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बदइंतजामी न बिगाड़ दे मेला

Sun, 19 Oct 2014 05:33 AM IST
Hapur
Hapur Updated Sun, 19 Oct 2014 05:33 AM IST
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गढ़मुक्तेश्वर। इस बार के कार्तिक पूर्णिमा मेले श्रद्घालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। तैयारियों में लेटलतीफी की वजह से मेले में बदइंतजामी का बोलबाला हो सकता है। 26 अक्टूबर से शुरू होने वाले इस मेले की तैयारियां अभी तक आधी अधूरी हैं। महज सात दिनों का वक्त बचा है, ऐसे में प्रशासन इतनी जल्दी बड़े इंतजाम कैसे कर सकेगा। इसी में दिवाली भी है। ऐसे में सवाल खड़े होने लगे हैं कि 30 लाख से अधिक भीड़ जुटने वाले मेले की तैयारी कैसे होगी। गंगा के कटान से तटीय क्षेत्र वाली भूमि बेहद सीमित है। किसानों की निजी भूमि में मेला आयोजित होना है। उन भमि पर धान, गन्ना और हरे चारे की फसल लगी है। मेले में आने वाले लाखोें लोगों की भीड़ कहां समाएगी इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
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दिवाली का त्योहार के बाद ही कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेला 26 अक्तूबर को प्रारंभ होना है। मेले में अब 7 दिनों का समय ही शेष बच पाया है। अभी तक संबंधित महकमों की लापरवाही दूर नहीं हो पा रही है। शुगर मिलों का पेराई सत्र प्रारंभ न होने और अभी तक गेहूं की बुआई चालू न होने से इस बार पौराणिक खादर मेले में 30 लाख से भी अधिक श्रद्घालुओं के आगमन का अनुमान लगाया जा रहा है। लोगों की संख्या के हिसाब से तैयारी न के बराबर है। तैयारियों के नाम पर अब तक मात्र इक्का दुक्का स्थानों पर मिट्टी समतल कर अस्थाई सड़क बनाई गई है।
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कैसे बनेगी पुलिस लाइन, खेतों में हैं फसल
मेला क्षेत्र में पुलिस लाइन का स्थान तो तय कर लिया गया है परंतु वहां गन्ने की फसलें लहलहा रही हैं। इससे पुलिस लाइन बनाने का काम पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है। अगर देखा जाए तो पुलिस लाइन बनाने में हो रही देरी आगे चलकर नाक में दम करने वाली दिक्कत साबित हो सकती है क्योंकि मेला प्रारंभ होते ही बाहरी जनपदों की पुलिस का आगमन चालू हो जाएगा। ठहराव में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
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कटान से विशाल रेतीला मैदान सिमटा
बरसात के सीजन में अगस्त माह के दौरान गंगा नदी में बाढ़ आई थी इससे नदी का जलप्रवाह अमरोहा की तरफ से हटकर गढ़ की तरफ आ गया। जानकारों का मानना है कि इस बार गंगा की जलधारा ने गढ़ क्षेत्र की तरफ करीब डेढ़ किलोमीटर लंबा कटान किया है। इससे बालू वाला जंगल गंगा की जलधारा में समा चुका है और जिस स्थान पर मेला लगता है जगह सिमट चुकी है। ऐसी स्थिति में मेला आयोजन से जुड़े जंगल का रकबा बेहद सीमित हो गया है।

मुख्य रास्तों पर अभी तक काम शुरू नहीं
संपर्क मार्ग और मेला क्षेत्र के सेक्टरों को आपस में जोड़ने वाली अस्थाई सड़कों का निर्माण तो दूर बल्कि अभी तक मेले से जुड़े मुख्य मार्गों का निर्माण तक प्रारंभ नहीं हो पाया है।
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