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मानसून में पानी से लबालब होगी धरती की कोख
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जल संरक्षण को जिले में बनेंगे 310 वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
हापुड़। मानसून में जिले की धरती भूगर्भीय जल से लबालब होगी। शासन के निर्देशों के बाद शासन ने मानसून को देखते हुए जल संरक्षण के लिए तैयारी पूरी कर ली है। जिले के 180 तालाबों को साफ सफाई और सौंदरीकरण के लिए चुना गया है। वहीं जिले में जगह-जगह 310 सोखपिट(सोख्ते) बनाये जाने का कार्य प्रगति पर है। इसके अलावा स्कूलों आदि में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाये जाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
सरकार के महत्वपूर्ण कार्यक्रम के अंतर्गत जल संरक्षण अभियान में बड़ी कार्रवाई गांवों में पंचायत विभाग के अधिकारियों द्वारा की जा रही है। जल संरक्षण के लिए सोखपिट (सोख्ता गड्ढा) बनाये जा रहे हैं। बताया कि जिले में करीब 310 से अधिक बनेगा सोखपिट बनाये जाएंगे। इस पर तेजी से काम ग्राम पंचायतों में शुरू कर दिया गया है। अभी तक 69 सोखपिट का निर्माण पूरा हो गया है। एक माह के अंदर सभी सोखपिट का निर्माण हर हाल में पूरा करने के लिए कहा गया है। हापुड़ ब्लॉक में 111 सोखपिट का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से 15 का निर्माण पूरा हो गया है। सिंभावली ब्लॉक में 109 सोखपिट बनने हैं, जिनमें से 32 का काम पूरा हो गया है। धौलाना ब्लॉक में 42 सोखपिट बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से दो का काम पूरा हो गया है। गढ़मुक्तेश्वर ब्लॉक में 48 सोखपिट का निर्णय लिया गया है, जिसमे 20 का काम पूरा हो गया है। सरकारी स्कूलों में भी वाटर हार्वेटिंग सिस्टम बनाए जाने के निर्देश दिए गए हैं। ये सोखपिट गांवों में स्थित सरकारी भवनों में बनाये जा रहे हैं।
क्रिटिकल जोन में है जिला
- बताया कि गढ़, सिंभावली और हापुड़ क्रिटिकल जोन में हैं। यहां भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। ऐसे में इन ब्लाकों में विशेष रूप से बेहतर कार्य करने के लिए कहा गया है।
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सूखे तालाबों को भी बारिश के पानी से भरने की तैयारी
- इसके अलावा जिले में 182 तालाबों का सौंदरीकरण का कार्य किया जा रहा है। इन तालाबों को साफ सफाई करके इन्हें बरसात के दिनों में लबालब करने की व्यवस्था की जा रही है।
जिला पंचायत राज अधिकारी यावर अब्बास ने बताया कि यह ग्राम पंचायत निधि से बनाया जाएगा। उन्होंने ग्राम पंचायत सचिवों को चेतावनी दी है कि अच्छी गुणवत्ता के सोखपिट बनवाएं। उनकी क्षमता का भी आंकलन करें। जरूरत के मुताबिक ही सोखपिट का साइज रखें।
राजस्थान से सीख लेकर शुरू किया काम
- वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और सोखपिट लगाए जाने से राजस्थान में औसत भूगर्भीय जल पांच फिट ऊपर आ चुका है। यही तरीका अब उत्तर प्रदेश शासन द्वारा अपनाया जा रहा है। जिसे लेकर शासन ने सभी जिलों को जल संरक्षण के लिए स्पष्ट आदेश जारी किए हैं।
बारिश का पानी सहेजने को लोगों को भी किया जाएगा जागरूक
- डीपीआरओ ने बताया कि यह एक बड़े अभियान की शुरूआत है। फिलहाल इस अभियान को सरकारी स्तर पर शुरू किया गया है, लेकिन इस अभियान से जन सामान्य को जोड़ा जाएगा। लोगों को अपने अपने मकानों, आहतों में बरसात का पानी सहेजने के लिए सोखपिट बनाने के लिए जागरूक किया जाएगा। समर्थ लोग इसे बनवाकर समाज और अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान कर सकेंगे।
