{"_id":"58582e404f1c1b1e64e396b6","slug":"people-were-dying-to-pay-after-41th-day","type":"story","status":"publish","title_hn":"41वें दिन भी पैसे को तरस रहे लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
41वें दिन भी पैसे को तरस रहे लोग
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 20 Dec 2016 12:30 AM IST
सार
नोटबंदी के चलते प्रबंधकों पर मुंहदेखी भुगतान का आरोप
विज्ञापन
बैंक में पैसों के लिए अफरा-तफरी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हमीरपुर के गहरौली इमिलिया इलाहाबाद बैंक में 41वें दिन बाद भी सैकड़ाें लोग भुगतान के लिए परेशान घूम रहे हैं। लोगों का आरोप लगाया कि शाखा प्रबंधक मुंह देखकर अपने चहेतों को भुगतान कर रहे हैं। उधर गहरौली में इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक में महज दो घंटे में ही कैश समाप्त हो गया। जिससे लोगों को मायूस हाथ लगी।
इमिलिया गांव स्थित इलाहाबाद बैंक में मसगांव, इमिलिया, टीहर, हुसैना, तगारी, गहरौली सहित एक दर्जन गांवों के लोग इस बैंक से खातों में लेनदेन करते हैं। नोटबंदी की घोषणा के बाद इन गांवों के लोगों ने अपने पुराने नोट बैंक में जमा कर दिए थे और अब रुपये निकालने के लिए खासे परेशान घूम रहे हैं। ऐसे लोगों का आरोप है कि शाखा प्रबंधक अपने चहेतों को भुगतान कर रहे हैं।
मसगांव निवासी विद्या सागर, सुखदेव, रंजीत एवं इमिलिया निवासी जमुनादास, रमेश, जितेंद्र सिंह, सत्ती चौरसिया व हुसैना निवासी कामता प्रसाद, बीरेंद्र कुमार, रामनरेश आदि ने बताया कि 40 दिनों में बैंक से एक भी रुपये नहीं मिला है। इमिलिया गांव में कैश निकालने आए टीहर गांव के रामसेवक ने आरोप लगाया कि उसके सामने एक बजे कैश लेकर गाड़ी आई है। लेकिन, दो बजे कैश बांटना बंद कर दिया है। कहा कि बैंक वाले ही गड़बड़ी कर रहे हैं। इसीलिए लोगों को परेशानी हो रही है।
विज्ञापन
इस बारे में इमिलिया शाखा प्रबंधक महेशचंद्र ने बताया कि जो पहले आकर लाइन में लगेगा, वह भुगतान प्राप्त करेगा। जिस हिसाब से कैश मिलता है, उसके अनुसार सभी को थोड़ा-थोड़ा दे दिया जाता है। वहीं, गहरौली के इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक में सोमवार को मात्र दो घंटे कैश बांटा गया। कैश खत्म हो जाने के कारण सैकड़ों लोग मायूस होकर लौट गए। शाखा प्रबंधक किशनलाल यादव ने बताया कि शनिवार की जो धनराशि बैंक में शेष बची थी। वह लोगों को दे दी गई। सोमवार को कोई कैश नहीं आया। मंगलवार को कैश आने पर भुगतान किया जाएगा।
विज्ञापन
इमिलिया गांव स्थित इलाहाबाद बैंक में मसगांव, इमिलिया, टीहर, हुसैना, तगारी, गहरौली सहित एक दर्जन गांवों के लोग इस बैंक से खातों में लेनदेन करते हैं। नोटबंदी की घोषणा के बाद इन गांवों के लोगों ने अपने पुराने नोट बैंक में जमा कर दिए थे और अब रुपये निकालने के लिए खासे परेशान घूम रहे हैं। ऐसे लोगों का आरोप है कि शाखा प्रबंधक अपने चहेतों को भुगतान कर रहे हैं।
विज्ञापन
मसगांव निवासी विद्या सागर, सुखदेव, रंजीत एवं इमिलिया निवासी जमुनादास, रमेश, जितेंद्र सिंह, सत्ती चौरसिया व हुसैना निवासी कामता प्रसाद, बीरेंद्र कुमार, रामनरेश आदि ने बताया कि 40 दिनों में बैंक से एक भी रुपये नहीं मिला है। इमिलिया गांव में कैश निकालने आए टीहर गांव के रामसेवक ने आरोप लगाया कि उसके सामने एक बजे कैश लेकर गाड़ी आई है। लेकिन, दो बजे कैश बांटना बंद कर दिया है। कहा कि बैंक वाले ही गड़बड़ी कर रहे हैं। इसीलिए लोगों को परेशानी हो रही है।
विज्ञापन
इस बारे में इमिलिया शाखा प्रबंधक महेशचंद्र ने बताया कि जो पहले आकर लाइन में लगेगा, वह भुगतान प्राप्त करेगा। जिस हिसाब से कैश मिलता है, उसके अनुसार सभी को थोड़ा-थोड़ा दे दिया जाता है। वहीं, गहरौली के इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक में सोमवार को मात्र दो घंटे कैश बांटा गया। कैश खत्म हो जाने के कारण सैकड़ों लोग मायूस होकर लौट गए। शाखा प्रबंधक किशनलाल यादव ने बताया कि शनिवार की जो धनराशि बैंक में शेष बची थी। वह लोगों को दे दी गई। सोमवार को कोई कैश नहीं आया। मंगलवार को कैश आने पर भुगतान किया जाएगा।