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Hamirpur News: बांदा कोडीनयुक्त सिरप कांड में एसटीएफ ने टेढ़ा में मारा छापा
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फोटो 10 एचएएमपी 15- टेढ़ा की इस दुकान में खोली गई थी ओम मेडिकल स्टोर। संवाद
भरुआ सुमेरपुर (हमीरपुर)। तीन सितंबर को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से पकड़ी गई सीसी कोडीनयुक्त सिरप के मामले में एसटीएफ ने बुधवार देर शाम टेढ़ा गांव में छापा मारा। टीम ने मामले के मुख्य आरोपी के बहनोई और मेडिकल स्टोर संचालक रविंद्र गुप्ता को हिरासत में लिया है। उसके मेडिकल स्टोर से कुछ प्रतिबंधित दवाएं भी बरामद होने की जानकारी मिली है। एसटीएफ की कार्रवाई से क्षेत्र के मेडिकल संचालकों में खलबली मच गई।
तीन सितंबर को बांदा पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने बांदा के पुनाहुर गांव के पास बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर डीसीएम से 30 हजार सीसी कोडीनयुक्त सिरप बरामद की थी। मामले में बांदा के अतर्रा निवासी प्रियांशु उर्फ शिवम गुप्ता को मुख्य आरोपी बताया गया है। पूछताछ में बताया कि उसने अपने बहनोई रविंद्र गुप्ता के टेढ़ा स्थित ओम मेडिकल स्टोर के नाम से बिल कटवाकर यह माल मंगवाया था। अवैध सिरप को उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड क्षेत्र के विभिन्न जनपदों में खपाया जाना था।
मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद से ही एसटीएफ रविंद्र गुप्ता की तलाश में जुटी थी। बुधवार देर शाम टीम ने टेढ़ा गांव स्थित ओम मेडिकल स्टोर पर छापा मारकर रविंद्र गुप्ता को पकड़ लिया और अपने साथ ले गई। छापे के दौरान दुकान से कुछ प्रतिबंधित दवाएं भी बरामद की गईं। पूर्व प्रधान सौरभ सिंह ने बताया कि जिस दुकान पर ओम मेडिकल स्टोर का बोर्ड लगा था, उसकी ओपनिंग तक नहीं हुई थी। दुकान का कारोबार कब से संचालित हो रहा था, इसकी जानकारी ग्रामीणों को नहीं है। छापा मारी के बाद दुकान के बाहर लगा बोर्ड भी फाड़ दिया गया। रविंद्र गुप्ता मूलरूप से कहां का निवासी है यह भी गांववासी स्पष्ट रूप से नहीं बता पाए हैं। कुछ लोग उसे बांदा को तो कुछ हमीरपुर जिले का निवासी बता रहे हैं। थानाध्यक्ष पवन कुमार पटेल ने बताया कि एसटीएफ ने कार्रवाई में स्थानीय पुलिस से कोई मदद नहीं ली। छापा मारी में क्या बरामद हुआ और किसे पकड़ा गया है, उन्हें जानकारी नहीं है।
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मेडिकल स्टोरों पर बिक रहीं प्रतिबंधित दवाएं
कस्बे में संचालित मेडिकल स्टोरों पर प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है। लंबे समय से मेडिकल स्टोरों की जांच न होने से संचालकों के हौसले बुलंद हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई मेडिकल स्टोरों पर प्रतिबंधित दवाएं खुलेआम बेची जा रही हैं।
कस्बे में आधा सैकड़ा से अधिक मेडिकल स्टोर संचालित हैं। इनमें कई ऐसे मेडिकल स्टोर भी बताए जा रहे हैं जिनके लाइसेंस किसी अन्य व्यक्ति के नाम हैं, जबकि संचालन कोई और कर रहा है। आरोप है कि ऐसे प्रतिष्ठानों पर नियमों को ताक पर रखकर प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री की जाती है। लंबे समय से औषधि विभाग की ओर से कस्बे में जांच नहीं किए जाने से स्थिति और गंभीर होने की आशंका है।
बांदा के कोडीन सिरप कांड से जुड़े तार
तीन सितंबर को बांदा में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर प्रतिबंधित कोडीनयुक्त सिरप पकड़े जाने के बाद कस्बे में भी इस कारोबार को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले में पकड़े गए मुख्य आरोपी ने जिस फर्म के नाम पर माल मंगाए जाने की बात बताई है, उसके तार टेढ़ा गांव से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। बुधवार को एसटीएफ ने टेढ़ा में कार्रवाई कर मेडिकल स्टोर संचालक को हिरासत में लिया और दुकान से कुछ प्रतिबंधित दवाएं बरामद कीं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि बरामद होने वाला कोडीनयुक्त सिरप कस्बे और आसपास के क्षेत्र में भी खपाया जाना था। अब स्थानीय लोगों की नजर औषधि विभाग की कार्रवाई पर है कि मेडिकल स्टोरों की जांच कर प्रतिबंधित दवाओं के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जाती है या नहीं।
