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सीएम के आदेश पर भी नहीं मिला 254 करोड़ के गन्ने का भुगतान
Updated Fri, 30 Nov 2018 11:08 PM IST
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सीएम के आदेश पर भी नहीं मिला 254 करोड़ के गन्ने का भुगतान
- 30 नवंबर भी बीती, गन्ना किसान मायूस
- अब तक सिर्फ पिछले 15 मार्च तक का मिला भुगतान
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़/गढ़/धौलाना। गंगा कार्तिक मेले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 30 नवंबर तक किसानों को गन्ना भुगतान किए जाने का जो आदेश दिया था, उसकी आठ दिन में ही हवा निकल गई है। वजह, जिले की दोनों मिलों पर किसानों का पिछले सीजन का अब भी 254 करोड़ रुपये बकाया है। गन्ना विभाग के अधिकारी शुगर मिलों के अफसरों की मनमर्जी के सामने बेबस नजर आ रहे हैं। इससे किसानों में जबरदस्त गुस्सा है।
जिले में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती की जाती है। यहां के अधिकांश किसान गन्ना भुगतान पर ही निर्भर हैं। शासन-प्रशासन भी यह बात जानता है, लेकिन शुगर लॉबी की मनमर्जी के सामने दोनों ही बेबस हो गए हैं। आलम यह है कि जिले के किसानों को अब तक सिर्फ 15 मार्च 2018 तक का ही गन्ना भुगतान मिल सका है। सिंभावली चीनी मिल पर 171 करोड़ रुपये और ब्रजनाथपुर चीनी मिल पर 83 करोड़ रुपये बकाया गन्ना मूल्य बाकी है।
जबकि किसानों ने 10 मई तक मिलों पर गन्ना डाला था। ऐसे में अब भी किसानों को बीते वर्ष का करीब दो महीने का करोड़ों रुपये भुगतान शुगर मिलों पर अटका है। मुख्य बात यह है कि गंगा कार्तिक मेले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 30 नवंबर तक सभी किसानों का गन्ना भुगतान कराने का दावा कर किसानों की खूब वाहवाही लूटी थी। अब 30 नवंबर बीत चुका है, लेकिन किसानों के खातों में गन्ना भुगतान का कोई नया पैसा नहीं आया है। जिले के किसानों के खातों में अभी तक 15 मार्च 2018 तक का भुगतान किया जा सका है, जबकि दो महीने का भुगतान बीते वर्ष का अटका है। साथ ही नए पेराई सत्र का गन्ना भुगतान भी नहीं हुआ है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले की शुगर लॉबी किस कदर अपनी मनमर्जी कर रही है, जो सीएम के आदेशों को भी ताक पर रख, किसानों का गन्ना भुगतान नहीं कर रही है। आश्चर्य की बात यह है कि गन्ना विभाग के अफसर भी मूक दर्शक बने बैठे हैं।
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शुगर मिलों ने पल्ला झाड़ा
सीएम की घोषणा के बाद भी जिले की दोनों शुगर मिल सिंभावली और ब्रजनाथपुर के प्रबंधन ने महज खानापूर्ति करते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया है। दो दिनों के भीतर सिंभावली मिल ने 21 मार्च तक खरीदे गए गन्ने का 6 करोड़ और ब्रजनाथपुर मिल ने डेढ़ करोड़ का ही पेमेंट किया है।
मिल प्रबंधन के खिलाफ होगी कार्रवाई
सिंभावली गन्ना समिति सचिव राजीव सेठ और हापुड़ समिति सचिव मनोज कुमार का कहना है कि तीस नवंबर तक बकाया पेमेंट चुकता न होना शुगर मिल प्रबंधन की बड़ी चूक है। इसको लेकर जिला मुख्यालय पर डीएम की अध्यक्षता में मीटिंग हो रही है। इसमें होने वाले निर्णय के आधार पर शुगर मिल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के साथ ही जल्द से जल्द बकाया पेमेंट की अदायगी कराई जाएगी।
बोले किसान-अब तो टूट गई आस
किसान जतिन चौधरी का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दावों के बाद उन्हें उम्मीद जगी थी कि गन्ना भुगतान मिल जाएगा, लेकिन कोई पैसा खातों में अब तक नहीं आया है।
किसान राजपाल सिंह का कहना है कि शासन, प्रशासन किसानों की अनदेखी कर रहे हैं। इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा। नए पेराई सत्र का तो दूर बीते वर्ष का भी भुगतान नहीं किया जा रहा है।
भाकियू के जिलाध्यक्ष धनवीर शास्त्री का कहना है कि शासन, प्रशासन की ढील के चलते ही शुगर लॉबी हावी हो रही है। किसानों की समस्या पर जल्द आंदोलन चलाया जाएगा। शुगर मिलों ने सीएम के आदेशों की धज्जियां उड़ा दी हैं।
गढ़ के किसान प्रदीप चौधरी का कहना है कि शुगर मिल प्रबंधन ने इस बार सीएम के दावे को भी हवाई साबित कर दिया है। अब जिला प्रशासन और गन्ना विभाग की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह किसानों को गन्ना नियमावली के तहत ब्याज समेत बकाया पेमेंट करवाएं।
गांव बक्सर के किसान आरिफ प्रधान का कहना है कि एक साल बाद भी किसान अपने ही गन्ने का पेमेंट मिलने से वंचित चल रहे हैं, इससे बच्चों के ब्याह शादी और खेतीबाड़ी जैसे कामों के लिए ब्याज पर रुपये लेने पड़ रहे हैं।
गन्ना किसानों का आंदोलन जरूरी
हापुड़। राष्ट्रीय किसान संगठन के सचिव प्रगतिशील किसान चौधरी मलूक सिंह (रसूलपुर) ने दिल्ली के रामलीला मैदान में किसानों के धरने में शामिल होकर लौटने पर कहा कि गन्ने के भुगतान के लिए अब यहां के किसानों को भी दिल्ली में किसानों के धरने से सबक लेकर आंदोलन करना होगा।
मिल कर रही जल्द भुगतान का प्रयास
सिंभावली चीनी मिल के एजीएम दिनेश शर्मा का कहना है कि सिंभावली चीनी मिल समूह जल्द से जल्द किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान करने का प्रयास कर रहा है। फिलहाल जितनी भी चीनी बिक रही है, उससे मिली धनराशि का किसानों को भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार की शाम मिल के सीजेएम डॉ. कर्ण सिंह अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) एवं डीसीओ ओमप्रकाश सिंह के साथ गन्ना भुगतान को लेकर वार्ता करने गए हैं। देर शाम तक चली इस बैठक के बाद डीसीओ ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि दोनों चीनी मिलों पर भुगतान करने के लिए हर संभव दबाव बनाया गया है। अब आगे क्या कार्रवाई की जाए, इसके लिए गन्ना आयुक्त और उपायुक्त से निर्देश प्राप्त किए जायेंगे। फिलहाल भुगतान में कोई प्रगति नहीं हुई है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने गढ़ गंगा मेला में 4 हजार करोड़ रुपये के भुगतान की जो घोषणा की थी, वह पिछले सीजन में खरीदे गए गन्ने पर 4.50 रुपये प्रति क्विंटल के अनुदान का किसानों को 30 नवंबर तक भुगतान करने को लेकर घोषणा थी। हापुड़ जिले के गन्ना किसानों को करीब 4 करोड़ रुपये का अनुदान मिला है।
कोट
गन्ना भुगतान के संबंध में मिल अफसरों की बैठक ली जा रही है। जल्द भुगतान न करने पर कार्रवाई भी की जाएगी। बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी अदिति सिंह ने गन्ना भुगतान को लेकर बैठक में कड़े निर्देश दिए थे। - ओपी सिंह, डीसीओ
धौलाना में खरीदा जाएगा कुल 16 लाख क्विंटल गन्ना
धौलाना। इस वर्ष पेराई सत्र में धौलाना गन्ना समिति से 16,00596 लाख क्विंटल गन्ना खरीद का लक्ष्य निर्धारित कर 92017 हजार पर्चियां 4570 बांड धारकों के लिए तय की गई हैं। सहकारी गन्ना विकास समिति सचिव जयप्रकाश यादव ने बताया कि अब तक 7,668 पर्चियां ही किसानों तक पहुंच सकी हैं, जिसके चलते 27 दिन में मात्र 1,38024 लाख क्विंटल गन्ना ही खरीदा जा सका है। सत्र समाप्ति तक क्विंटल गन्ना खरीद कर निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जा सकेगा। सहकारी गन्ना विकास समिति सचिव जयप्रकाश यादव के मुताबिक धौलाना समिति के अंतर्गत 12 क्त्रस्य केंद्र संचालित हैं। देहपा -1, कंदौला-2 ए, बी , धौलाना-3 ए, बी, सी, समाना -1 ए, बी, जारचा-1ए, बी, कलौंदा -1,भावा-1, फगौता-1 गन्ना क्त्रस्य केन्द्र संचालित हैं। जबकि पारपा पर नया केंद्र खोला जाना प्रस्तावित है। ब्यूरो
गन्ना पर्ची न मिलने पर भड़के किसान
- मिल प्रबंधन की मनमानी व गन्ना पर्ची के बदले सिस्टम से किसान नाराज
- व्यवस्था में सुधार न होने पर किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो।
धौलाना। सहकारी गन्ना विकास समिति व ब्रजनाथपुर शुगर मिल के अधिकारियों की मनमानी और गन्ना पर्ची को लेकर बदले सिस्टम से किसान परेशान हैं। इसके विरोध में किसानों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
किसान नेता अंनग पाल सिंह मुुकद्दम ने बताया कि इस बार निर्धारित समय से एक माह लेट चली ब्रजनाथपुर शुगर मिल इंडेंट नहीं भेज रहा। राष्ट्रवादी पार्टी के पश्चिमी यूपी प्रभारी ब्रहम सिंह ने कहा कि इस बार शासन की ओर से गन्ना पर्ची आदि के सिस्टम में बदलाव किया गया है। पर्ची आवंटन की जिम्मेदारी सोसायटी को दी गई है। लाख दावे के बाद भी सोसायटी अब तक किसानों का ब्योरा कंप्यूटर में फीड नहीं कर पाई। साथ ही किसानों को बेसिक कोटे के आधार पर जारी किए गए कैलेंडर में पूरी पर्ची दर्ज नहीं की गई है। समिति सचिव किसानों को संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे। वहीं किसानों ने चेतावनी दी है कि जब तक किसानों की समस्याएं दूर नहीं हो तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
एसडीएम के आश्वासन पर माने किसान
धौलाना। किसानों को गन्ना पर्ची न मिलने से नाराज किसानों ने एसडीएम कार्यालय पहुंच कर गन्ना पर्ची व्यवस्था सुचारु करने की मांग की। किसान नेता विनोद सिसौदिया ने आरोप लगाया कि सहकारी गन्ना समिति व गन्ना विकास परिषद द्वारा किसानों का शोषण किया जा रहा है। सैकड़ों किसान रोजाना दोनों कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। एसडीएम हनुमान प्रसाद मौर्य ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सोसायटी के अधिकारियों को भी समय-समय पर निर्देश दिए जा रहे हैं कि वह किसानों की समस्याओं का जल्द से जल्द निदान करें। किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। सभी समस्याओं का जल्द निस्तारण कर दिया जाएगा।
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- 30 नवंबर भी बीती, गन्ना किसान मायूस
- अब तक सिर्फ पिछले 15 मार्च तक का मिला भुगतान
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़/गढ़/धौलाना। गंगा कार्तिक मेले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 30 नवंबर तक किसानों को गन्ना भुगतान किए जाने का जो आदेश दिया था, उसकी आठ दिन में ही हवा निकल गई है। वजह, जिले की दोनों मिलों पर किसानों का पिछले सीजन का अब भी 254 करोड़ रुपये बकाया है। गन्ना विभाग के अधिकारी शुगर मिलों के अफसरों की मनमर्जी के सामने बेबस नजर आ रहे हैं। इससे किसानों में जबरदस्त गुस्सा है।
जिले में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती की जाती है। यहां के अधिकांश किसान गन्ना भुगतान पर ही निर्भर हैं। शासन-प्रशासन भी यह बात जानता है, लेकिन शुगर लॉबी की मनमर्जी के सामने दोनों ही बेबस हो गए हैं। आलम यह है कि जिले के किसानों को अब तक सिर्फ 15 मार्च 2018 तक का ही गन्ना भुगतान मिल सका है। सिंभावली चीनी मिल पर 171 करोड़ रुपये और ब्रजनाथपुर चीनी मिल पर 83 करोड़ रुपये बकाया गन्ना मूल्य बाकी है।
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जबकि किसानों ने 10 मई तक मिलों पर गन्ना डाला था। ऐसे में अब भी किसानों को बीते वर्ष का करीब दो महीने का करोड़ों रुपये भुगतान शुगर मिलों पर अटका है। मुख्य बात यह है कि गंगा कार्तिक मेले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 30 नवंबर तक सभी किसानों का गन्ना भुगतान कराने का दावा कर किसानों की खूब वाहवाही लूटी थी। अब 30 नवंबर बीत चुका है, लेकिन किसानों के खातों में गन्ना भुगतान का कोई नया पैसा नहीं आया है। जिले के किसानों के खातों में अभी तक 15 मार्च 2018 तक का भुगतान किया जा सका है, जबकि दो महीने का भुगतान बीते वर्ष का अटका है। साथ ही नए पेराई सत्र का गन्ना भुगतान भी नहीं हुआ है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले की शुगर लॉबी किस कदर अपनी मनमर्जी कर रही है, जो सीएम के आदेशों को भी ताक पर रख, किसानों का गन्ना भुगतान नहीं कर रही है। आश्चर्य की बात यह है कि गन्ना विभाग के अफसर भी मूक दर्शक बने बैठे हैं।
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सीएम की घोषणा के बाद भी जिले की दोनों शुगर मिल सिंभावली और ब्रजनाथपुर के प्रबंधन ने महज खानापूर्ति करते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया है। दो दिनों के भीतर सिंभावली मिल ने 21 मार्च तक खरीदे गए गन्ने का 6 करोड़ और ब्रजनाथपुर मिल ने डेढ़ करोड़ का ही पेमेंट किया है।
मिल प्रबंधन के खिलाफ होगी कार्रवाई
सिंभावली गन्ना समिति सचिव राजीव सेठ और हापुड़ समिति सचिव मनोज कुमार का कहना है कि तीस नवंबर तक बकाया पेमेंट चुकता न होना शुगर मिल प्रबंधन की बड़ी चूक है। इसको लेकर जिला मुख्यालय पर डीएम की अध्यक्षता में मीटिंग हो रही है। इसमें होने वाले निर्णय के आधार पर शुगर मिल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के साथ ही जल्द से जल्द बकाया पेमेंट की अदायगी कराई जाएगी।
बोले किसान-अब तो टूट गई आस
किसान जतिन चौधरी का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दावों के बाद उन्हें उम्मीद जगी थी कि गन्ना भुगतान मिल जाएगा, लेकिन कोई पैसा खातों में अब तक नहीं आया है।
किसान राजपाल सिंह का कहना है कि शासन, प्रशासन किसानों की अनदेखी कर रहे हैं। इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा। नए पेराई सत्र का तो दूर बीते वर्ष का भी भुगतान नहीं किया जा रहा है।
भाकियू के जिलाध्यक्ष धनवीर शास्त्री का कहना है कि शासन, प्रशासन की ढील के चलते ही शुगर लॉबी हावी हो रही है। किसानों की समस्या पर जल्द आंदोलन चलाया जाएगा। शुगर मिलों ने सीएम के आदेशों की धज्जियां उड़ा दी हैं।
गढ़ के किसान प्रदीप चौधरी का कहना है कि शुगर मिल प्रबंधन ने इस बार सीएम के दावे को भी हवाई साबित कर दिया है। अब जिला प्रशासन और गन्ना विभाग की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह किसानों को गन्ना नियमावली के तहत ब्याज समेत बकाया पेमेंट करवाएं।
गांव बक्सर के किसान आरिफ प्रधान का कहना है कि एक साल बाद भी किसान अपने ही गन्ने का पेमेंट मिलने से वंचित चल रहे हैं, इससे बच्चों के ब्याह शादी और खेतीबाड़ी जैसे कामों के लिए ब्याज पर रुपये लेने पड़ रहे हैं।
गन्ना किसानों का आंदोलन जरूरी
हापुड़। राष्ट्रीय किसान संगठन के सचिव प्रगतिशील किसान चौधरी मलूक सिंह (रसूलपुर) ने दिल्ली के रामलीला मैदान में किसानों के धरने में शामिल होकर लौटने पर कहा कि गन्ने के भुगतान के लिए अब यहां के किसानों को भी दिल्ली में किसानों के धरने से सबक लेकर आंदोलन करना होगा।
मिल कर रही जल्द भुगतान का प्रयास
सिंभावली चीनी मिल के एजीएम दिनेश शर्मा का कहना है कि सिंभावली चीनी मिल समूह जल्द से जल्द किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान करने का प्रयास कर रहा है। फिलहाल जितनी भी चीनी बिक रही है, उससे मिली धनराशि का किसानों को भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार की शाम मिल के सीजेएम डॉ. कर्ण सिंह अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) एवं डीसीओ ओमप्रकाश सिंह के साथ गन्ना भुगतान को लेकर वार्ता करने गए हैं। देर शाम तक चली इस बैठक के बाद डीसीओ ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि दोनों चीनी मिलों पर भुगतान करने के लिए हर संभव दबाव बनाया गया है। अब आगे क्या कार्रवाई की जाए, इसके लिए गन्ना आयुक्त और उपायुक्त से निर्देश प्राप्त किए जायेंगे। फिलहाल भुगतान में कोई प्रगति नहीं हुई है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने गढ़ गंगा मेला में 4 हजार करोड़ रुपये के भुगतान की जो घोषणा की थी, वह पिछले सीजन में खरीदे गए गन्ने पर 4.50 रुपये प्रति क्विंटल के अनुदान का किसानों को 30 नवंबर तक भुगतान करने को लेकर घोषणा थी। हापुड़ जिले के गन्ना किसानों को करीब 4 करोड़ रुपये का अनुदान मिला है।
कोट
गन्ना भुगतान के संबंध में मिल अफसरों की बैठक ली जा रही है। जल्द भुगतान न करने पर कार्रवाई भी की जाएगी। बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी अदिति सिंह ने गन्ना भुगतान को लेकर बैठक में कड़े निर्देश दिए थे। - ओपी सिंह, डीसीओ
धौलाना में खरीदा जाएगा कुल 16 लाख क्विंटल गन्ना
धौलाना। इस वर्ष पेराई सत्र में धौलाना गन्ना समिति से 16,00596 लाख क्विंटल गन्ना खरीद का लक्ष्य निर्धारित कर 92017 हजार पर्चियां 4570 बांड धारकों के लिए तय की गई हैं। सहकारी गन्ना विकास समिति सचिव जयप्रकाश यादव ने बताया कि अब तक 7,668 पर्चियां ही किसानों तक पहुंच सकी हैं, जिसके चलते 27 दिन में मात्र 1,38024 लाख क्विंटल गन्ना ही खरीदा जा सका है। सत्र समाप्ति तक क्विंटल गन्ना खरीद कर निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जा सकेगा। सहकारी गन्ना विकास समिति सचिव जयप्रकाश यादव के मुताबिक धौलाना समिति के अंतर्गत 12 क्त्रस्य केंद्र संचालित हैं। देहपा -1, कंदौला-2 ए, बी , धौलाना-3 ए, बी, सी, समाना -1 ए, बी, जारचा-1ए, बी, कलौंदा -1,भावा-1, फगौता-1 गन्ना क्त्रस्य केन्द्र संचालित हैं। जबकि पारपा पर नया केंद्र खोला जाना प्रस्तावित है। ब्यूरो
गन्ना पर्ची न मिलने पर भड़के किसान
- मिल प्रबंधन की मनमानी व गन्ना पर्ची के बदले सिस्टम से किसान नाराज
- व्यवस्था में सुधार न होने पर किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो।
धौलाना। सहकारी गन्ना विकास समिति व ब्रजनाथपुर शुगर मिल के अधिकारियों की मनमानी और गन्ना पर्ची को लेकर बदले सिस्टम से किसान परेशान हैं। इसके विरोध में किसानों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
किसान नेता अंनग पाल सिंह मुुकद्दम ने बताया कि इस बार निर्धारित समय से एक माह लेट चली ब्रजनाथपुर शुगर मिल इंडेंट नहीं भेज रहा। राष्ट्रवादी पार्टी के पश्चिमी यूपी प्रभारी ब्रहम सिंह ने कहा कि इस बार शासन की ओर से गन्ना पर्ची आदि के सिस्टम में बदलाव किया गया है। पर्ची आवंटन की जिम्मेदारी सोसायटी को दी गई है। लाख दावे के बाद भी सोसायटी अब तक किसानों का ब्योरा कंप्यूटर में फीड नहीं कर पाई। साथ ही किसानों को बेसिक कोटे के आधार पर जारी किए गए कैलेंडर में पूरी पर्ची दर्ज नहीं की गई है। समिति सचिव किसानों को संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे। वहीं किसानों ने चेतावनी दी है कि जब तक किसानों की समस्याएं दूर नहीं हो तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
एसडीएम के आश्वासन पर माने किसान
धौलाना। किसानों को गन्ना पर्ची न मिलने से नाराज किसानों ने एसडीएम कार्यालय पहुंच कर गन्ना पर्ची व्यवस्था सुचारु करने की मांग की। किसान नेता विनोद सिसौदिया ने आरोप लगाया कि सहकारी गन्ना समिति व गन्ना विकास परिषद द्वारा किसानों का शोषण किया जा रहा है। सैकड़ों किसान रोजाना दोनों कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। एसडीएम हनुमान प्रसाद मौर्य ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सोसायटी के अधिकारियों को भी समय-समय पर निर्देश दिए जा रहे हैं कि वह किसानों की समस्याओं का जल्द से जल्द निदान करें। किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। सभी समस्याओं का जल्द निस्तारण कर दिया जाएगा।