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बैंक लोन की अदायगी न होने पर राइस मिल सील हुई
Updated Sun, 20 May 2018 12:05 AM IST
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बैंक लोन की अदायगी न होने पर राइस मिल सील
गढ़मुक्तेश्वर। नौ सौ करोड़ की बैंक लोन और अन्य कंपनियों की बकाएदारी चुकता न करने पर दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश पर रेडिकल राइस मिल सील कर दी है। जल्द ही इसकी नीलामी भी कर दी जाएगी। ऑफिशियल लिक्वीडेटर की देखरेख में संपत्तियों की नीलामी कर उससे आने वाली रकम बकाएदारी में दी जानी है। हालांकि यह मिल करीब एक साल से बंद है।
गढ़ क्षेत्र के गांव बागड़पुर के जंगल में सैकड़ों करोड़ की लागत वाली रेडिकल राइस मिल की बहुत जल्द नीलामी होनी है। बैंक लोन और कई कंपनियों की बकाएदारी न चुकाने पर दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से 23 मार्च को ऑफिशियल लिक्वीडेटर नियुक्त किए थे। इस पर कार्रवाई करने के लिए शनिवार को एक टीम आई, लेकिन मिल का दरावाज न खुलने पर टीम गढ़ के थाना दिवस में पहुंच गई। वहां पुलिस अफसरों को सूचना देने के बाद टीम दोबारा बागड़पुर पहुंच दीवार फांदकर अंदर घुस गई। उसने ताले तोड़कर मिल में सील लगा दी। इस दौरान एसटीए मुकेश कुमार, इंद्रेश चौहान, एलए मंजीत, पीएस त्रिभुवन, एसबीआई एजीएम संजय राय मौजूद रहे। हालांकि मिल मालिक सिद्धार्थ चौधरी ने विरोध भी जताया, लेकिन कार्रवाई में कोई भी बाधा खड़ी नहीं कर पाए।
जानकारी के अनुसार कई बैंकों के साथ ही होर्डिंग्स बनाने का काम करने वाली नोएडा की यूफ्लेक्स समेत 14 कंपनियों ने पिछले दिनों दिल्ली हाईकोर्ट में रिट दायर की थी। इसकी सुनवाई के दौरान मिल मालिक ने संबंधित कंपनियों समेत बैंकों की रकम अदा करने में असमर्थता जताकर मिल समेत उससे जुड़ीं परिसंपत्तियों की नीलामी कर रकम कर्जदारों को अदा करने की सहमति जताई थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 मार्च को दिए गए आदेश में राइस मिल समेत उससे जुड़ीं संपत्तियों की नीलामी कराने को अपने सीनियर टेक्निकल असिस्टेंट सत्यपाल सिंह को ऑफिशियल लिक्वीडेटर नियुक्त किया था। उन्होंने मिल समेत उससे जुड़ीं संपत्तियों को अपने कब्जे में करने के बाद मिल को सील करने की कार्रवाई की है, जिससे बहुत जल्द राइस मिल की संपत्तियों की नीलामी भी होनी है।
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900 करोड़ की बकाएदारी
राइस मिल पर विभिन्न कंपनियों समेत एसबीआई, स्टेट बैंक पटियाला, बीकानेर-जयपुर, हैदराबाद, ट्रवनकोर, मैसूूर, ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, इंडियन ओवरसीज बैंक, दा कैथोलिक श्रायन बैंक लिमिटेड, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, आईडीबीआई, विजया बैंक, यूको बैंक का करीब नौ करोड़ का कर्ज बकाया है।
तहसीलदार मनोज कुमार सिंह ने बताया कि राइस मिल से जुड़ी सैकड़ों करोड़ की बकाएदारी में वाणिज्य कर विभाग की 46 करोड़ की रिकवरी गढ़ तहसील के संग्रह विभाग में भी आई थी, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट से ऑफिशियल लिक्वीडेटर की नियुक्ति होने पर वसूली स्थगित कर दी गई थी।
किसानों समेत मजदूरों को झटका
कई हेक्टेयर भूमि में बनी रेडिकल राइस मिल में अत्याधुनिक तकनीक वाली मशीनों का इस्तेमाल होता है, जो चावल का साइज पतला करने के साथ ही उस पर पॉलिश कर उसे खाड़ी और यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका समेत दर्जनों देशों को निर्यात करती है। मिल में आए साल लाखों क्विंटल धान से चावल तैयार होता है, लेकिन मिल बंद हो गई तो इसका खमियाजा आसपास के जनपद और क्षेत्र ही नहीं बल्कि उत्तराखंड, हरियाणा, वेस्टर्न यूपी के किसानों समेत मिल में काम कर परिवारों को भी भुगतना पड़ेगा। क्योंकि धान की डिमांड घटने पर रेट में गिरावट होने से अप्रत्यक्ष तौर पर किसानों को ही चपत लगेगी, जबकि मजदूरों के हाथ से कामकाज छिन जाएगा।
दरवाजा न खोलने पर दीवार फांदकर टीम अंदर घुसी, ताला तोड़कर कार्रवाई की
बैंकों समेत 14 कंपनियों की करीब 900 करोड़ की है बकाएदारी
दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए 23 मार्च को कार्रवाई करने का दिया था निर्देश
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गढ़मुक्तेश्वर। नौ सौ करोड़ की बैंक लोन और अन्य कंपनियों की बकाएदारी चुकता न करने पर दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश पर रेडिकल राइस मिल सील कर दी है। जल्द ही इसकी नीलामी भी कर दी जाएगी। ऑफिशियल लिक्वीडेटर की देखरेख में संपत्तियों की नीलामी कर उससे आने वाली रकम बकाएदारी में दी जानी है। हालांकि यह मिल करीब एक साल से बंद है।
गढ़ क्षेत्र के गांव बागड़पुर के जंगल में सैकड़ों करोड़ की लागत वाली रेडिकल राइस मिल की बहुत जल्द नीलामी होनी है। बैंक लोन और कई कंपनियों की बकाएदारी न चुकाने पर दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से 23 मार्च को ऑफिशियल लिक्वीडेटर नियुक्त किए थे। इस पर कार्रवाई करने के लिए शनिवार को एक टीम आई, लेकिन मिल का दरावाज न खुलने पर टीम गढ़ के थाना दिवस में पहुंच गई। वहां पुलिस अफसरों को सूचना देने के बाद टीम दोबारा बागड़पुर पहुंच दीवार फांदकर अंदर घुस गई। उसने ताले तोड़कर मिल में सील लगा दी। इस दौरान एसटीए मुकेश कुमार, इंद्रेश चौहान, एलए मंजीत, पीएस त्रिभुवन, एसबीआई एजीएम संजय राय मौजूद रहे। हालांकि मिल मालिक सिद्धार्थ चौधरी ने विरोध भी जताया, लेकिन कार्रवाई में कोई भी बाधा खड़ी नहीं कर पाए।
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जानकारी के अनुसार कई बैंकों के साथ ही होर्डिंग्स बनाने का काम करने वाली नोएडा की यूफ्लेक्स समेत 14 कंपनियों ने पिछले दिनों दिल्ली हाईकोर्ट में रिट दायर की थी। इसकी सुनवाई के दौरान मिल मालिक ने संबंधित कंपनियों समेत बैंकों की रकम अदा करने में असमर्थता जताकर मिल समेत उससे जुड़ीं परिसंपत्तियों की नीलामी कर रकम कर्जदारों को अदा करने की सहमति जताई थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 मार्च को दिए गए आदेश में राइस मिल समेत उससे जुड़ीं संपत्तियों की नीलामी कराने को अपने सीनियर टेक्निकल असिस्टेंट सत्यपाल सिंह को ऑफिशियल लिक्वीडेटर नियुक्त किया था। उन्होंने मिल समेत उससे जुड़ीं संपत्तियों को अपने कब्जे में करने के बाद मिल को सील करने की कार्रवाई की है, जिससे बहुत जल्द राइस मिल की संपत्तियों की नीलामी भी होनी है।
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900 करोड़ की बकाएदारी
राइस मिल पर विभिन्न कंपनियों समेत एसबीआई, स्टेट बैंक पटियाला, बीकानेर-जयपुर, हैदराबाद, ट्रवनकोर, मैसूूर, ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, इंडियन ओवरसीज बैंक, दा कैथोलिक श्रायन बैंक लिमिटेड, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, आईडीबीआई, विजया बैंक, यूको बैंक का करीब नौ करोड़ का कर्ज बकाया है।
तहसीलदार मनोज कुमार सिंह ने बताया कि राइस मिल से जुड़ी सैकड़ों करोड़ की बकाएदारी में वाणिज्य कर विभाग की 46 करोड़ की रिकवरी गढ़ तहसील के संग्रह विभाग में भी आई थी, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट से ऑफिशियल लिक्वीडेटर की नियुक्ति होने पर वसूली स्थगित कर दी गई थी।
किसानों समेत मजदूरों को झटका
कई हेक्टेयर भूमि में बनी रेडिकल राइस मिल में अत्याधुनिक तकनीक वाली मशीनों का इस्तेमाल होता है, जो चावल का साइज पतला करने के साथ ही उस पर पॉलिश कर उसे खाड़ी और यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका समेत दर्जनों देशों को निर्यात करती है। मिल में आए साल लाखों क्विंटल धान से चावल तैयार होता है, लेकिन मिल बंद हो गई तो इसका खमियाजा आसपास के जनपद और क्षेत्र ही नहीं बल्कि उत्तराखंड, हरियाणा, वेस्टर्न यूपी के किसानों समेत मिल में काम कर परिवारों को भी भुगतना पड़ेगा। क्योंकि धान की डिमांड घटने पर रेट में गिरावट होने से अप्रत्यक्ष तौर पर किसानों को ही चपत लगेगी, जबकि मजदूरों के हाथ से कामकाज छिन जाएगा।
दरवाजा न खोलने पर दीवार फांदकर टीम अंदर घुसी, ताला तोड़कर कार्रवाई की
बैंकों समेत 14 कंपनियों की करीब 900 करोड़ की है बकाएदारी
दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए 23 मार्च को कार्रवाई करने का दिया था निर्देश