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Hapur News: नलकूप के बिल पास करने के लिए ईओ पर रिश्वत मांगने का आरोप
Wed, 02 Apr 2025 10:28 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Wed, 02 Apr 2025 10:28 PM IST
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हापुड़। नलकूप के बिलों को पास कराने की एवज में चौधरी सिक्योरिटी सर्विस एंड प्लेसमेंट के संचालक चौधरी धूप सिंह ने नगर पालिका ईओ पर दो लाख की रिश्वत मांगने के आरोप लगाए हैं। मामले में ठेकेदार ने डीएम से शिकायत भी की है। साथ ही बिना कोई नोटिस दिए अचानक से नलकूप संचालन का टेंडर निरस्त करने का आरोप भी लगाया है।
चौधरी धूप सिंह ने डीएम से की शिकायत में बताया कि अधिशासी अधिकारी इंद्रपाल सिंह की नवीन तैनाती मार्च माह में हुई है। अग्रिम बिल पास करने के लिए दो लाख रुपये की मांग रखी। इसके लिए वह सहमत नहीं हुए तो ईओ ने आक्रोश में आकर उनका नगर पालिका के नलकूपों का संचालन कार्य बिना किसी सूचना के सीधे समाप्त कर दिया। इससे पूर्व कोई नोटिस और सूचना नहीं दी गई। जबकि, बोर्ड बैठक से प्रस्ताव पास हुआ है कि जब तक नई निविदा स्वीकृति नहीं होती है। तब तक पुरानी फर्म से ही कार्य लिया जाएगा।
ठेकेदार ने कहा कि पिछले दिनों उक्त निविदा में गड़बड़ी को लेकर जांच हुई थी। मंडलायुक्त द्वारा गठित जांच कमेटी ने तत्कालीन ईओ व जेई को दोषी पाया था। इस मामले में अभी कार्रवाई पूरी नहीं हुई है। इसलिए तब तक टेंडर प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए।
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मामले में अधिशासी अधिकारी इंद्रपाल सिंह का कहना है कि मुझे यह भी जानकारी नहीं है कि कौन से बिल हैं। बिना वजह गलत और झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।
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चौधरी धूप सिंह ने डीएम से की शिकायत में बताया कि अधिशासी अधिकारी इंद्रपाल सिंह की नवीन तैनाती मार्च माह में हुई है। अग्रिम बिल पास करने के लिए दो लाख रुपये की मांग रखी। इसके लिए वह सहमत नहीं हुए तो ईओ ने आक्रोश में आकर उनका नगर पालिका के नलकूपों का संचालन कार्य बिना किसी सूचना के सीधे समाप्त कर दिया। इससे पूर्व कोई नोटिस और सूचना नहीं दी गई। जबकि, बोर्ड बैठक से प्रस्ताव पास हुआ है कि जब तक नई निविदा स्वीकृति नहीं होती है। तब तक पुरानी फर्म से ही कार्य लिया जाएगा।
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ठेकेदार ने कहा कि पिछले दिनों उक्त निविदा में गड़बड़ी को लेकर जांच हुई थी। मंडलायुक्त द्वारा गठित जांच कमेटी ने तत्कालीन ईओ व जेई को दोषी पाया था। इस मामले में अभी कार्रवाई पूरी नहीं हुई है। इसलिए तब तक टेंडर प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए।
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मामले में अधिशासी अधिकारी इंद्रपाल सिंह का कहना है कि मुझे यह भी जानकारी नहीं है कि कौन से बिल हैं। बिना वजह गलत और झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।