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Hapur News: चेक बाउंस के दोषी पर लगा 2.40 लाख रुपये जुर्माना
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संवाद न्यूज एजेंसी
हापुड़। कोतवाली क्षेत्र के मोदीनगर रोड पर स्थित हर्ष विहार के रहने वाले लोकेश कुमार को उनके परिचित पंकज कुमार अग्रवाल ने 1.40 लाख रुपये का चेक देकर ठगी की। चेक बाउंस होने पर दो साल कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट ने आरोपी को 2.40 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया।साथही इतनी ही राशि का जुर्माना लगाया और एक साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई।
यह फैसला एसीजेएसडी-फर्स्ट/एसीजेएम हापुड़ कोर्ट में न्यायाधीश आदित्य जायसवाल ने सुनाया।वादी के अधिवक्ता अंकित अग्रवाल ने बताया कि पीड़ित लोकेश कुमार की आनंद विहार के पंकज कुमार अग्रवाल से अच्छी जान-पहचान थी। पंकज ने लोकेश से 1.50 लाख रुपये उधार लिए थे। बदले में उन्होंने 1.40 लाख का चेक दिया और बाकी दस हजार रुपये बाद में देने का वादा किया। लेकिन जब लोकेश ने चेक बैंक में जमा कराया, तो वह अपर्याप्त फंड के कारण बाउंस हो गया।
लोकेश ने तुरंतएनआई एक्ट की धारा 138 के तहत शिकायत दर्ज कराई। मामला दो वर्ष तक चला, जिसमें आरोपी ने कई बहाने बनाए। आखिरकार, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया। कोर्ट ने न सिर्फ मूल राशि पर ब्याज और मुआवजा जोड़कर 2.40 लाख का भुगतान आदेशित किया, बल्कि इतने ही जुर्माने की सजा भी लगाई। साथ ही, पंकज को एक वर्ष की साधारण कैद से दंडित किया गया। यह फैसला उन सभी पीड़ितों के लिए मिसाल है जो विश्वास के नाम पर ठगे जाते हैं।
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हापुड़। कोतवाली क्षेत्र के मोदीनगर रोड पर स्थित हर्ष विहार के रहने वाले लोकेश कुमार को उनके परिचित पंकज कुमार अग्रवाल ने 1.40 लाख रुपये का चेक देकर ठगी की। चेक बाउंस होने पर दो साल कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट ने आरोपी को 2.40 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया।साथही इतनी ही राशि का जुर्माना लगाया और एक साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई।
यह फैसला एसीजेएसडी-फर्स्ट/एसीजेएम हापुड़ कोर्ट में न्यायाधीश आदित्य जायसवाल ने सुनाया।वादी के अधिवक्ता अंकित अग्रवाल ने बताया कि पीड़ित लोकेश कुमार की आनंद विहार के पंकज कुमार अग्रवाल से अच्छी जान-पहचान थी। पंकज ने लोकेश से 1.50 लाख रुपये उधार लिए थे। बदले में उन्होंने 1.40 लाख का चेक दिया और बाकी दस हजार रुपये बाद में देने का वादा किया। लेकिन जब लोकेश ने चेक बैंक में जमा कराया, तो वह अपर्याप्त फंड के कारण बाउंस हो गया।
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लोकेश ने तुरंतएनआई एक्ट की धारा 138 के तहत शिकायत दर्ज कराई। मामला दो वर्ष तक चला, जिसमें आरोपी ने कई बहाने बनाए। आखिरकार, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया। कोर्ट ने न सिर्फ मूल राशि पर ब्याज और मुआवजा जोड़कर 2.40 लाख का भुगतान आदेशित किया, बल्कि इतने ही जुर्माने की सजा भी लगाई। साथ ही, पंकज को एक वर्ष की साधारण कैद से दंडित किया गया। यह फैसला उन सभी पीड़ितों के लिए मिसाल है जो विश्वास के नाम पर ठगे जाते हैं।
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