ चुके हैं। पुलिस उनके खातों की भी जांच कर रही है।
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बीकॉम पास सरगना चला रहा था कॉल सेंटर
एसीपी स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि राजेश दास व देवव्रत बीकॉम पास जबकि देवी प्रसाद 12वीं पास है। मास्टरमाइंड राजेश दास ने ही फर्जी कॉल सेंटर बनाकर ठगी व धोखाधड़ी करने की योजना बनाई थी। फिर उसने देवव्रत और देवी सिंह को साझीदार बनाया। इससे पहले सभी कर्मचारी नोएडा की एक निजी कंपनी में काम करते थे। पूछताछ में पता चला कि स्टाफ में काम करने वाले अमित, मनीष और अतुल 12वीं पास हैं। विशाल ने सातवीं कक्षा तक पढ़ाई की है।



स्टाफ को 20-20 हजार रुपये देते थे वेतन

पुलिस का कहना है कि गिरोह में एक विदेशी के भी शामिल होने की बात सामने आई है जो इन लोगों को अमेरिका और अन्य देशों के लोगों की तकनीकी समस्या दूर करने के लिए संपर्क नंबर देता था। वह डॉलर को अपने खाते में ट्रांसफर कराकर इनका कमीशन भारतीय नकदी में बदलकर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करता था। पुलिस अब उस विदेशी की भी पहचान करने में लगी है।
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