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जमीन पर आकृति उकरते बन गए चित्रकार
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राठ। बचपन में उंगली से जमीन पर आकृति बनाने के शौक ने गल्हिया गांव के प्रवेश कुमार को चित्रकार बना दिया। किसी की भी फोटो देख कागज पर उसकी हूबहू तस्वीर उकेर देते हैं। अभी तक करीब ढाई सौ चित्र बना चुके हैं।
राठ क्षेत्र के कैंथी गांव निवासी श्रमिक भारत सिंह के पुत्र प्रवेश कुमार गल्हिया गांव में अपनी ननिहाल में रहते हैं। बीएनवी डिग्री कालेज से स्नातक कर चुके हैं। बताते हैं कि बचपन में एक हाथ से मां की उंगली पकड़ते थे तो दूसरे हाथ में गीली मिट्टी रहती थी। उसी मिट्टी से खिलौने बनाना, फिर उन्हें गौर से देखना और मां की डांट खाना याद करते हैं। लोग उन्हें देख कर कहते थे कि यह बालक कलाकार बनेगा। गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाई के दौरान चित्रकारी में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। चित्रकला प्रतियोगिताओं में हमेशा पहला स्थान पाया है। बीएनवी डिग्री कालेज में पढ़ाई के दौरान बुंदेलखंड मालवीय स्वामी ब्रह्मानंद के अनेक चित्र बना उनके अनुयायियों को भेंट किए। आयल कलर, एक्रिलिक कलर, ग्रेफाइट पेंसिल, चारकोल, कलर पेंसिल आदि से करीब ढाई सौ चित्र बना चुके हैं। उनका उद्देश्य चित्रकारी में एक अलग मुकाम बनाना है। प्रवेश कहते हैं कि कला का उद्देश्य वस्तुओं का बाहरी रूप नहीं बल्कि उनके आंतरिक रूप के महत्व का वर्णन करना है।
सोशल मीडिया पर युवाओं को दे रहे प्रेरणा
प्रवेश कुमार अपनी कला के प्रचार प्रसार व युवाओं को प्रेरणा देने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। प्रवेश कुमार आर्टिस्ट के नाम से यूट्यूब चैनल के साथ ही इंस्टाग्राम पर पर भी आईडी बनाई है। जिनमें वह अपनी कला से संबंधित वीडियो पोस्ट करते हैं। जेसीआई के युवा सप्ताह में भाग लिया था। जिसमें उनकी बनाई पेंटिंग को सर्वेश्रेष्ठ घोषित कर पुरस्कृत किया गया था।
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राठ क्षेत्र के कैंथी गांव निवासी श्रमिक भारत सिंह के पुत्र प्रवेश कुमार गल्हिया गांव में अपनी ननिहाल में रहते हैं। बीएनवी डिग्री कालेज से स्नातक कर चुके हैं। बताते हैं कि बचपन में एक हाथ से मां की उंगली पकड़ते थे तो दूसरे हाथ में गीली मिट्टी रहती थी। उसी मिट्टी से खिलौने बनाना, फिर उन्हें गौर से देखना और मां की डांट खाना याद करते हैं। लोग उन्हें देख कर कहते थे कि यह बालक कलाकार बनेगा। गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाई के दौरान चित्रकारी में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। चित्रकला प्रतियोगिताओं में हमेशा पहला स्थान पाया है। बीएनवी डिग्री कालेज में पढ़ाई के दौरान बुंदेलखंड मालवीय स्वामी ब्रह्मानंद के अनेक चित्र बना उनके अनुयायियों को भेंट किए। आयल कलर, एक्रिलिक कलर, ग्रेफाइट पेंसिल, चारकोल, कलर पेंसिल आदि से करीब ढाई सौ चित्र बना चुके हैं। उनका उद्देश्य चित्रकारी में एक अलग मुकाम बनाना है। प्रवेश कहते हैं कि कला का उद्देश्य वस्तुओं का बाहरी रूप नहीं बल्कि उनके आंतरिक रूप के महत्व का वर्णन करना है।
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सोशल मीडिया पर युवाओं को दे रहे प्रेरणा
प्रवेश कुमार अपनी कला के प्रचार प्रसार व युवाओं को प्रेरणा देने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। प्रवेश कुमार आर्टिस्ट के नाम से यूट्यूब चैनल के साथ ही इंस्टाग्राम पर पर भी आईडी बनाई है। जिनमें वह अपनी कला से संबंधित वीडियो पोस्ट करते हैं। जेसीआई के युवा सप्ताह में भाग लिया था। जिसमें उनकी बनाई पेंटिंग को सर्वेश्रेष्ठ घोषित कर पुरस्कृत किया गया था।
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