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अनमोल के फूटे बोल, परिजनों की मायूसी टूटी

Mon, 30 Aug 2021 10:17 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 30 Aug 2021 10:17 PM IST
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हमीरपुर। अनमोल के जन्म पर घर खुशियों से भर गया था, लेकिन जैसे-जैसे घर वालों को एहसास हुआ अनमोल बोल और सुन नहीं सकता। इसकी डॉक्टरों की पुष्टि के बाद परिजन मायूस हो गए। कुछ समय बाद पता चला कि इसका इलाज संभव है तो घर वालों को बड़ी राहत मिली। ऐसी ही कहानी कीर्ति मिश्रा की भी है।
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शहर के कुछेछा निवासी विनोद कुमार पेशे से चालक हैं, उनके दो पुत्रों में अनमोल सबसे बड़ा है, जब वह ढाई साल का हुआ तो परिजनों को इस बात का एहसास हुआ कि अनमोल सुन नहीं पाता। इसकी वजह से बोलने में भी अक्षम है। यह कैसे हुआ, किसी को कुछ पता नहीं था। लेकिन इस दुख ने परिजनों की परेशानी बढ़ा दी। डॉक्टरों ने भी इसकी पुष्टि कर दी। इसी बीच राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के माध्यम से उसके उपचार का रास्ता भी निकल आया। विनोद ने बताया दिसंबर 2020 में अनमोल की कानपुर में सर्जरी हुई।
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लगातार वह उसे कानपुर ले जाकर डॉक्टरों को दिखाते रहे। ऑपरेशन हुआ तो अनमोल सुनने लगा है और धीरे-धीरे मुंह से बोल भी फूटने लगे हैं। परिजन इससे बेहद खुश हैं। इसी तरह राठ के चौपरा रोड मुगलपुरा निवासी अनूप कुमार मिश्रा की पुत्री कीर्ति भी जन्म से मूकबधिर थी। पिता बताते हैं ढाई साल गुजरने के बाद इसका पता चला। जिसके बाद राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य विभाग की टीम की मदद से मार्च 2020 में कीर्ति की सर्जरी हुई और आज वह बोलने और सुनने लगी है।
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1000 नवजात में एक होता मूकबधिर
नोडल अधिकारी डॉ. आरके यादव ने बताया आरबीएसके की ओर से जन्मजात मूकबधिर बच्चों का निशुल्क उपचार कराया जाता है। मूकबधिर चार बच्चों की कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी होने पर नतीजे अच्छे आए हैं। बताया प्रति एक हजार में एक नवजात इस बीमारी का शिकार होता है। समय पर पहचान और तुरंत सर्जरी ही गूंगे व बहरेपन का सही इलाज है। कानपुर के डॉ. एसएन मेहरोत्रा मेमोरियल ईएनटी (कान, नाक एवं गला) फाउंडेशन और केजीएमयू लखनऊ में इसका निशुल्क उपचार होता है।
क्या है कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी
आरबीएसके टीम मौदहा के डॉ. शार्दुल शुक्ला ने बताया कॉकलियर एक बेहद संवेदनशील यंत्र (डिवाइस) होता है, जिसको ऑपरेशन के माध्यम से लगाया जाता है। मरीज को 2-3 दिन में अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है। ऑपरेशन की सफलता डॉक्टर, अस्पताल की सुविधाओं तथा इम्प्लांट करने की सर्जिकल तकनीक पर ज्यादा निर्भर करती है।

2020 में चार बच्चों की हुई सर्जरी
आरबीएसके के डीईआईसी मैनेजर गौरीश राज पाल ने बताया अनमोल, कीर्ति के अलावा गहरौली खुर्द निवासी बृजेश कुमार की पुत्री सुप्रिया व सिचौली निवासी अजीत सिंह के पुत्र अंश की भी 2020 में सर्जरी कराई गई है। फरवरी 2020 में टीबी अस्पताल सभागार में कैंप लगाकर बच्चों की जांच हुई थी, जिसमें 54 बच्चे मूकबधिर मिले थे। इनमें 6 बच्चे ऐसे थे, जिनकी कॉकलियर इम्प्लांट सर्जरी हो सकती थी। इनमें चार बच्चों की वर्ष 2020 में अलग-अलग तिथियों में सर्जरी कराई गई। कहा अगर किसी बच्चे में ऐसे लक्षण हैं तो परिजनों को तत्काल निकटवर्ती सरकारी अस्पताल में संपर्क करना चाहिए।
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