फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hapur News ›   Buildings constructed using 53 crore in scholarship funds... salaries distributed to employees.

Hapur News: 53 करोड़ की छात्रवृत्ति से बनवाए भवन...कर्मचारियों को बांटे वेतन

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 07 Aug 2026 10:58 PM IST
विज्ञापन
Buildings constructed using 53 crore in scholarship funds... salaries distributed to employees.
अमर उजाला में प्रकाशित हुई  खबर।
हापुड़। जरूरतमंद छात्रों को पढ़ाई में मदद के लिए मिली छात्रवृत्ति से मोनाड विश्वविद्यालय में भवन व क्रीड़ा स्थल निर्माण, शिक्षकों व कर्मचारियों को वेतन, प्रयोगशाला में प्रयोग होने वाले उपकरणों और बिजली, पानी के बिलों को जमा करने में खर्च किया गया। जांच के बाद शासन स्तर पर गठित सात सदस्यीय अधिकारियों की समिति ने करीब 53 करोड़ रुपये की गड़बड़ी पकड़ी है।
विज्ञापन

विश्वविद्यालय की ओर से यह धनराशि छात्रों के खातों से ही विश्वविद्यालय के खाते में अंतरित करना बताया गया, जबकि सवाल यह था कि जरूरतमंद छात्र यह धनराशि विवि को वापस क्यों देंगे, इसका जवाब विवि के पास भी नहीं है। जांच समिति ने इसे शासकीय धनराशि के गबन का मामला माना है।
विज्ञापन

अनुसूचित जाति/जनजाति और सामान्य वर्ग दशमोत्तर छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति में हुई गड़बड़ी के मामले में पिछले दिनों समाज कल्याण विभाग ने मोनाड विवि को ब्लैक लिस्ट कर दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

छात्रवृत्ति को लेकर हुई जांच में सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2012-13 से 2024-25 तक प्रतिवर्ष अनुसूचित जाति/जनजाति के छात्रों के सापेक्ष 50.21 करोड़ और सामान्य वर्ग के छात्रों के सापेक्ष 3.04 करोड़ की छात्रवृत्ति कूटरचित उपस्थिति पंजिका के माध्यम से वित्तीय गबन की मंशा से प्राप्त की गई।
जबकि शासन ने इस धनराशि को छात्रों के उज्ज्वल भविष्य को बनाने के लिए जारी किया था। अब इस धनराशि की विश्वविद्यालय से वसूली की तैयारी शुरू कर दी गई है।
जिले के निवासी नहीं थे अधिकतर छात्र -
जांच में सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में अनुसूचित जाति के 697 छात्रों में से 320 छात्र अन्य जिलों के निवासी हैं, जो जिले में निवास नहीं कर रहे थे। विवि ने इनकी उपस्थिति 75 प्रतिशत से अधिक दर्शायी है।
जिससे साफ हुआ कि फर्जी उपस्थिति दर्शाकर छात्रवृत्ति हड़पने के लिए आवेदन हुए। इसी प्रकार सामान्य वर्ग के 210 छात्रों का डाटा परीक्षण करने पर 80 प्रतिशत डाटा कूटरचित मिला।
साथ ही वित्तीय वर्ष 2023-24 में बीटेक, फार्मेसी, पॉलीटेक्निक आदि कोर्स में अध्ययनरत छात्र मथुरा जिले की माट तहसील के निवासी थे। छात्रवृत्ति आवेदन के समय इनकी उपस्थिति भी 75 प्रतिशत दर्शायी गई, जबकि वित्तीय वर्ष 2024-25 में इन छात्रों का डाटा उपलब्ध नहीं कराया गया।
प्रदेश स्तरीय सात अधिकारियों की समिति ने की कार्रवाई
समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह, एनआईसी (आईटी) की वरिष्ठ निदेशक शुभा श्रीवास्तव, समाज कल्याण विभाग के उप निदेशक आनंद कुमार सिंह, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के उप निदेशक ललित किशोर मिश्र, जनजाति विकास विभाग की उप निदेशक प्रियंका वर्मा, प्राविधिक शिक्षा परिषद उप सचिव मानेंद्र कुमार कनौजिया और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सहायक निदेशक अवनीश त्रिपाठी की सात सदस्यीय अधिकारियों की टीम ने जांच कर अपनी रिपोर्ट दी। इनकी रिपोर्ट के आधार पर ही निदेशक संजीव सिंह ने विवि को तीन साल के लिए छात्रवृत्ति के मामले में ब्लैक लिस्ट किया है।



अमर उजाला में प्रकाशित खबर पर शुरू हुई थी जांच

पिछले वर्ष छह जून 2025 को अमर उजाला में प्रकाशित छात्रवृत्ति नहीं मिली तो मोनाड विश्वविद्यालय ने निरस्त किए दाखिले की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। इस मामले में नौ जून 2025 को विभाग के संयुक्त निदेशक मेरठ मंडल व जिला समाज कल्याण अधिकारी की समिति गठित कर विवि में छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत छात्रों के फर्जी तरीके से छात्रवृत्ति प्राप्त करने की शिकायतों की जांच करने के निर्देश दिए थे।
कोट
जांच के बाद शासन और मुख्यालय स्तर पर गठित समिति ने मोनाड विवि के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए ब्लैक लिस्ट किया है। छात्रवृत्ति योजना में हुई धांधली पर जल्द वसूली की कार्रवाई भी होगी। छात्रवृत्ति की धनराशि विवि के कार्यों में प्रयोग होना नियम विरुद्ध है।- दिग्विजय सिंह,
जिला समाज कल्याण अधिकारी
शासन से छात्रवृत्ति विद्यार्थियों के खाते में ही जाती है। वही इसे खाते से निकाल सकते हैं। विद्यार्थियों ने छात्रवृत्ति से कोर्स की अपनी फीस विवि के खाते में जमा की है। इससे विवि में काम कराए गए हैं, तत्कालीन अधिकारी की जांच तथ्यहीन है।

- डॉ. मोहम्मद जावेद, वीसी, मोनाड विवि

वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में आए नए नियम के अनुसार शून्य फीस पर कोई भी कॉलेज छात्र का दाखिला नहीं ले सकता है। इसके बाद भी बांड भरकर दाखिले दिए गए। प्रदेश के 40 जिलों और अन्य राज्यों से छात्रों के विवि में दाखिले हुए थे। जब यह पूछा गया कि छात्र जिले में कहां पर रहकर पढ़ाई कर रहे हैं तो सही जवाब नहीं मिले। छात्रवृत्ति हड़पने के लिए यह पूरा खेल चल रहा था। - शिवकुमार,
तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी और जांच अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed