{"_id":"5845b5cb4f1c1bf95944833d","slug":"notbandi-dull-the-sweetness-of-molasses","type":"story","status":"publish","title_hn":"नोटबंदी से फीकी गुड़ की मिठास ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नोटबंदी से फीकी गुड़ की मिठास
ब्यूरो, अमर उजाला हमीरपुर
Updated Tue, 06 Dec 2016 12:15 AM IST
विज्ञापन
राठ के गल्ला मंडी में गुड़ बेंचने के लिए ट्रैक्टर पर बैठा किसान।
- फोटो : Amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोटबंदी ने यहां के मशहूर गुड़ की मिठास भी फीकी कर दी है। पुराने नोट चलन से बाहर होने पर किसानों को बड़ा झटका लगा है। गुड़ व्यापारी नए नोट देकर मनमाने दामों पर किसानों का गुड़ खरीद रहे हैं। बुंदेलखंड के राठ क्षेत्र की कुल 2468 हेक्टेयर जमीन के 15 फीसदी क्षेत्रफल में किसान गन्ने की खेती कर रहे हैं। गन्ना पैदा करने वाले किसान रात-दिन एक करके गन्ने के रस से गुड़ तैयार करने में जुटे हैं।
विज्ञापन
क्षेत्र में बनने वाला गुड़ मप्र, मुंबई, दिल्ली आदि प्रांतों में जाता है। इस गुड़ की ऐसी मिठास है कि मुंह में डालते ही अपने आप घुल जाता है। लेकिन इस साल नोटबंदी से गुड़ उद्योग पूरी तरह चौपट हो गया है। मंडी में गुड़ बेचने के लिए आने वाले किसान सारा दिन ट्रैक्टर लिए खडे़ रहते हैं। व्यापारी भी इसका खूब फायदा उठा रहे हैं। इससे गुड़ बनाने वाले किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। गुड़ न बिक पाने से किसान अन्य फसलों के लिए खाद-बीज भी नहीं खरीद पा रहा है।
विज्ञापन
नोट बंदी ने तोड़ी किसानों की कमर
बिलरख निवासी सीताराम ने बताया कि नोटबंदी ने तो कमर ही तोड़ दी है। जो माल 2600 रुपये प्रति कुंतल में बिकता था, वह आज व्यापारी 2200 से 2300 रुपये में खरीद रहे हैं। नोटबंदी से व्यापारी से अगर पुराना नोट लेते हैं तो माल की अच्छी कीमत मिलती है। नए नोट लेने पर औने-पौने दाम पर माल बेचना पड़ता है।
विज्ञापन
नोट बंदी से माल की कीमत हुई कम
कस्बे की मंडी में गुड़ बेचने आए बहपुर गांव के किसान वीरपाल ने बताया कि उसने चार बीघा में इस साल गन्ना बोया था। अच्छी बरसात से गन्ने में ठीक ठाक रस निकल रहा है। उत्पादन भी अच्छा है। लेकिन नोटबंदी से 2200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गुड़ व्यापारी ले रहे हैं। नुकसान होने के बाद भी माल बेचना पड़ रहा है।
रुपये न होने से हो रही समस्या
गुड़ व्यापारी पप्पू साहू का कहना है कि बैंक से नई करेंसी नहीं मिल रही है। पचास हजार की चेक लगाने पर बैंक मात्र बीस हजार रुपये का भुगतान कर रहा है। किसानों को तो अच्छा रेट चाहिए और नए नोट। नए नोटों की समस्या से हर कोई जूझ रहा है। इसलिए जितने रुपये हैं, उसी हिसाब से माल खरीद रहे हैं।