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धान की पकी फसल में बारिश का पानी भरा रहने से हुई खराब
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जखेला गांव में धान की छंटाई करते किसान
- फोटो : HAMIRPUR
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कुरारा (हमीरपुर)। क्षेत्र में धान की फसल पैदा करने वाले किसान मौसम देखकर परेशान हैं। धान की फसल की छंटाई करने पर उनकी लागत भी नहीं निकल रही है।
क्षेत्र के कुरारा, जखेला, रिठारी, चकोठी, पारा, कंडौर, मलहरा, कुसौली पुरवा, डामर, भैसापाली आदि गांवों की जमीन काली मिट्टी (मार) होने के साथ गहरी है। किसान पिछले सितंबर माह में हुई जोरदार बारिश से धान की फसल में पानी भरा रहने खराब हुई है। अब धान की पकी खड़ी फसल में बारिश का पानी भरा रहने से नुकसान हो रहा है। किसान खेतों में धान लगाकर निराश हैं।
अवधेश कुमार ने बताया कि 18 बीघा खेत एक साल के लिए 1 लाख 10 हजार में बलकट (ठेका) पर लेकर धान की फसल की है। इसमें मात्र 54 क्विंटल धान निकला है। पैदावार कम होने से लागत ही निकल पा रही है। जिससे धान की खेती से किसानों का मोहभंग हो गया है।
जयराम प्रजापति ने बताया कि आठ बीघे में धान फसल की रोपाई की। दो हजार रुपये प्रति बीघा का खर्च व खाद, दवा के साथ ढाई हजार रुपये बीघा कटाई व छंटाई में खर्च हुआ। एक बीघे में करीब आठ हजार खर्च आने के बाद पैदावार मात्र तीन क्विंटल होने से उनकी लागत नहीं निकल पा रही है।
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क्षेत्र के कुरारा, जखेला, रिठारी, चकोठी, पारा, कंडौर, मलहरा, कुसौली पुरवा, डामर, भैसापाली आदि गांवों की जमीन काली मिट्टी (मार) होने के साथ गहरी है। किसान पिछले सितंबर माह में हुई जोरदार बारिश से धान की फसल में पानी भरा रहने खराब हुई है। अब धान की पकी खड़ी फसल में बारिश का पानी भरा रहने से नुकसान हो रहा है। किसान खेतों में धान लगाकर निराश हैं।
अवधेश कुमार ने बताया कि 18 बीघा खेत एक साल के लिए 1 लाख 10 हजार में बलकट (ठेका) पर लेकर धान की फसल की है। इसमें मात्र 54 क्विंटल धान निकला है। पैदावार कम होने से लागत ही निकल पा रही है। जिससे धान की खेती से किसानों का मोहभंग हो गया है।
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जयराम प्रजापति ने बताया कि आठ बीघे में धान फसल की रोपाई की। दो हजार रुपये प्रति बीघा का खर्च व खाद, दवा के साथ ढाई हजार रुपये बीघा कटाई व छंटाई में खर्च हुआ। एक बीघे में करीब आठ हजार खर्च आने के बाद पैदावार मात्र तीन क्विंटल होने से उनकी लागत नहीं निकल पा रही है।
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