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Hamirpur News: तालाब की जमीन पर बनीं, छह दुकानें होगीं जमींदोज

Sat, 01 Aug 2026 12:06 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 01 Aug 2026 12:06 AM IST
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Six shops built on pond land will be demolished
- दो जांच रिपोर्टों में विरोधाभास, हाईकोर्ट ने हटाने के दिए निर्देश
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संवाद न्यूज एजेंसी

हमीरपुर। नगर पंचायत कुरारा में तालाब की भूमि पर बन रही छह दुकानों का मामला अब प्रशासनिक जांच से निकलकर इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। वहां पर भी अधिवक्ता के मध्यम से बात स्पष्ट नहीं की गई। कोर्ट ने भी प्रथम दृष्टया तालाब की भूमि पर अतिक्रमण मानते हुए नगर पंचायत को निर्माण हटाने के निर्देश दिए हैं।

नगर पंचायत ने आय बढ़ाने के उद्देश्य से छह दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव स्वीकृत किया था। निर्माण शुरू होने पर वार्ड-9 निवासी, सांसद प्रतिनिधि एवं पूर्व चेयरमैन माया वाल्मीकि ने आरोप लगाया कि गाटा संख्या 2529 की तालाब दर्ज भूमि पर नियमों की अनदेखी कर दुकानें बनाई जा रही हैं। उन्होंने 15 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कराई।
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इसी दौरान मामला जनहित याचिका के रूप में इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान नगर पंचायत की ओर से पेश निर्देशों में स्वीकार किया गया कि निर्माण का एक हिस्सा तालाब की दर्ज भूमि पर है तथा यूपी राजस्व संहिता की धारा-67 के तहत कार्रवाई शुरू की गई है।
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हाईकोर्ट ने टिप्पणी की, कि जब नगर पंचायत स्वयं तालाब की भूमि पर अतिक्रमण स्वीकार कर रही है, तब उसके खिलाफ कार्रवाई की नौबत आना गंभीर विषय है। कोर्ट ने नगर पंचायत को गाटा संख्या 2529 पर किया गया निर्माण हटाने के निर्देश दिए। याचिका को नए सिरे से सूचीबद्ध करने के लिए 25 अगस्त 2026 तारीख निर्धारित की है।
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ईओ ने शिकायत को बताया निराधार, राजस्व जांच में आरोप सही

मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के निस्तारण की जिम्मेदारी नगर पंचायत के प्रभारी अधिशासी अधिकारी बलराम गुप्ता को सौंपी गई। ईओ ने अपनी रिपोर्ट में शिकायत को निराधार बताते हुए शिकायतकर्ता को गलत जानकारी देने का आरोप लगाया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने चार फरवरी को जिलाधिकारी से दोबारा शिकायत की।

डीएम के निर्देश पर एसडीएम ने नायब तहसीलदार की अध्यक्षता में जांच टीम गठित की। समिति ने राजस्व अभिलेखों और मौके का निरीक्षण किया। जांच में शिकायत के बिंदु सही पाए गए और निर्माण का कुछ हिस्सा तालाब की भूमि पर होने की पुष्टि हुई। विरोधाभासी रिपोर्ट सामने आने के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया।
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अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
एक ही मामले में नगर पंचायत और राजस्व विभाग की अलग-अलग जांच रिपोर्ट आने से अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। अब यह भी चर्चा का विषय है कि शिकायत को फर्जी बताने वाली रिपोर्ट किन तथ्यों के आधार पर तैयार की गई और क्या संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। आखिर वह कौन सा अफसर है, जिसके कहने पर प्रभारी ईओ ने जांच रिपोर्ट को प्रभावित किया। यह तमाम सवाल आज भी जांच के घेरे में है। प्रभारी ईओ का जिले से बाहर स्थानांतरण भी हो गया।
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