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राष्ट्रीय वृहद लोक अदालत में उमड़े वादकारी
अमर उजाला ब्यूरो, हमीरपुर
Updated Sat, 06 Dec 2014 11:52 PM IST
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जिला जजी परिसर में राष्ट्रीय वृहद लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिसका शुभारंभ जिला जज श्रीमती सुशीला सिंह ने किया। इस मौके पर सबसे अधिक मामले बैंकों से संबंधित निपटाए गए।
इसके साथ ही भारत दूरसंचार निगम ने भी पुराने बिलों का समायोजन कर लोगों को राहत प्रदान की।
शनिवार को उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर स्थानीय जिला जजी परिसर में राष्ट्रीय वृहद लोक अदालत का आयोजन हुआ। जिला जज ने न्यायालय परिसर में लगाए गए विभिन्न विभागों के अधिकारियों से वादियों को ज्यादा से ज्यादा लाभ पहुंचाने के लिए निर्देशित किया।
उन्होंने प्रत्येक काउंटर पर पहुंचकर वादकारियों से समस्याएं जानी और नियमानुसार उनके मामलों को निस्तारित करने के लिए कहा। बैंक ऋणों के समझौते में शिकायतें मिलने पर वह मौके पर पहुंची और बैंक अधिकारियों से नाराजगी जताते हुए ऋण धारकों को अधिक लाभ पहुंचाने के लिए निर्देशित किया।
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स्टेट बैंक के किसी शाखा प्रबंधक द्वारा लैपटॉप या कंप्यूटर आदि की व्यवस्था न करने पर फटकार लगाई। वहीं दीवानी न्यायालय में उप संभागीय परिवहन विभाग ने काउंटर लगाया।
वहां से लोगों को राहत न मिलने व एक सिपाही को काउंटर पर बैठाए जाने की शिकायत कुछ पीड़ितों ने जिला जज से की। जिस पर वह मौके पर पहुंचकर पीटीओ अमित वर्मा से नाराजगी जताई और ज्यादा से ज्यादा मामले निपटाने को निर्देशित किया। न्यायिक अधिकारियों ने लंबित मामलों को निपटाया। वहीं पैरालीगल वालेंटियर्स मुनीर खान, गणेश सिंह विद्यार्थी, राजेंद्र निगम, ज्योति सिंह, राहिला, शहनाज, रमाशंकर सचान सहित अन्य लोक अदालत में लोगाें को जानकारियां देते रहे। न्यूलीबांसा निवासी स्टेट बैंक के कर्जदार बीरपाल का कहना है कि बैंक द्वारा भेजी गई नोटिस में 30 प्रतिशत धन जमा करना नही दर्शाया गया है। जिससे वह बिना धनराशि लिए समझौते के लिए आ गया। कहा अधिकारियों ने उसकी बात नहीं सुनी।
रामाधीन निवासी न्यूलीबांसा ने बताया कि उसने ट्रैक्टर के लिए एसबीआई राठ से कर्ज लिया था। जिसकी नोटिस मिली। जिस पर वह लोक अदालत में समझौते के लिए आया। लेकिन बैंक अधिकारियों की मनमानी व कोई गाइड लाइन न होने से उसे वापस आना पड़ा।
भाकियू के मंडलीय उपाध्यक्ष भगवानदास दीक्षित ने बताया कि ग्रामीण बैंक , इलाहाबाद बैंक के अधिकारी लैपटॉप लेकर आए। लेकिन एसबीआई के अधिकारी बिना लैपटॉप या कंप्यूटर के पहुंचे। जिस पर किसानों के सुलह समझौते मौके पर नहीं हो सके । ऋणधारकों को बैंकों में भेजकर लोन का विवरण मंगाते रहे।
राष्ट्रीय लोक अदालत में कुटुंब न्यायालय पर आपसी सुलह समझौते से पांच बिछड़े हुए दंपतियों को मिलाने का काम किया। यह सभी दंपति आपस में मिलने के बाद खुशी-खुशी अपने घरों के लिए रवाना हो गए।
लोक अदालत में कुटुंब न्यायालय में मामलों की सुनवाई की गई। जिसमें रामसखी पत्नी राकेश का मिलन हुआ। इसके साथ ही रिजवाना व फिरोज, कपूरी व प्रमोद कुमार, रीना व रमेश तथा शबानाबानो व बबलू उर्फ सगीर का आपसी सुलह समझौते से मामले का निपटारा किया गया।
