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एसडीएम पीलीभीत की भूमि की डोलबंदी के दौरान हंगामा हुआ
Updated Sun, 16 Dec 2018 12:56 AM IST
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एसडीएम पीलीभीत की भूमि की डोलबंदी के दौरान हुआ हंगामा
गढ़मुक्तेश्वर। एसडीएम पीलीभीत की कृषि भूमि की डोलबंदी कराने पहुंची सर्वे विभाग की टीम और ग्रामीणों के बीच जमकर नोकझोंक हुई। इस दौरान महिलाएं ट्रैक्टर के सामने लेट गई, जिन्हें हटाने पहुंची पुलिस को भी ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा।
गढ़ तहसील में तैनाती के दौरान एसडीएम पुष्पा देवरार के पिता प्रभुदयाल ने 2009 में क्षेत्र के गांव लठीरा के जंगल में 28 बीघा कृषि भूमि खरीदी थी, लेकिन जिस भूमि को खरीदा गया था उस पर कई ग्रामीणों का कब्जा होने से अथक कोशिशों के बाद भी एसडीएम के पिता को कब्जा नहीं मिल पाया। करीब तीन साल पहले प्रभुदयाल ने भूमि को वर्तमान में पीलीभीत जनपद में तैनात अपनी एसडीएम बेटी पुष्पा देवरार के नाम करा दिया था। लेकिन उन्हें भी ग्रामीणों ने भूमि पर कब्जा नहीं लेने दिया, जिस पर एसडीएम ने गढ़ की एसडीएम कोर्ट में राजस्व संहिता की धारा 24 के तहत कई ग्रामीणों को पक्षकार बनाकर भूपसिंह आदि के खिलाफ डोलबंदी का मुकदमा दायर किया था। लंबी सुनवाई के बाद कुछ दिन पहले गढ़ की एसडीएम कोर्ट ने भूमि की डोलबंदी कराने का आदेश जारी किया था, जिसके अनुपालन में शनिवार को एसडीएम पुष्पा देवरार अपनी भूमि की डोलबंदी कराने को सर्वे विभाग की टीम समेत पुलिस को साथ लेकर गांव लठीरा के जंगल में पहुंच गईं। जिसकी भनक लगते ही आनन फानन में सैकड़ों ग्रामीण मौके पर पहुंचकर डोलबंदी का विरोध करने लगे। इस दौरान गुस्साए ग्रामीणों की सर्वे विभाग की टीम से जमकर नोकझोंक हो गई, लेकिन पुलिस की सख्ती के चलते सर्वे टीम ने एसडीएम पुष्पा देवरार की भूमि की डोलबंदी करते हुए चारों दिशाओं में सिमेंट पिलर भी गड़वा दिए।
टीम के लौटने पर ग्रामीणों ने पिलर उखाड़ फेंके।
डोलबंदी के बाद भूमि की चारों दिशाओं में पिलर लगवाने के बाद एसडीएम पुष्पा देवरार और सर्वे टीम समेत जंगल से वापिस लौट आई। जिसका पता लगते ही कुछ ही देर बाद ग्रामीणों की भीड़ फिर से जंगल में पहुंच गई, जिसने डोलबंदी के दौरान लगाए गए पिलर उखाड़ फेंके ।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एसडीएम कोर्ट ने डोलबंदी का एकतरफा आदेश दिया है, इसलिए उन्हें संबंधित कोर्ट में अपील दायर करने का उचित मौका दिया जाना बेहद जरूरी है।
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एसडीएम ज्योति राय का कहना है कि अगर ग्रामीणों को डोलबंदी के आदेश पर कोई आपत्ति है तो इसके खिलाफ वे कमिश्नरी में अपील दायर करने को स्वतंत्र हैं।
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गढ़मुक्तेश्वर। एसडीएम पीलीभीत की कृषि भूमि की डोलबंदी कराने पहुंची सर्वे विभाग की टीम और ग्रामीणों के बीच जमकर नोकझोंक हुई। इस दौरान महिलाएं ट्रैक्टर के सामने लेट गई, जिन्हें हटाने पहुंची पुलिस को भी ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा।
गढ़ तहसील में तैनाती के दौरान एसडीएम पुष्पा देवरार के पिता प्रभुदयाल ने 2009 में क्षेत्र के गांव लठीरा के जंगल में 28 बीघा कृषि भूमि खरीदी थी, लेकिन जिस भूमि को खरीदा गया था उस पर कई ग्रामीणों का कब्जा होने से अथक कोशिशों के बाद भी एसडीएम के पिता को कब्जा नहीं मिल पाया। करीब तीन साल पहले प्रभुदयाल ने भूमि को वर्तमान में पीलीभीत जनपद में तैनात अपनी एसडीएम बेटी पुष्पा देवरार के नाम करा दिया था। लेकिन उन्हें भी ग्रामीणों ने भूमि पर कब्जा नहीं लेने दिया, जिस पर एसडीएम ने गढ़ की एसडीएम कोर्ट में राजस्व संहिता की धारा 24 के तहत कई ग्रामीणों को पक्षकार बनाकर भूपसिंह आदि के खिलाफ डोलबंदी का मुकदमा दायर किया था। लंबी सुनवाई के बाद कुछ दिन पहले गढ़ की एसडीएम कोर्ट ने भूमि की डोलबंदी कराने का आदेश जारी किया था, जिसके अनुपालन में शनिवार को एसडीएम पुष्पा देवरार अपनी भूमि की डोलबंदी कराने को सर्वे विभाग की टीम समेत पुलिस को साथ लेकर गांव लठीरा के जंगल में पहुंच गईं। जिसकी भनक लगते ही आनन फानन में सैकड़ों ग्रामीण मौके पर पहुंचकर डोलबंदी का विरोध करने लगे। इस दौरान गुस्साए ग्रामीणों की सर्वे विभाग की टीम से जमकर नोकझोंक हो गई, लेकिन पुलिस की सख्ती के चलते सर्वे टीम ने एसडीएम पुष्पा देवरार की भूमि की डोलबंदी करते हुए चारों दिशाओं में सिमेंट पिलर भी गड़वा दिए।
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टीम के लौटने पर ग्रामीणों ने पिलर उखाड़ फेंके।
डोलबंदी के बाद भूमि की चारों दिशाओं में पिलर लगवाने के बाद एसडीएम पुष्पा देवरार और सर्वे टीम समेत जंगल से वापिस लौट आई। जिसका पता लगते ही कुछ ही देर बाद ग्रामीणों की भीड़ फिर से जंगल में पहुंच गई, जिसने डोलबंदी के दौरान लगाए गए पिलर उखाड़ फेंके ।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एसडीएम कोर्ट ने डोलबंदी का एकतरफा आदेश दिया है, इसलिए उन्हें संबंधित कोर्ट में अपील दायर करने का उचित मौका दिया जाना बेहद जरूरी है।
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एसडीएम ज्योति राय का कहना है कि अगर ग्रामीणों को डोलबंदी के आदेश पर कोई आपत्ति है तो इसके खिलाफ वे कमिश्नरी में अपील दायर करने को स्वतंत्र हैं।