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प्रदूषित पानी से एक और मौत
सतीश शर्मा/अमर उजाला, गढ़
Updated Thu, 03 Mar 2016 01:27 AM IST
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गढ़ क्षेत्र के प्रदूषित पानी ने एक और जान ले ली। सिंभावली के गांव वैट में ग्राम प्रधान एकता समिति प्रदेशाध्यक्ष के बड़े भाई की मौत हो गई।
उनका इलाज गाजियाबाद के अस्पताल में चल रहा था। डॉक्टरों ने मौत का कारण दूषित से गुर्दे लीवर फेल होना बताया है।
वैट गांव में ग्राम प्रधान एकता समिति के प्रदेशाध्यक्ष छोटे खां के बड़े भाई शेरदीन खां (59) की देर रात मौत हो गई। उनका इलाज दिल्ली, नोएडा, फरीदाबाद, गुड़गांव के बाद गाजियाबाद के अस्पताल में चल रहा था।
परिजनों का कहना है कि शेरदीन खां गुर्दे, फेफड़े और लीवर फेल हो गए थे। मुबारक अहमद, बच्चू खां, जिया परवेज का कहना है कि जांच में कई बार पुष्टि हो चुकी है कि गांव का भूजल दूषित है।
इसके बाद भी सरकारी स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। जिस कारण हेपेटाइटिस, कैंसर, लिवर, आंतों में गंभीर संक्रमण आदि से लोग शिकार हो रहे हैं।
इन गांवों ज्यादा स्थिति खराब
मानकचौक, हशूपुर, वैट, बक्सर, सेहल, रतूूपुरा, पसवाड़ा, भगवानपुर, श्यामपुर जट्ट, डिबाई, फुलडेहरा, रझैटी, जखैड़ा रहमतपुर, सलोनी, पूठ, रहरवा, क्रियावली, शकराटीला आदि गांवों मेें स्थिति ज्यादा खराब है। इन गांवों में सैकड़ों कैंसर और हेपेटाइटिस से पीड़ित हैं।
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एनजीटी ने रोका था डिस्टलरी संचालन
2015 में पर्यावरणविद् कृष्णकांत हूण ने एनजीटी में जनहित याचिका दायर की थी। जिसमें सिंभावली डिस्टलरी और स्याना के दूध प्लांटों का प्रदूषित पानी पूठ गंगा में गिरने की बात कही थी। इसमें एनजीटी ने डिस्टलरी के संचालन को रोक दिया था।
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उनका इलाज गाजियाबाद के अस्पताल में चल रहा था। डॉक्टरों ने मौत का कारण दूषित से गुर्दे लीवर फेल होना बताया है।
वैट गांव में ग्राम प्रधान एकता समिति के प्रदेशाध्यक्ष छोटे खां के बड़े भाई शेरदीन खां (59) की देर रात मौत हो गई। उनका इलाज दिल्ली, नोएडा, फरीदाबाद, गुड़गांव के बाद गाजियाबाद के अस्पताल में चल रहा था।
परिजनों का कहना है कि शेरदीन खां गुर्दे, फेफड़े और लीवर फेल हो गए थे। मुबारक अहमद, बच्चू खां, जिया परवेज का कहना है कि जांच में कई बार पुष्टि हो चुकी है कि गांव का भूजल दूषित है।
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इसके बाद भी सरकारी स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। जिस कारण हेपेटाइटिस, कैंसर, लिवर, आंतों में गंभीर संक्रमण आदि से लोग शिकार हो रहे हैं।
इन गांवों ज्यादा स्थिति खराब
मानकचौक, हशूपुर, वैट, बक्सर, सेहल, रतूूपुरा, पसवाड़ा, भगवानपुर, श्यामपुर जट्ट, डिबाई, फुलडेहरा, रझैटी, जखैड़ा रहमतपुर, सलोनी, पूठ, रहरवा, क्रियावली, शकराटीला आदि गांवों मेें स्थिति ज्यादा खराब है। इन गांवों में सैकड़ों कैंसर और हेपेटाइटिस से पीड़ित हैं।
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एनजीटी ने रोका था डिस्टलरी संचालन
2015 में पर्यावरणविद् कृष्णकांत हूण ने एनजीटी में जनहित याचिका दायर की थी। जिसमें सिंभावली डिस्टलरी और स्याना के दूध प्लांटों का प्रदूषित पानी पूठ गंगा में गिरने की बात कही थी। इसमें एनजीटी ने डिस्टलरी के संचालन को रोक दिया था।