फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hapur News ›   Anafilij caused by the female Aedes mosquito Tigdi

मादा एनाफिलीज को एडीज मच्छर ने लगाई तिगड़ी

Sun, 18 Sep 2016 10:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो /हापुड़
अमर उजाला ब्यूरो /हापुड़ Updated Sun, 18 Sep 2016 10:20 PM IST
विज्ञापन
Anafilij caused by the female Aedes mosquito Tigdi
vdzgbdsx - फोटो : Getty Images

अगर आप डेंगू और चिकन गुनिया से बचे हुए हैं तो थोड़ा और सावधान हो जाएं, जिले में एडीज मच्छरों की संख्या अन्यों की तुलना में काफी ज्यादा हो गई है। यहां तक की इस मच्छर ने मलेरिया फैलाने वाले मादा एनाफिलीज को भी पीछे छोड़ दिया है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।

विज्ञापन


मामले की गंभीरता पर सीएमओ ने टीम गठित कर एडीज लार्वा को नष्ट करने के निर्देश दिए हैं।मलेरिया विभाग की रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष मलेरिया फैलाने वाला मादा एनाफिलीज सीमित संख्या में ही दिखाई पड़ रहा है। यही कारण है कि अभी तक मलेरिया का कोई मामला प्रकाश में नहीं आया है।
विज्ञापन


बीते तीन वर्ष की रिपोर्ट पर गौर करें तो हर साल अधिकतम पांच मरीज ही स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज हुए हैं। जबकि डेंगू और चिकन गुनिया के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।जिले में एडीज मच्छरों के प्रकोप का आलम यह है कि बीते वर्ष स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में करीब 300 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। इस वर्ष डेंगू तो कम मरीजों में मिल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


लेकिन चिकन गुनिया के मरीजों की बाढ़ सी आ गई है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने अपने रिकॉर्ड में सिर्फ दो मरीजों में ही इसकी पुष्टि दिखाई है। वहीं निजी अस्पतालों के चिकित्सक अधिकांश मरीजों में चिकन गुनिया का अंदेशा जता रहे हैं। उधर, एडीज मच्छरों के प्रकोप पर गंभीर सीएमओ ने टीम का गठन कर दिया है।

यह टीम क्षेत्र में निरीक्षण कर घरों में लगे कूलर, छतों पर पड़े खाली डब्बों में पनप रहा एडीज का लार्वा नष्ट करेंगे।एडीज एजिप्टी मच्छर हमेशा स्वच्छ पानी में पनपता है। मिट्टी के संपर्क वाले पानी में यह नहीं पाया जाता। कूलर, छतों पर पड़े डब्बों में इसका लार्वा नजर आ सकता है। दावा तो यह भी किया जाता है

यदि इसका अंडा एक वर्ष तक खाली बर्तन में पड़ा रहे और उसके बाद पानी के संपर्क में आ जाए तो फिर से फर्टिलाइज हो जायेगा। स्वास्थ्य अफसरों के अनुसार यह मच्छर सिर्फ 10 दिन में ही बड़ा हो जाता है। दो से तीन दिन में अंडे से लार्वा बन जाता है। चार से पांच दिन के अंदर लार्वा स प्यूपा और दो दिन के अंदर वयस्क हो जाता है।


-ऐसे करें रोकथाम-
- कूलर, छतों पर पड़े डब्बों में पानी जमा न होने दें।
- खाने में प्रयोग के लिए ताजा पानी इस्तेमाल करें।


- दिन के समय पूरे कपड़े पहन कर रहें।
- बुखार होने पर चिकित्सक की सलाह पर दवा का इस्तेमाल करें।


 इस वर्ष जिले में मलेरिया फैलाने वाले मादा एनाफिलीज मच्छर का प्रकोप कम है। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में इस वर्ष अभी तक एक भी मरीज मलेरिया पॉजीटिव नहीं मिल सका है। इन दिनों शहर के अस्पतालों में जर्नल वार्ड से लेकर आईसीयू तक मरीजों की भरमार हैं। अस्पतालों के 70 फीसदी बेड बुखार के मरीजों से भरे पड़े हैं।

बुखार के पीड़ित मरीजों से अस्पतालों के वार्ड फुल हैं, ऐसे में चिकित्सक सिर्फ उन्हीं मरीजों को भर्ती कर रहे हैं, जो खाने पीने में असमर्थ हैं। अन्य मरीजों को वापस घर भेजा जा रहा है। मरीजों की भरमार के चलते अस्पतालों में अतिरिक्त वार्ड बनाने की पहल शुरू कर दी गई है। चिकित्सक वार्ड बढ़ाने की फिराक में जगहों की तलाश करते फिर रहे हैं।



मुख्य चिकित्साधिकारी डा.एके सिंह का कहना है कि एडीज मच्छरों का प्रकोप चल रहा है। मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों की संख्या कम है। टीम का गठन कर लार्वा को नष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।
...

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed