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कई और प्लाजा की पार्किंग में मार्केट बनाकर बेचे गए!
Updated Tue, 01 Aug 2017 11:59 PM IST
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फोटो -01 एचपीआर पीएच-05
कई और प्लाजा की पार्किंग में मार्केट बनाकर बेचे गए!
- नक्शा की अनदेखी करने वाले अफसर नपेंगे
- हाईकोर्ट के आदेश के बाद अफसर गंभीर, व्यापारी परेशान
अनिल त्यागी
हापुड़। मानकों को ताक पर रखकर पार्किंग एरिया में दुकान बनाकर बेचने के शहर में कई मामले हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्राधिकरण और प्रशासनिक अफसर परेशान हैं, जबकि दुकान खरीदने वालों के होश उड़े हैं। लोगों को डर है कि देर-सवेर हाईकोर्ट का डंडा इनपर भी चल सकता है। पार्किंग एरिया न होने से ऐसे प्लाजा के आसपास ज्यादातर जाम लग रहता है। नगर के तीन प्रमुख प्लाजा की पार्किंग में बनी दुकानों को ध्वस्त कर फिर से पार्किंग बनाने का हाईकोर्ट से आदेश जारी होने के बाद शहर के कई अन्य प्लाजा भी प्राधिकरण के निशाने पर हैं। इससे वहां दुकान करने वालाें में हड़कंप मचा है। प्राधिकरण में चर्चा है कि जिन अधिकारियों के कार्यकाल में पार्किंग को मार्केट बनवाकर घपला हुआ है, वह शासन स्तर से नप सकते हैं। हालांकि उनमें से कई सेवानिवृत हो चुके हैं।
शहर के सिटी प्लाजा, लक्ष्मी प्लाजा और विष्णु प्लाजा के बेसमेंट में छोड़े गये पार्किंग स्थल पर बिल्डर द्वारा मार्केट बनवाकर दुकान बेचने के मामले में अधिकांश दुकानदारों ने दुकानें खाली कर दी हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्राधिकरण से फिलहाल राहत मिलती नजर नहीं आ रही।
इस कार्रवाई के बाद शहर के कई और प्लाजा प्राधिकरण के निशाने पर आ गए हैं। इनमें बेसमेंट के पार्किंग स्थल पर दुकान बनाकर बेचा गया है। इससे वहां दुकान खरीदने वाले या किराए पर दुकान करने वालों के होश उड़ गये हैं। इनमें सबसे बड़ा प्लाजा अतरपुरा चौपला के पास हैं जिसके बाहर वाहन खड़े करना भी मुुुश्किल है। इतना ही नहीं रेलवे रोड पर इसी तरह का एक और प्लाजा निर्माणाधीन हैं जिसमें यही घपला चल रहा है। प्राधिकरण सूत्रों की माने तो इस तरह के घपला कराने वाले अधिकारी बेशक तबादले पर चले गए हैं, लेकिन उनके खिलाफ शासन स्तर से कार्रवाई संभव है। इतना ही नहीं जो अवैध निर्माण इस समय चल रहे हैं, उनको लेकर प्रशासन काफी गंभीर है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्राधिकरण के अधिकारियों को सख्त कदम उठाने पड़े हैं।
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प्राधिकरण के उपाध्यक्ष गया प्रसाद ने इस तरह के अवैध निर्माणों की सूची बनाकर नोटिस जारी किए जाने के निर्देश संपत्ति अधिकारी दिए हैं। इतना ही नहीं एक महीने के दौरान जिले में एक दर्जन से अधिक अवैध निर्माण ऐसे हैं जिन पर प्राधिकरण का बुलडोजर चल चुका है।
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कई और प्लाजा की पार्किंग में मार्केट बनाकर बेचे गए!
- नक्शा की अनदेखी करने वाले अफसर नपेंगे
- हाईकोर्ट के आदेश के बाद अफसर गंभीर, व्यापारी परेशान
अनिल त्यागी
हापुड़। मानकों को ताक पर रखकर पार्किंग एरिया में दुकान बनाकर बेचने के शहर में कई मामले हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्राधिकरण और प्रशासनिक अफसर परेशान हैं, जबकि दुकान खरीदने वालों के होश उड़े हैं। लोगों को डर है कि देर-सवेर हाईकोर्ट का डंडा इनपर भी चल सकता है। पार्किंग एरिया न होने से ऐसे प्लाजा के आसपास ज्यादातर जाम लग रहता है। नगर के तीन प्रमुख प्लाजा की पार्किंग में बनी दुकानों को ध्वस्त कर फिर से पार्किंग बनाने का हाईकोर्ट से आदेश जारी होने के बाद शहर के कई अन्य प्लाजा भी प्राधिकरण के निशाने पर हैं। इससे वहां दुकान करने वालाें में हड़कंप मचा है। प्राधिकरण में चर्चा है कि जिन अधिकारियों के कार्यकाल में पार्किंग को मार्केट बनवाकर घपला हुआ है, वह शासन स्तर से नप सकते हैं। हालांकि उनमें से कई सेवानिवृत हो चुके हैं।
शहर के सिटी प्लाजा, लक्ष्मी प्लाजा और विष्णु प्लाजा के बेसमेंट में छोड़े गये पार्किंग स्थल पर बिल्डर द्वारा मार्केट बनवाकर दुकान बेचने के मामले में अधिकांश दुकानदारों ने दुकानें खाली कर दी हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्राधिकरण से फिलहाल राहत मिलती नजर नहीं आ रही।
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इस कार्रवाई के बाद शहर के कई और प्लाजा प्राधिकरण के निशाने पर आ गए हैं। इनमें बेसमेंट के पार्किंग स्थल पर दुकान बनाकर बेचा गया है। इससे वहां दुकान खरीदने वाले या किराए पर दुकान करने वालों के होश उड़ गये हैं। इनमें सबसे बड़ा प्लाजा अतरपुरा चौपला के पास हैं जिसके बाहर वाहन खड़े करना भी मुुुश्किल है। इतना ही नहीं रेलवे रोड पर इसी तरह का एक और प्लाजा निर्माणाधीन हैं जिसमें यही घपला चल रहा है। प्राधिकरण सूत्रों की माने तो इस तरह के घपला कराने वाले अधिकारी बेशक तबादले पर चले गए हैं, लेकिन उनके खिलाफ शासन स्तर से कार्रवाई संभव है। इतना ही नहीं जो अवैध निर्माण इस समय चल रहे हैं, उनको लेकर प्रशासन काफी गंभीर है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्राधिकरण के अधिकारियों को सख्त कदम उठाने पड़े हैं।
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प्राधिकरण के उपाध्यक्ष गया प्रसाद ने इस तरह के अवैध निर्माणों की सूची बनाकर नोटिस जारी किए जाने के निर्देश संपत्ति अधिकारी दिए हैं। इतना ही नहीं एक महीने के दौरान जिले में एक दर्जन से अधिक अवैध निर्माण ऐसे हैं जिन पर प्राधिकरण का बुलडोजर चल चुका है।
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