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सुरक्षित प्रसव के लिए सिखाए जाएंगे गुर
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सुरक्षित प्रसव के सिखाए गुर
मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने के 21 दिवसीय प्रशिक्षण शुरू
प्रसव में आने वाली जटिलताओं पर जानकारी दी
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से 21 दिवसीय प्रशिक्षण शुरू किया गया है। इसमें स्टाफ नर्सों और आयुष मेडिकल अफसरों को सुरक्षित प्रसव के लिए गुर सिखाए गए।
सीएमओ डॉ.एके रावत ने कहा कि मातृ-शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर ले जाना है। जनपद की स्थिति इस मामले में बेहतर हुई है। मगर सुधार की गुंजाइश अभी भी है। कहा कि आने वाली प्रसूताओं के साथ अच्छा बर्ताव करें।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.पीके सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों को सजग होकर जिम्मेदारी निभाना है, ताकि मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सके। प्रशिक्षण के पहले दिन जिला महिला अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ.आशा सचान ने स्टाफ नर्सों और आयुष मेडिकल अफसरों को प्रसव के दौरान उत्पन्न होने वाली जटिलताओं की जानकारी देकर बचाव के तरीके बताए। मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता दीपक यादव ने बताया कि प्रशिक्षण 21 दिन तक चलेगा। पहले पांच दिन थ्योरी होगी और इसके बाद 16 दिनों तक चार-चार के बैच में फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) में प्रसव के दौरान उत्पन्न होने वाली जटिलताओं के विषय में प्रशिक्षित किया जाएगा।
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मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने के 21 दिवसीय प्रशिक्षण शुरू
प्रसव में आने वाली जटिलताओं पर जानकारी दी
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से 21 दिवसीय प्रशिक्षण शुरू किया गया है। इसमें स्टाफ नर्सों और आयुष मेडिकल अफसरों को सुरक्षित प्रसव के लिए गुर सिखाए गए।
सीएमओ डॉ.एके रावत ने कहा कि मातृ-शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर ले जाना है। जनपद की स्थिति इस मामले में बेहतर हुई है। मगर सुधार की गुंजाइश अभी भी है। कहा कि आने वाली प्रसूताओं के साथ अच्छा बर्ताव करें।
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अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.पीके सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों को सजग होकर जिम्मेदारी निभाना है, ताकि मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सके। प्रशिक्षण के पहले दिन जिला महिला अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ.आशा सचान ने स्टाफ नर्सों और आयुष मेडिकल अफसरों को प्रसव के दौरान उत्पन्न होने वाली जटिलताओं की जानकारी देकर बचाव के तरीके बताए। मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता दीपक यादव ने बताया कि प्रशिक्षण 21 दिन तक चलेगा। पहले पांच दिन थ्योरी होगी और इसके बाद 16 दिनों तक चार-चार के बैच में फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) में प्रसव के दौरान उत्पन्न होने वाली जटिलताओं के विषय में प्रशिक्षित किया जाएगा।
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