इन सभी दंपतियों को जिला जज श्रीमती सुशीला सिंह ने आपसी गिले शिकवे मिटाकर जीवन सुखमय बिताने के लिए कहा।
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इसके साथ ही भारत दूरसंचार निगम ने भी पुराने बिलों का समायोजन कर लोगों को राहत प्रदान की।
शनिवार को उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर स्थानीय जिला जजी परिसर में राष्ट्रीय वृहद लोक अदालत का आयोजन हुआ। जिला जज ने न्यायालय परिसर में लगाए गए विभिन्न विभागों के अधिकारियों से वादियों को ज्यादा से ज्यादा लाभ पहुंचाने के लिए निर्देशित किया।
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उन्होंने प्रत्येक काउंटर पर पहुंचकर वादकारियों से समस्याएं जानी और नियमानुसार उनके मामलों को निस्तारित करने के लिए कहा। बैंक ऋणों के समझौते में शिकायतें मिलने पर वह मौके पर पहुंची और बैंक अधिकारियों से नाराजगी जताते हुए ऋण धारकों को अधिक लाभ पहुंचाने के लिए निर्देशित किया।
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स्टेट बैंक के किसी शाखा प्रबंधक द्वारा लैपटॉप या कंप्यूटर आदि की व्यवस्था न करने पर फटकार लगाई। वहीं दीवानी न्यायालय में उप संभागीय परिवहन विभाग ने काउंटर लगाया।
वहां से लोगों को राहत न मिलने व एक सिपाही को काउंटर पर बैठाए जाने की शिकायत कुछ पीड़ितों ने जिला जज से की। जिस पर वह मौके पर पहुंचकर पीटीओ अमित वर्मा से नाराजगी जताई और ज्यादा से ज्यादा मामले निपटाने को निर्देशित किया। न्यायिक अधिकारियों ने लंबित मामलों को निपटाया। वहीं पैरालीगल वालेंटियर्स मुनीर खान, गणेश सिंह विद्यार्थी, राजेंद्र निगम, ज्योति सिंह, राहिला, शहनाज, रमाशंकर सचान सहित अन्य लोक अदालत में लोगाें को जानकारियां देते रहे। न्यूलीबांसा निवासी स्टेट बैंक के कर्जदार बीरपाल का कहना है कि बैंक द्वारा भेजी गई नोटिस में 30 प्रतिशत धन जमा करना नही दर्शाया गया है। जिससे वह बिना धनराशि लिए समझौते के लिए आ गया। कहा अधिकारियों ने उसकी बात नहीं सुनी।
रामाधीन निवासी न्यूलीबांसा ने बताया कि उसने ट्रैक्टर के लिए एसबीआई राठ से कर्ज लिया था। जिसकी नोटिस मिली। जिस पर वह लोक अदालत में समझौते के लिए आया। लेकिन बैंक अधिकारियों की मनमानी व कोई गाइड लाइन न होने से उसे वापस आना पड़ा।
भाकियू के मंडलीय उपाध्यक्ष भगवानदास दीक्षित ने बताया कि ग्रामीण बैंक , इलाहाबाद बैंक के अधिकारी लैपटॉप लेकर आए। लेकिन एसबीआई के अधिकारी बिना लैपटॉप या कंप्यूटर के पहुंचे। जिस पर किसानों के सुलह समझौते मौके पर नहीं हो सके । ऋणधारकों को बैंकों में भेजकर लोन का विवरण मंगाते रहे।
राष्ट्रीय लोक अदालत में कुटुंब न्यायालय पर आपसी सुलह समझौते से पांच बिछड़े हुए दंपतियों को मिलाने का काम किया। यह सभी दंपति आपस में मिलने के बाद खुशी-खुशी अपने घरों के लिए रवाना हो गए।
लोक अदालत में कुटुंब न्यायालय में मामलों की सुनवाई की गई। जिसमें रामसखी पत्नी राकेश का मिलन हुआ। इसके साथ ही रिजवाना व फिरोज, कपूरी व प्रमोद कुमार, रीना व रमेश तथा शबानाबानो व बबलू उर्फ सगीर का आपसी सुलह समझौते से मामले का निपटारा किया गया।
इन सभी दंपतियों को जिला जज श्रीमती सुशीला सिंह ने आपसी गिले शिकवे मिटाकर जीवन सुखमय बिताने के लिए कहा।