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सीएचसी में तड़पती रही प्रसूता,चार घंटे बाद खुली चिकित्सकों की नींद

Fri, 07 Sep 2018 12:10 AM IST
Updated Fri, 07 Sep 2018 12:10 AM IST
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सीएचसी में तड़पती रही प्रसूता,चार घंटे बाद खुली चिकित्सकों की नींद
सीएचसी में तड़पती रही प्रसूता ,चार घंटे बाद खुली चिकित्सकों की नींद
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हापुड़। गढ़ रोड स्थित सीएचसी में बृहस्पतिवार को चिकित्सकों की घोर लापरवाही सामने आई। रमपुरा निवासी एक प्रसूता की सामान्य डिलीवरी होने के बाद भी वह चार घंटे तक ब्लीडिंग से तड़पती रही। तीमारदार पूरे अस्पताल परिसर में चिकित्सकों को ढूंढते दौड़ते रहे। लेकिन मुख्य वार्ड समेत आपात काल वार्ड में भी कुर्सियां खाली पड़ी थी। प्रसूता के बेहोश होे के बाद चिकित्सकों की नींद खुली, तो प्रसूता को रेफर कराने का दबाव बना दिया। पीड़ित परिवार निजी एंबुलेंस के जरिए मरीज को मेरठ लेकर रवाना हो गए।
सरकार जच्चा बच्चा मृत्यु दर रोकने के लिए गांवों में जागरूकता अभियान चलाकर सरकारी अस्पतालों में महिलाओं के प्रसव पर जोर दे रही है। लेकिन गढ़ रोड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात चिकित्सकों ने प्रसव को खेल बना दिया है। चिकित्सक सिर्फ प्रसव कराते ही खानापूर्ति कर लेते हैं। बृहस्पतिवार को ऐसा ही एक मामला अस्पताल में सामने आया।
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रमपुरा निवासी राजू अपनी पत्नी शशि को प्रसव पीड़ा होने के बाद गढ़ रोड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचा। सुबह करीब 11 बजे प्रसूता ने बच्ची को जन्म दिया। परिजनों का आरोप है कि प्रसव होते ही चिकित्सक वार्ड छोड़कर चली गई। इस दौरान उनसे एक कागज पर यह कहकर हस्ताक्षर करा लिए गए कि उनकी पत्नी का प्रसव यहीं हुआ है।
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करीब चार घंटे तक प्रसूता वार्ड में ब्लीडिंग की समस्या से जूझती रही। प्रसूता के तीमारदार पूरे अस्पताल में चिकित्सकों की तलाश करते रहे। लेकिन एक भी चिकित्सक मौजूद नहीं मिल सका, यहां तक ही आपातकालीन वार्ड में भी कुर्सियां खाली पड़ी थी।
प्रसूता को लगातार ब्लीडिंग होने से वह बेहोशी की हालत में आने लगी। इससे परिजन परेशान हो गए। करीब चार घंटे बाद एक चिकित्सक वार्ड में आयी और महिला को उपचार दिया। लेकिन उसकी ब्लीडिंग बंद नहीं हो सकी। मजबूरी में परिजन निजी एंबुलेंस के जरिए प्रसूता को मेरठ लेकर रवाना हुए।
वहां तैनात एक चिकित्सक का कहना था कि प्रसव होने के बाद ही प्रसूता को मेरठ रेफर कर दिया गया था, लेकिन परिजन नहीं गए। जबकि परिजनों का स्पष्ट कहना है कि उन्हें किसी ने रेफर की बात नहीं बतायी, कोई चिकित्सक भी अस्पताल में मौजूद नहीं मिला।

मुख्य चिकित्साधिकारी डा.राजवीर सिंह का कहना है कि अस्पतालों में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस मामले की जांच करा कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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