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Hamirpur News: यमुना पर रेलवे पुल तैयार, लाइन का दोहरीकरण का अधूरा
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फोटो 23 एचएएमपी 13- पत्योरा गांव स्थिति यमुना नदी पर बना समानांतर रेलवे पुल। संवाद
हमीरपुर। कानपुर-बांदा रेलवे लाइन पर यमुना साउथ बैंक पत्योरा में पुराने रेलवे पुल के समानांतर नए रेलवे पुल का 245 करोड़ से निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। पुल का करीब 95 फीसदी से अधिक कार्य पूरा कर लिया गया है। कार्यदायी संस्था दिसंबर 2026 तक इसे हैंडओवर करने की तैयारी में है। हालांकि अभी रेल लाइन के दोहरीकरण का कार्य अधूरा है। इसकी वजह से ट्रेनों की रफ्तार धीमी ही रहेगी।
रेलवे बोर्ड से कानपुर-बांदा रेल लाइन पर भीमसेन रेलवे स्टेशन से खैरार जंक्शन तक कुल 118 किमी लंबी रेलवे लाइन पर 1250 करोड़ से दोहरीकरण और यमुना नदी पर रेलवे पुल निर्माण कराए जाने की स्वीकृति वर्ष 2020 में मिली थी। नवंबर 2020 में टेंडर निकाले गए थे। परियोजना के तहत 245 करोड़ की लागत से यमुना नदी पर पुराने पुल के समानांतर नए रेलवे पुल का निर्माण कार्यदायी संस्था जीपीपी इंफ्रा प्रोजेक्ट लिमिटेड कोलकाता करा रही है। इसमें सीढ़ी इटारा स्टेशन के पास ओवरब्रिज, यमुना साउथ बैंक में अंडरपास, भरुआ सुमेरपुर में ओवरब्रिज, अकौना ओवरब्रिज आदि कार्य शामिल है।
हालांकि ओवरब्रिज व अंडरपास सहित दोहरीकरण का कुछ कार्य निर्माणाधीन होने से ट्रेनें अक्सर लेटलतीफ रहती हैं। यमुना साउथ बैंक स्टेशन से लेकर हमीरपुर रोड तक अभी दोहरीकरण का कार्य सहित ट्रायल होना बाकी है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक लाइन बिछाई जानी है। कई अंडरपास निर्माणाधीन हैं। इससे ट्रेनें 15-20 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गुजारी जाती हैं।
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118 वर्ष का सफर तय कर चुका पुराना पुल
यमुना-बेतवा नदी के संगम पर अंग्रेजी शासन काल में बना पुराना रेलवे पुल लगभग 118 वर्ष का सफर तय कर चुका है। ब्रिटिश हुकूमत के दौरान वर्ष 1908 में पुल का निर्माण कराया गया था। आज भी डेढ़ दर्जन से अधिक रेलगाड़ियों का इस पुल से आना-जाना है। पुल 100 साल की मियाद पूरी कर चुका है। रेलवे के अधिकारियों के अनुसार अंग्रेजों के जमाने का बना यह रेलवे पुल आज भी उतना ही मजबूत है। समय-समय पर इसका रख-रखाव किया जाता है।
916 मीटर लंबा है पुराना पुल
अंग्रेजों के शासन में बने पुल की लंबाई 916 मीटर है जबकि पिलर से पिलर की दूरी 250 फीट है। इसमें 12 पिलर बने हैं। इस रेल रूट पर प्रतिदिन करीब डेढ़ दर्जन मालगाड़ी व यात्री ट्रेनें गुजरती हैं। सीमेंट की जगह कच्ची ईंट और चूने से निर्मित पुल की कोठियां आज भी जस की तस खड़ी हैं। अभी पुल कितने वर्षों तक कार्य करेगा, इसकी घोषणा रेलवे ने नहीं की है। इसी की तर्ज पर नए पुल का निर्माण रेलवे की ओर से कराया गया है।
छह साल में पूरा हुआ नए पुल का निर्माण
कार्यदायी संस्था जीपीपी इंफ्रा पुल का निर्माण छह साल में पूरा कर पाई है। नवंबर 2020 में इसके टेंडर निकाले गए थे और नवंबर 2026 में इसके पूरा होने का दावा किया जा रहा है। दिसंबर में इसे रेलवे को हैंडओवर कर दिया जाएगा। अभी स्लीपर व रेल पटरी बिछाने सहित हल्का-फुल्का कार्य शेष है।
अधूरी परियोजना के चलते लेट रहती यह ट्रेनें
-चित्रकूट एक्सप्रेस लखनऊ से कानपुर सेंट्रल और बांदा होते हुए जबलपुर तक प्रतिदिन चलती है।
-बेतवा एक्सप्रेस कानपुर और बांदा के रास्ते दुर्ग/जबलपुर के बीच साप्ताहिक रूप से चलती है।
-लखनऊ-कानपुर और बांदा के रास्ते गरीब रथ एक्सप्रेस सप्ताह में दो दिन चलती है।
-मेमू और पैसेंजर ट्रेनें कानपुर और बांदा-चित्रकूट के बीच रोजाना सुबह-शाम चलती है।
-15-20 मालगाड़ियां सीमेंट, गिट्टी, कोयला आदि लेकर इस रूट से प्रतिदिन गुजरती हैं।
