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Hamirpur News: डीएम ने नहीं लिया ज्ञापन, अधिवक्ताओं ने की नारेबाजी
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हमीरपुर। कानपुर-सागर हाईवे (एनएच 34) को छह लेन बनाए जाने की मांग को लेकर ज्ञापन देने पहुंचे अधिवक्ताओं का गुस्सा उस वक्त फूट पड़ा जब जिलाधिकारी ने ज्ञापन नहीं लिया। अधिवक्ता उन्हें ही ज्ञापन देने के लिए अड़े रहे। तेज धूप में अधिवक्ताओं ने जमकर नारेबाजी की। इसके बाद बस स्टैंड पर भी प्रदर्शन किया।
डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने कानपुर-सागर हाईवे (एनएच 34) पर आए दिन हो रहे सड़क हादसों को लेकर चिंता व्यक्त की। कहा कि टू लेन मार्ग है जबकि इस पर वाहनों की संख्या बहुत अधिक है। आए दिन हादसे होते हैं और लोगों की जानें जा रहीं हैं। इस मार्ग को छह लिए किए जाने की जरूरत है। अधिवक्ता केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को संबोधित ज्ञापन देने के लिए कलक्ट्रेट पहुंचे लेकिन जिलाधिकारी ने अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन लेने के लिए भेज दिया।
अधिवक्ताओं ने ज्ञापन देने से इंकार करते हुए जिलाधिकारी से मिलने के लिए कहा। जब वह नहीं आए तो अधिवक्ताओं ने नारेबाजी की। इसके बाद अधिवक्ता एनआईसी ऑफिस पहुंचे। वहां डीएम कार्यालय के एक कर्मचारी ने उन्हें 10 मिनट रुकने को कहा तो अधिवक्ता धूप में खड़े रहे। जब डीएम बाहर नहीं आए तो वह उग्र हो गए और जिलाधिकारी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए लौट गए। इस दौरान महामंत्री अश्वनी प्रजापति ने कहा कि डीएम का यह व्यवहार उचित नहीं है। गंभीर मुद्दों पर तो गंभीर रहना चाहिए। मौके पर दीपक चतुर्वेदी, जयपाल वर्मा, अनिरुद्ध शुक्ला, प्रकाश चंद्र ओमर, आशीष कुशवाहा, नंद किशोर प्रजापति, अजय प्रताप सिंह, गुलाब सिंह यादव, तौसीफ खान समेत अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।
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मुंडन कराकर जताया विरोध
जिलाधिकारी के नहीं आने पर अधिवक्ताओं में नाराजगी दिखी। इसके विरोध में अधिवक्ताओं ने मुंडन करवाया। कहा कि हाईवे का मुद्दा आमजन से जुड़ा है। बुंदेलखंड नव निर्माण सेना भारत के अध्यक्ष अधिवक्ता विनय तिवारी व अधिवक्ता रमेश यादव ने कहा कि जब प्रशासन जनता की पीड़ा सुनना बंद कर दे तब आंदोलन त्याग, संघर्ष और बलिदान का रूप ले लेता है। एन एच 34 पर लगातार हो रहीं मौतों के खिलाफ यह लड़ाई अब जनआंदोलन बनेगी।
एक दिन पहले भी आंदोलनकारी भी हुए थे उग्र
एनएच 34 के चौड़ीकरण और डिवाइडर की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को सर्वदलीय प्रदर्शन हुआ था। कलक्ट्रेट पहुंचे प्रदर्शनकारी जिलाधिकारी को ज्ञापन देना चाहते थे लेकिन वह दफ्तर से बाहर नहीं नहीं निकले। अपर जिलाधिकारी को भेजा लेकिन बात नहीं बनी। जब डीएम बाहर नहीं आए तो प्रदर्शनकारी उग्र हो गए और फिर एक घंटे तक जमकर नारेबाजी हुई। महिलाओं ने चूड़ियां दिखाई। बाद में सभी बगैर ज्ञापन दिए लौट आए।
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डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने कानपुर-सागर हाईवे (एनएच 34) पर आए दिन हो रहे सड़क हादसों को लेकर चिंता व्यक्त की। कहा कि टू लेन मार्ग है जबकि इस पर वाहनों की संख्या बहुत अधिक है। आए दिन हादसे होते हैं और लोगों की जानें जा रहीं हैं। इस मार्ग को छह लिए किए जाने की जरूरत है। अधिवक्ता केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को संबोधित ज्ञापन देने के लिए कलक्ट्रेट पहुंचे लेकिन जिलाधिकारी ने अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन लेने के लिए भेज दिया।
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अधिवक्ताओं ने ज्ञापन देने से इंकार करते हुए जिलाधिकारी से मिलने के लिए कहा। जब वह नहीं आए तो अधिवक्ताओं ने नारेबाजी की। इसके बाद अधिवक्ता एनआईसी ऑफिस पहुंचे। वहां डीएम कार्यालय के एक कर्मचारी ने उन्हें 10 मिनट रुकने को कहा तो अधिवक्ता धूप में खड़े रहे। जब डीएम बाहर नहीं आए तो वह उग्र हो गए और जिलाधिकारी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए लौट गए। इस दौरान महामंत्री अश्वनी प्रजापति ने कहा कि डीएम का यह व्यवहार उचित नहीं है। गंभीर मुद्दों पर तो गंभीर रहना चाहिए। मौके पर दीपक चतुर्वेदी, जयपाल वर्मा, अनिरुद्ध शुक्ला, प्रकाश चंद्र ओमर, आशीष कुशवाहा, नंद किशोर प्रजापति, अजय प्रताप सिंह, गुलाब सिंह यादव, तौसीफ खान समेत अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।
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मुंडन कराकर जताया विरोध
जिलाधिकारी के नहीं आने पर अधिवक्ताओं में नाराजगी दिखी। इसके विरोध में अधिवक्ताओं ने मुंडन करवाया। कहा कि हाईवे का मुद्दा आमजन से जुड़ा है। बुंदेलखंड नव निर्माण सेना भारत के अध्यक्ष अधिवक्ता विनय तिवारी व अधिवक्ता रमेश यादव ने कहा कि जब प्रशासन जनता की पीड़ा सुनना बंद कर दे तब आंदोलन त्याग, संघर्ष और बलिदान का रूप ले लेता है। एन एच 34 पर लगातार हो रहीं मौतों के खिलाफ यह लड़ाई अब जनआंदोलन बनेगी।
एक दिन पहले भी आंदोलनकारी भी हुए थे उग्र
एनएच 34 के चौड़ीकरण और डिवाइडर की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को सर्वदलीय प्रदर्शन हुआ था। कलक्ट्रेट पहुंचे प्रदर्शनकारी जिलाधिकारी को ज्ञापन देना चाहते थे लेकिन वह दफ्तर से बाहर नहीं नहीं निकले। अपर जिलाधिकारी को भेजा लेकिन बात नहीं बनी। जब डीएम बाहर नहीं आए तो प्रदर्शनकारी उग्र हो गए और फिर एक घंटे तक जमकर नारेबाजी हुई। महिलाओं ने चूड़ियां दिखाई। बाद में सभी बगैर ज्ञापन दिए लौट आए।