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तीन सितंबर को बांदा पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने बांदा के पुनाहुर गांव के पास बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर डीसीएम से 30 हजार सीसी कोडीनयुक्त सिरप बरामद की थी। मामले में बांदा के अतर्रा निवासी प्रियांशु उर्फ शिवम गुप्ता को मुख्य आरोपी बताया गया है। पूछताछ में बताया कि उसने अपने बहनोई रविंद्र गुप्ता के टेढ़ा स्थित ओम मेडिकल स्टोर के नाम से बिल कटवाकर यह माल मंगवाया था। अवैध सिरप को उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड क्षेत्र के विभिन्न जनपदों में खपाया जाना था।
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मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद से ही एसटीएफ रविंद्र गुप्ता की तलाश में जुटी थी। बुधवार देर शाम टीम ने टेढ़ा गांव स्थित ओम मेडिकल स्टोर पर छापा मारकर रविंद्र गुप्ता को पकड़ लिया और अपने साथ ले गई। छापे के दौरान दुकान से कुछ प्रतिबंधित दवाएं भी बरामद की गईं। पूर्व प्रधान सौरभ सिंह ने बताया कि जिस दुकान पर ओम मेडिकल स्टोर का बोर्ड लगा था, उसकी ओपनिंग तक नहीं हुई थी। दुकान का कारोबार कब से संचालित हो रहा था, इसकी जानकारी ग्रामीणों को नहीं है। छापा मारी के बाद दुकान के बाहर लगा बोर्ड भी फाड़ दिया गया। रविंद्र गुप्ता मूलरूप से कहां का निवासी है यह भी गांववासी स्पष्ट रूप से नहीं बता पाए हैं। कुछ लोग उसे बांदा को तो कुछ हमीरपुर जिले का निवासी बता रहे हैं। थानाध्यक्ष पवन कुमार पटेल ने बताया कि एसटीएफ ने कार्रवाई में स्थानीय पुलिस से कोई मदद नहीं ली। छापा मारी में क्या बरामद हुआ और किसे पकड़ा गया है, उन्हें जानकारी नहीं है।
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मेडिकल स्टोरों पर बिक रहीं प्रतिबंधित दवाएं
कस्बे में संचालित मेडिकल स्टोरों पर प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है। लंबे समय से मेडिकल स्टोरों की जांच न होने से संचालकों के हौसले बुलंद हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई मेडिकल स्टोरों पर प्रतिबंधित दवाएं खुलेआम बेची जा रही हैं।
कस्बे में आधा सैकड़ा से अधिक मेडिकल स्टोर संचालित हैं। इनमें कई ऐसे मेडिकल स्टोर भी बताए जा रहे हैं जिनके लाइसेंस किसी अन्य व्यक्ति के नाम हैं, जबकि संचालन कोई और कर रहा है। आरोप है कि ऐसे प्रतिष्ठानों पर नियमों को ताक पर रखकर प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री की जाती है। लंबे समय से औषधि विभाग की ओर से कस्बे में जांच नहीं किए जाने से स्थिति और गंभीर होने की आशंका है।
बांदा के कोडीन सिरप कांड से जुड़े तार
तीन सितंबर को बांदा में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर प्रतिबंधित कोडीनयुक्त सिरप पकड़े जाने के बाद कस्बे में भी इस कारोबार को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले में पकड़े गए मुख्य आरोपी ने जिस फर्म के नाम पर माल मंगाए जाने की बात बताई है, उसके तार टेढ़ा गांव से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। बुधवार को एसटीएफ ने टेढ़ा में कार्रवाई कर मेडिकल स्टोर संचालक को हिरासत में लिया और दुकान से कुछ प्रतिबंधित दवाएं बरामद कीं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि बरामद होने वाला कोडीनयुक्त सिरप कस्बे और आसपास के क्षेत्र में भी खपाया जाना था। अब स्थानीय लोगों की नजर औषधि विभाग की कार्रवाई पर है कि मेडिकल स्टोरों की जांच कर प्रतिबंधित दवाओं के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जाती है या नहीं।