यमुना पुल का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। एक लेन तैयार कर स्लीपर बिछाने का कार्य किया जा रहा है। पटरियां दूसरी कंपनी बिछा रही है। आगामी दिसंबर तक इसे हैंडओवर करके ट्रायल कराया जाएगा। अभी पुराना पुल चालू रहेगा और नए पुल की एक लेन चालू की जाएगी। भविष्य में जरूरत पड़ने पर रेलवे पुल की दूसरी लेन तैयार की जाएगी। -आनंद सिंह, डिप्टी मैनेजर जीपीपी इंफ्रा रेलवे।
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रेलवे बोर्ड से कानपुर-बांदा रेल लाइन पर भीमसेन रेलवे स्टेशन से खैरार जंक्शन तक कुल 118 किमी लंबी रेलवे लाइन पर 1250 करोड़ से दोहरीकरण और यमुना नदी पर रेलवे पुल निर्माण कराए जाने की स्वीकृति वर्ष 2020 में मिली थी। नवंबर 2020 में टेंडर निकाले गए थे। परियोजना के तहत 245 करोड़ की लागत से यमुना नदी पर पुराने पुल के समानांतर नए रेलवे पुल का निर्माण कार्यदायी संस्था जीपीपी इंफ्रा प्रोजेक्ट लिमिटेड कोलकाता करा रही है। इसमें सीढ़ी इटारा स्टेशन के पास ओवरब्रिज, यमुना साउथ बैंक में अंडरपास, भरुआ सुमेरपुर में ओवरब्रिज, अकौना ओवरब्रिज आदि कार्य शामिल है।
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हालांकि ओवरब्रिज व अंडरपास सहित दोहरीकरण का कुछ कार्य निर्माणाधीन होने से ट्रेनें अक्सर लेटलतीफ रहती हैं। यमुना साउथ बैंक स्टेशन से लेकर हमीरपुर रोड तक अभी दोहरीकरण का कार्य सहित ट्रायल होना बाकी है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक लाइन बिछाई जानी है। कई अंडरपास निर्माणाधीन हैं। इससे ट्रेनें 15-20 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गुजारी जाती हैं।
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118 वर्ष का सफर तय कर चुका पुराना पुल
यमुना-बेतवा नदी के संगम पर अंग्रेजी शासन काल में बना पुराना रेलवे पुल लगभग 118 वर्ष का सफर तय कर चुका है। ब्रिटिश हुकूमत के दौरान वर्ष 1908 में पुल का निर्माण कराया गया था। आज भी डेढ़ दर्जन से अधिक रेलगाड़ियों का इस पुल से आना-जाना है। पुल 100 साल की मियाद पूरी कर चुका है। रेलवे के अधिकारियों के अनुसार अंग्रेजों के जमाने का बना यह रेलवे पुल आज भी उतना ही मजबूत है। समय-समय पर इसका रख-रखाव किया जाता है।
916 मीटर लंबा है पुराना पुल
अंग्रेजों के शासन में बने पुल की लंबाई 916 मीटर है जबकि पिलर से पिलर की दूरी 250 फीट है। इसमें 12 पिलर बने हैं। इस रेल रूट पर प्रतिदिन करीब डेढ़ दर्जन मालगाड़ी व यात्री ट्रेनें गुजरती हैं। सीमेंट की जगह कच्ची ईंट और चूने से निर्मित पुल की कोठियां आज भी जस की तस खड़ी हैं। अभी पुल कितने वर्षों तक कार्य करेगा, इसकी घोषणा रेलवे ने नहीं की है। इसी की तर्ज पर नए पुल का निर्माण रेलवे की ओर से कराया गया है।
छह साल में पूरा हुआ नए पुल का निर्माण
कार्यदायी संस्था जीपीपी इंफ्रा पुल का निर्माण छह साल में पूरा कर पाई है। नवंबर 2020 में इसके टेंडर निकाले गए थे और नवंबर 2026 में इसके पूरा होने का दावा किया जा रहा है। दिसंबर में इसे रेलवे को हैंडओवर कर दिया जाएगा। अभी स्लीपर व रेल पटरी बिछाने सहित हल्का-फुल्का कार्य शेष है।
अधूरी परियोजना के चलते लेट रहती यह ट्रेनें
-चित्रकूट एक्सप्रेस लखनऊ से कानपुर सेंट्रल और बांदा होते हुए जबलपुर तक प्रतिदिन चलती है।
-बेतवा एक्सप्रेस कानपुर और बांदा के रास्ते दुर्ग/जबलपुर के बीच साप्ताहिक रूप से चलती है।
-लखनऊ-कानपुर और बांदा के रास्ते गरीब रथ एक्सप्रेस सप्ताह में दो दिन चलती है।
-मेमू और पैसेंजर ट्रेनें कानपुर और बांदा-चित्रकूट के बीच रोजाना सुबह-शाम चलती है।
-15-20 मालगाड़ियां सीमेंट, गिट्टी, कोयला आदि लेकर इस रूट से प्रतिदिन गुजरती हैं।
यमुना पुल का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। एक लेन तैयार कर स्लीपर बिछाने का कार्य किया जा रहा है। पटरियां दूसरी कंपनी बिछा रही है। आगामी दिसंबर तक इसे हैंडओवर करके ट्रायल कराया जाएगा। अभी पुराना पुल चालू रहेगा और नए पुल की एक लेन चालू की जाएगी। भविष्य में जरूरत पड़ने पर रेलवे पुल की दूसरी लेन तैयार की जाएगी। -आनंद सिंह, डिप्टी मैनेजर जीपीपी इंफ्रा रेलवे।

फोटो 23 एचएएमपी 13- पत्योरा गांव स्थिति यमुना नदी पर बना समानांतर रेलवे पुल। संवाद