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हापुड़। मानसून में जिले की धरती भूगर्भीय जल से लबालब होगी। शासन के निर्देशों के बाद शासन ने मानसून को देखते हुए जल संरक्षण के लिए तैयारी पूरी कर ली है। जिले के 180 तालाबों को साफ सफाई और सौंदरीकरण के लिए चुना गया है। वहीं जिले में जगह-जगह 310 सोखपिट(सोख्ते) बनाये जाने का कार्य प्रगति पर है। इसके अलावा स्कूलों आदि में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाये जाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
सरकार के महत्वपूर्ण कार्यक्रम के अंतर्गत जल संरक्षण अभियान में बड़ी कार्रवाई गांवों में पंचायत विभाग के अधिकारियों द्वारा की जा रही है। जल संरक्षण के लिए सोखपिट (सोख्ता गड्ढा) बनाये जा रहे हैं। बताया कि जिले में करीब 310 से अधिक बनेगा सोखपिट बनाये जाएंगे। इस पर तेजी से काम ग्राम पंचायतों में शुरू कर दिया गया है। अभी तक 69 सोखपिट का निर्माण पूरा हो गया है। एक माह के अंदर सभी सोखपिट का निर्माण हर हाल में पूरा करने के लिए कहा गया है। हापुड़ ब्लॉक में 111 सोखपिट का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से 15 का निर्माण पूरा हो गया है। सिंभावली ब्लॉक में 109 सोखपिट बनने हैं, जिनमें से 32 का काम पूरा हो गया है। धौलाना ब्लॉक में 42 सोखपिट बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से दो का काम पूरा हो गया है। गढ़मुक्तेश्वर ब्लॉक में 48 सोखपिट का निर्णय लिया गया है, जिसमे 20 का काम पूरा हो गया है। सरकारी स्कूलों में भी वाटर हार्वेटिंग सिस्टम बनाए जाने के निर्देश दिए गए हैं। ये सोखपिट गांवों में स्थित सरकारी भवनों में बनाये जा रहे हैं।
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क्रिटिकल जोन में है जिला
- बताया कि गढ़, सिंभावली और हापुड़ क्रिटिकल जोन में हैं। यहां भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। ऐसे में इन ब्लाकों में विशेष रूप से बेहतर कार्य करने के लिए कहा गया है।
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सूखे तालाबों को भी बारिश के पानी से भरने की तैयारी
- इसके अलावा जिले में 182 तालाबों का सौंदरीकरण का कार्य किया जा रहा है। इन तालाबों को साफ सफाई करके इन्हें बरसात के दिनों में लबालब करने की व्यवस्था की जा रही है।
जिला पंचायत राज अधिकारी यावर अब्बास ने बताया कि यह ग्राम पंचायत निधि से बनाया जाएगा। उन्होंने ग्राम पंचायत सचिवों को चेतावनी दी है कि अच्छी गुणवत्ता के सोखपिट बनवाएं। उनकी क्षमता का भी आंकलन करें। जरूरत के मुताबिक ही सोखपिट का साइज रखें।
राजस्थान से सीख लेकर शुरू किया काम
- वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और सोखपिट लगाए जाने से राजस्थान में औसत भूगर्भीय जल पांच फिट ऊपर आ चुका है। यही तरीका अब उत्तर प्रदेश शासन द्वारा अपनाया जा रहा है। जिसे लेकर शासन ने सभी जिलों को जल संरक्षण के लिए स्पष्ट आदेश जारी किए हैं।
बारिश का पानी सहेजने को लोगों को भी किया जाएगा जागरूक
- डीपीआरओ ने बताया कि यह एक बड़े अभियान की शुरूआत है। फिलहाल इस अभियान को सरकारी स्तर पर शुरू किया गया है, लेकिन इस अभियान से जन सामान्य को जोड़ा जाएगा। लोगों को अपने अपने मकानों, आहतों में बरसात का पानी सहेजने के लिए सोखपिट बनाने के लिए जागरूक किया जाएगा। समर्थ लोग इसे बनवाकर समाज और अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान कर सकेंगे।