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नेक ब्लास्ट और हॉपर बीमारी से धान की खेती में होने वाली बर्बादी रोकने की कवायद
Updated Mon, 04 Sep 2017 12:25 AM IST
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धान में लगी नेक ब्लास्ट और हॉपर बीमारी
- बीमारी का प्रकोप रोकने को कीटनाशक का स्प्रे जरूरी
- कृषि महकमा किसानों को अभी से कर रहा जागरुक
कुलदीप भारद्वाज
गढ़मुक्तेश्वर। धान की खेती में नेक ब्लास्ट और हॉपर बीमारी लगने से हर साल काफी बर्बादी होती है, जिसकी रोकथाम को कीटनाशक के स्प्रे को जरूरी बता रहा कृषि महकमा किसानों को अभी से जागरुक कर रहा है।
पिकुलेरिया ऑरिंजा फफूंदी से फैलने वाली नेक ब्लास्ट और तीन रंगों में पाया जाने वाला हॉपर कीट धान की फसल में आए साल बड़े स्तर पर तबाही मचाता है। नेक ब्लास्ट बीमारी में बाली के पास काला धब्बा बनने से बाली एक तरफ झुक जाती है और फिर ऊपर का हिस्सा टूटकर गिरने लगता है। इसके अलावा तीन रंगों में पाया जाने वाला हॉपर कीट धान के पौधे के तने में लगकर उसका रस चूंस लेता है, जिससे पौधा सूखकर गिर जाता है। इन दोनों ही बीमारियों की चपेट में आने से धान की फसल में 20 से लेकर 35 फीसदी से भी अधिक नुकसान हो जाता है।
कृषि विभाग के सहायक प्राविधिक सतीश चंद्र शर्मा का कहना है कि दोनों ही बीमारियों की रोकथाम को कीटनाशक का स्प्रे करना बेहद जरूरी होता है, जिसके लिए गांवों में गोष्ठी कर किसानों को जागरुक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आइसोप्रोथलीन, कारप्रोपामिड अथवा ट्राईसाइक्लाजोल में किसी एक कीटनाशक का फसल में स्प्रे करने से नेक ब्लास्ट बीमारी पांव नहीं पसारती है, जबकि हॉपर कीट की रोकथाम को डीनोटेफ्यूरान और इमिडाक्लोप्रिड कीटनाशक का छिड़काव करना चाहिए।
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- बीमारी का प्रकोप रोकने को कीटनाशक का स्प्रे जरूरी
- कृषि महकमा किसानों को अभी से कर रहा जागरुक
कुलदीप भारद्वाज
गढ़मुक्तेश्वर। धान की खेती में नेक ब्लास्ट और हॉपर बीमारी लगने से हर साल काफी बर्बादी होती है, जिसकी रोकथाम को कीटनाशक के स्प्रे को जरूरी बता रहा कृषि महकमा किसानों को अभी से जागरुक कर रहा है।
पिकुलेरिया ऑरिंजा फफूंदी से फैलने वाली नेक ब्लास्ट और तीन रंगों में पाया जाने वाला हॉपर कीट धान की फसल में आए साल बड़े स्तर पर तबाही मचाता है। नेक ब्लास्ट बीमारी में बाली के पास काला धब्बा बनने से बाली एक तरफ झुक जाती है और फिर ऊपर का हिस्सा टूटकर गिरने लगता है। इसके अलावा तीन रंगों में पाया जाने वाला हॉपर कीट धान के पौधे के तने में लगकर उसका रस चूंस लेता है, जिससे पौधा सूखकर गिर जाता है। इन दोनों ही बीमारियों की चपेट में आने से धान की फसल में 20 से लेकर 35 फीसदी से भी अधिक नुकसान हो जाता है।
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कृषि विभाग के सहायक प्राविधिक सतीश चंद्र शर्मा का कहना है कि दोनों ही बीमारियों की रोकथाम को कीटनाशक का स्प्रे करना बेहद जरूरी होता है, जिसके लिए गांवों में गोष्ठी कर किसानों को जागरुक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आइसोप्रोथलीन, कारप्रोपामिड अथवा ट्राईसाइक्लाजोल में किसी एक कीटनाशक का फसल में स्प्रे करने से नेक ब्लास्ट बीमारी पांव नहीं पसारती है, जबकि हॉपर कीट की रोकथाम को डीनोटेफ्यूरान और इमिडाक्लोप्रिड कीटनाशक का छिड़काव करना चाहिए।
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