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गंगा में प्रदूषण से मानवमित्र डॉल्फिन को खतरा-Cordination
Updated Sat, 13 Oct 2018 11:56 PM IST
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गंगा में घट गई मानव मित्र डॉल्फिन की संख्या
गढ़मुक्तेश्वर। गंगा में डॉल्फिन की संख्या कम हुई है। मेरी गंगा मेरी डॉल्फिन अभियान के तहत डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन विभाग की संयुक्त टीम मानव मित्र डॉल्फिन की गिनती कर रही है। गिनती 10 अक्तूबर से शुरू हुई और 15 अक्तूबर तक चलेगी। बिजनौर बैराज से लेकर ब्रजघाट होकर बुलंदशहर के नरौरा तक गंगा नदी में विचरण कर रहीं डॉल्फिन की गिनती की जा रही है।
टीम के सदस्य संजीव यादव और शाहनवाज खान के मुताबिक पहले चरण में बिजनौर से डॉल्फिन की गिनती शुरू हुई। शनिवार को सामाजिक संगठन लोक भारती के प्रांत संयोजक भारत भूषण गर्ग, जिला संयोजक मूलचंद आर्य, वन दारोगा अरुण शर्मा और वन रक्षक गौरव के साथ मिलकर ब्रजघाट से पूठ के बीच गंगा नदी में डॉल्फिन की गिनती की। पहले चरण की गिनती में डॉल्फिन की जो संख्या सामने आई है, उसने फिलहाल विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले साल डॉल्फिन की गिनती हुई थी तो उस दौरान बिजनौर से वाया ब्रजघाट होकर पूठ तक गंगा नदी में मानव मित्र की संख्या 22 थी, लेकिन अब संख्या घटकर 20 रह गई है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के प्रतिनिधि डॉ. संजीव यादव का कहना है कि डॉल्फिन भारत में मुख्य रूप से गंगा और उसकी सहायक नदियों यमुना, केन, बेतवा, चंबल, घाघरा और गेरुआ नदी में पाई जाती है। जिसके लिए इस आधुनिक मशीनी युग में तेजी से फैल रहा प्रदूषण सर्वाधिक घातक साबित हो रहा है। शाहनवाज खान ने बताया कि गंगा समेत उसकी सहायक नदियों में डॉल्फिन की गणना का अभियान 15 अक्तूबर तक चलेगा, जिसमें कई टीम 3350 किलोमीटर से जुड़ी परिधि में डॉल्फिन की गिनती कर रही हैं। डॉ. संजीव यादव का कहना है इस विषय में प्रदेश शासन को रिपोर्ट सौंपकर डॉल्फिन संरक्षण के प्रति महत्वपूर्ण सुझाव देने के साथ ही गंगा में गिर रहे प्रदूषण की रोकथाम को भी कड़े कदम उठाने की मांग की जाएगी। पर्यावरणविद् प्रो. अब्बास अली का कहना है डॉल्फिन का घटना प्रदूषण के कारण है। हालांकि अभी गणना का काम जारी है। पूरी तरह स्थिति 15 अक्तूबर तक साफ होगी।
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गढ़मुक्तेश्वर। गंगा में डॉल्फिन की संख्या कम हुई है। मेरी गंगा मेरी डॉल्फिन अभियान के तहत डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन विभाग की संयुक्त टीम मानव मित्र डॉल्फिन की गिनती कर रही है। गिनती 10 अक्तूबर से शुरू हुई और 15 अक्तूबर तक चलेगी। बिजनौर बैराज से लेकर ब्रजघाट होकर बुलंदशहर के नरौरा तक गंगा नदी में विचरण कर रहीं डॉल्फिन की गिनती की जा रही है।
टीम के सदस्य संजीव यादव और शाहनवाज खान के मुताबिक पहले चरण में बिजनौर से डॉल्फिन की गिनती शुरू हुई। शनिवार को सामाजिक संगठन लोक भारती के प्रांत संयोजक भारत भूषण गर्ग, जिला संयोजक मूलचंद आर्य, वन दारोगा अरुण शर्मा और वन रक्षक गौरव के साथ मिलकर ब्रजघाट से पूठ के बीच गंगा नदी में डॉल्फिन की गिनती की। पहले चरण की गिनती में डॉल्फिन की जो संख्या सामने आई है, उसने फिलहाल विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले साल डॉल्फिन की गिनती हुई थी तो उस दौरान बिजनौर से वाया ब्रजघाट होकर पूठ तक गंगा नदी में मानव मित्र की संख्या 22 थी, लेकिन अब संख्या घटकर 20 रह गई है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के प्रतिनिधि डॉ. संजीव यादव का कहना है कि डॉल्फिन भारत में मुख्य रूप से गंगा और उसकी सहायक नदियों यमुना, केन, बेतवा, चंबल, घाघरा और गेरुआ नदी में पाई जाती है। जिसके लिए इस आधुनिक मशीनी युग में तेजी से फैल रहा प्रदूषण सर्वाधिक घातक साबित हो रहा है। शाहनवाज खान ने बताया कि गंगा समेत उसकी सहायक नदियों में डॉल्फिन की गणना का अभियान 15 अक्तूबर तक चलेगा, जिसमें कई टीम 3350 किलोमीटर से जुड़ी परिधि में डॉल्फिन की गिनती कर रही हैं। डॉ. संजीव यादव का कहना है इस विषय में प्रदेश शासन को रिपोर्ट सौंपकर डॉल्फिन संरक्षण के प्रति महत्वपूर्ण सुझाव देने के साथ ही गंगा में गिर रहे प्रदूषण की रोकथाम को भी कड़े कदम उठाने की मांग की जाएगी। पर्यावरणविद् प्रो. अब्बास अली का कहना है डॉल्फिन का घटना प्रदूषण के कारण है। हालांकि अभी गणना का काम जारी है। पूरी तरह स्थिति 15 अक्तूबर तक साफ होगी।
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