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गौमुख से कांवड़ लेकर लौटे शिवभक्त की दिल का दौरा पड़ने से जान गई
Updated Fri, 21 Jul 2017 11:38 PM IST
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बिगड़ी तबियत, दो वृद्ध कांवड़ियों ने तोड़ा दम
गौमुख से कांवड़ लेकर लौटे भोले की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई, वहीं ब्रजघाट से कांवड़ ले जा रही विधवा की तबियत बिगड़ने से जान चली गई।
गढ़ के छोटा बाजार मोहल्ले में रहने वाला भोपाल (57) मेहनत मजदूरी से परिवार की गुजर बसर करता था। वह जत्थे के साथ बुधवार रात गौमुख से कांवड़ लेकर लौटा था। मुक्तेश्वरा महादेव (नक्का कुआं) मंदिर में पहुंचनेे पर परिजनों सहित मोहल्ले वालों ने उसका स्वागत किया।
इसके बाद खाना खाकर वह लेट गया। कुछ ही देर बाद सीने में दर्द होने पर उसकी आंख खुल गई। सूचना मिलते ही परिजन और साथी शिवभक्त उसे आनन फानन में निजी चिकित्सक के पास ले गए, वहां इलाज शुरू होने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया। ब्रजघाट गंगा किनारे शुक्रवार दोपहर उसका दाह संस्कार किया गया।
वहीं बहादुरगढ़ क्षेत्र के गांव सदरपुर की विधवा रामश्री (55) शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे अपनी पोती मौनी, रविना, अनुराधा के साथ ब्रजघाट गंगा से कांवड़ भरकर गांव लौट रही थी। गढ़-स्याना रोड पर सालारपुर गांव के पलवाड़ा मोड़ पर अचानक उसकी तबियत बिगड़ गई। पता लगते ही पोतियों ने रामश्री के कंधे से कांवड़ ले ली और उसे पेड़ की छाया में बैठा दिया।
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उसकी हालत में सुधार न होने पर पोती मौनी ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस आनन फानन में वृद्धा को डेहरा कुटी स्थित नर्सिंग होम ले गई। वहां चिकित्सक ने रामश्री को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद रामश्री और उसकी पोतियों की कांवड़ों को वैदिक रीति रिवाज से पेड़ पर टांगने की रस्म अदा की गई।
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गौमुख से कांवड़ लेकर लौटे भोले की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई, वहीं ब्रजघाट से कांवड़ ले जा रही विधवा की तबियत बिगड़ने से जान चली गई।
गढ़ के छोटा बाजार मोहल्ले में रहने वाला भोपाल (57) मेहनत मजदूरी से परिवार की गुजर बसर करता था। वह जत्थे के साथ बुधवार रात गौमुख से कांवड़ लेकर लौटा था। मुक्तेश्वरा महादेव (नक्का कुआं) मंदिर में पहुंचनेे पर परिजनों सहित मोहल्ले वालों ने उसका स्वागत किया।
इसके बाद खाना खाकर वह लेट गया। कुछ ही देर बाद सीने में दर्द होने पर उसकी आंख खुल गई। सूचना मिलते ही परिजन और साथी शिवभक्त उसे आनन फानन में निजी चिकित्सक के पास ले गए, वहां इलाज शुरू होने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया। ब्रजघाट गंगा किनारे शुक्रवार दोपहर उसका दाह संस्कार किया गया।
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वहीं बहादुरगढ़ क्षेत्र के गांव सदरपुर की विधवा रामश्री (55) शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे अपनी पोती मौनी, रविना, अनुराधा के साथ ब्रजघाट गंगा से कांवड़ भरकर गांव लौट रही थी। गढ़-स्याना रोड पर सालारपुर गांव के पलवाड़ा मोड़ पर अचानक उसकी तबियत बिगड़ गई। पता लगते ही पोतियों ने रामश्री के कंधे से कांवड़ ले ली और उसे पेड़ की छाया में बैठा दिया।
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उसकी हालत में सुधार न होने पर पोती मौनी ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस आनन फानन में वृद्धा को डेहरा कुटी स्थित नर्सिंग होम ले गई। वहां चिकित्सक ने रामश्री को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद रामश्री और उसकी पोतियों की कांवड़ों को वैदिक रीति रिवाज से पेड़ पर टांगने की रस्म अदा की गई।