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अपनों के उत्पीडन से निराश हो चुकीं 30 महिलाओं को मिली रोजगार की संजीवनी

Thu, 18 Oct 2018 12:42 AM IST
Updated Thu, 18 Oct 2018 12:42 AM IST
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अपनों के उत्पीडन से निराश हो चुकीं 30 महिलाओं को मिली रोजगार की संजीवनी
अपनों के उत्पीड़न से निराश हो चुकीं 30
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महिलाओं को मिली रोजगार की संजीवनी
हापुड़। घरेलू हिंसा और आपसी विवाद में पति और मायके पक्ष द्वारा त्यागने से निराश महिलाओं को जिला प्रोबेशन विभाग रोजगार की संजीवनी दे रहा है। प्रदेश में इस प्रकार की पहल करते हुए हापुड़ जनपद में ऐसी 30 महिलाओं को रोजगार दिया जा चुका है। इसके अलावा अपराध के दलदल में गलती से फंसे बाल संप्रेक्षण गृह के सात युवाओं को भी रोजगार के अवसर प्रदान किए गए हैं।
जिला सह परीविक्षा अधिकारी डॉ. निशा रावत ने बताया कि पति द्वारा उत्पीड़न के बाद कम पढ़ी लिखी महिलाओं के लिए उनका मायका ही उनके आश्रय का स्थान होता है। लेकिन कभी-कभी परिस्थितियां ऐसी होती हैं कि मायका पक्ष भी महिलाओं को अपनाने से इंकार कर देता है। ऐसी स्थिति में जिंदगी से पूरी तरह हार चुकी महिलाएं अक्सर आत्महत्या का रास्ता चुन लेती हैं। ऐसे मामले में प्रकाश में आने के बाद जिले की ऐसी महिलाओं को रोजगार दिलाने की मुहिम शुरू की गई है। यह पूरे प्रदेश में अपनी तरह की पहली पहल है।
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कराया क्वालिटी मैनेजमेंट का कोर्स
डॉ. निशा रावत ने बताया कि जिले भर से चिन्हित ऐसी 30 महिलाओं की पहले काउंसिलिंग कराकर उनका आत्मविश्वास बढ़ाया गया। इसके बाद अलीगढ़ की संस्था देश कल्याण समिति व नादर्न इंडिया टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन गाजियाबाद आदि के सहयोग से क्वालिटी मैनेजमेंट का कोर्स कराया गया। इस कोर्स के बाद 20 महिलाओं को विभिन्न फैक्ट्रियों में कार्य दिलाया गया। जबकि दस महिलाएं गढ़ के मूढ़ा उद्योग सहित स्वरोजगार से जुड़कर अपनी गृहस्थी चला रही हैं।
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राजकीय संप्रेक्षण गृह से निकले सात युवाओं को भी मिला रोजगार
विभिन्न मामलों में राजकीय संप्रेक्षण गृह में रहे जिले के सात ऐसे युवाओं को भी रोजगार मुहैया कराया गया, जो किशोरावस्था में गलती से अपराध के दलदल में धंस गए थे। इन्हें रोजगार नहीं दिया जाता तो वे इसमें और धंसते चले जाते। इसके अलावा चार ऐसे बच्चों को भी निशुल्क शिक्षा दी जा रही है जो बेसहारा थे।

आत्महत्या के लिए घूम रही महिला से मिली प्रेरणा
डॉ. निशा रावत ने बताया कि निजामपुर रेलवे स्टेशन पर आत्महत्या के इरादे से घूम रही सिंभावली निवासी एक महिला ने उन्हें इस पहल के लिए प्रेरित किया। महिला उनसे उनसे अचानक टकरा गयी थी। उन्होंने कुछ संस्थाओं की मदद से जिले में ऐसी व्यवस्था की है। इस प्रकार की परित्यक्त महिलाएं उनसे मिलकर खुद अपने पैरों पर खड़ी हो सकती हैं।
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