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Hamirpur News: ब्याज समेत बैंक लौटाए ग्राहक के खाते से कटा पैसा
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हमीरपुर। जिला उपभोक्ता आयोग ने एटीएम से रुपये न निकलने के बावजूद खाते से रकम कट जाने के मामले में इंडियन बैंक मौदहा को 10 हजार रुपये ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। बैंक को 15 मई 2019 से नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। साथ ही मानसिक कष्ट के तीन हजार रुपये और वाद व्यय के एक हजार रुपये भी 30 दिन में अदा करने होंगे।
शहर के गौरा देवी मंदिर नई बस्ती निवासी अहिल्या ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद दायर किया था। उन्होंने बताया था कि 15 मई 2019 को इलाहाबाद बैंक मौदहा के जनसेवा केंद्र रीवन से डेबिट कार्ड के माध्यम से 10 हजार रुपये निकालने का प्रयास किया था। एटीएम से रुपये नहीं निकले लेकिन खाते से रकम कट गई। मामले की शिकायत बैंक में की गई। बैंक लोकपाल को भी शिकायती पत्र भेजा गया लेकिन कटे हुए रुपये नहीं मिले। इसके बाद बैंक का विलय इंडियन बैंक में हो गया।
सुनवाई के दौरान बैंक ने कहा कि ट्रांजेक्शन सफल रहा था। यदि उपभोक्ता को रकम नहीं मिली तो इसकी जिम्मेदारी जनसेवा केंद्र की है। वहीं इंडियन बैंक मौदहा की ओर से कोई प्रभावी जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। आयोग के अध्यक्ष महेश कुमार कुशवाहा तथा सदस्य राम प्रताप व स्वर्णलता जायसवाल की पीठ ने अभिलेखों और साक्ष्यों के आधार पर माना कि उपभोक्ता को राशि प्राप्त नहीं हुई जबकि खाते से रकम कट गई थी। आयोग की पीठ ने इसे बैंक की सेवा में कमी माना और फैसला सुनाया।
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शहर के गौरा देवी मंदिर नई बस्ती निवासी अहिल्या ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद दायर किया था। उन्होंने बताया था कि 15 मई 2019 को इलाहाबाद बैंक मौदहा के जनसेवा केंद्र रीवन से डेबिट कार्ड के माध्यम से 10 हजार रुपये निकालने का प्रयास किया था। एटीएम से रुपये नहीं निकले लेकिन खाते से रकम कट गई। मामले की शिकायत बैंक में की गई। बैंक लोकपाल को भी शिकायती पत्र भेजा गया लेकिन कटे हुए रुपये नहीं मिले। इसके बाद बैंक का विलय इंडियन बैंक में हो गया।
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सुनवाई के दौरान बैंक ने कहा कि ट्रांजेक्शन सफल रहा था। यदि उपभोक्ता को रकम नहीं मिली तो इसकी जिम्मेदारी जनसेवा केंद्र की है। वहीं इंडियन बैंक मौदहा की ओर से कोई प्रभावी जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। आयोग के अध्यक्ष महेश कुमार कुशवाहा तथा सदस्य राम प्रताप व स्वर्णलता जायसवाल की पीठ ने अभिलेखों और साक्ष्यों के आधार पर माना कि उपभोक्ता को राशि प्राप्त नहीं हुई जबकि खाते से रकम कट गई थी। आयोग की पीठ ने इसे बैंक की सेवा में कमी माना और फैसला सुनाया।
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