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अप्रैल में मई जैसी तपन, 43 डिग्री पहुंचा तापमान
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शहर में दरवाजे की घास की टटिया बनाती महिला। संवाद
- फोटो : HAMIRPUR
हमीरपुर। अप्रैल के पहले पखवाड़े से ही गर्मी ने अपने तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। बुधवार को तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। जिससे लोग बेहाल रहे। दिन भर लोग गर्मी से राहत पाने की कोशिश करते रहे, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। तेज धूप के साथ गर्म हवाएं परेशान करती रहीं।
बुुधवार सुबह से ही मौसम गर्म रहा। सुबह नौ बजे के पहले ही चटक धूप होने से लोगों को गर्मी का एहसास होने लगा। दोपहर 12 बजे तक तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। तापमान बढ़ने का सिलसिला यहीं नहीं थमा, दोपहर एक बजे तक तापमान 43 डिग्री सेल्सियस जा पहुंचा। एक ओर जहां तापमान अधिक होने के कारण लोगों को गर्मी ने बेहाल किया वहीं गर्म हवाएं भी तन को झुलसाती रहीं। दिन भर लोग गर्मी से राहत पाने की कोशिश करते रहे। धूप इतनी तेज थी कि दिन में सड़कों और बाजारों में सन्नाटा रहा।
हालांकि बीच-बीच में मजबूरन गुजर रहे राहगीर गर्म हवाओं के थपेड़े सहन करते हुए नजर आते रहे। चौराहों पर यातायात व्यवस्था में लगे पुलिस कर्मी भी छांव तलाशते नजर आए। शाम को भी मौसम ठंडा न होने से कोई खास राहत नहीं मिल सकी। उधर भीषण गर्मी के बीच लोग दरवाजों और खिड़कियों में खस की टटिया बनवाकर गर्मी से निजात पाने का प्रयास कर रहे हैं। हर साल गर्मी के सीजन में जालौन से खस की टटिया बनाने आने वाले परिवार डेरा डाल लिया है।
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बुुधवार सुबह से ही मौसम गर्म रहा। सुबह नौ बजे के पहले ही चटक धूप होने से लोगों को गर्मी का एहसास होने लगा। दोपहर 12 बजे तक तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। तापमान बढ़ने का सिलसिला यहीं नहीं थमा, दोपहर एक बजे तक तापमान 43 डिग्री सेल्सियस जा पहुंचा। एक ओर जहां तापमान अधिक होने के कारण लोगों को गर्मी ने बेहाल किया वहीं गर्म हवाएं भी तन को झुलसाती रहीं। दिन भर लोग गर्मी से राहत पाने की कोशिश करते रहे। धूप इतनी तेज थी कि दिन में सड़कों और बाजारों में सन्नाटा रहा।
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हालांकि बीच-बीच में मजबूरन गुजर रहे राहगीर गर्म हवाओं के थपेड़े सहन करते हुए नजर आते रहे। चौराहों पर यातायात व्यवस्था में लगे पुलिस कर्मी भी छांव तलाशते नजर आए। शाम को भी मौसम ठंडा न होने से कोई खास राहत नहीं मिल सकी। उधर भीषण गर्मी के बीच लोग दरवाजों और खिड़कियों में खस की टटिया बनवाकर गर्मी से निजात पाने का प्रयास कर रहे हैं। हर साल गर्मी के सीजन में जालौन से खस की टटिया बनाने आने वाले परिवार डेरा डाल लिया है।
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