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सिविल सर्वे एलाएमेंट टीम ने कचीर घाट का सर्वे किया
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हमीरपुर। मझगवां के निकट धसान नदी में कचीर घाट पर पुल निर्माण के लिए सर्वे प्रक्रिया तेज हो गई है। रविवार को लखनऊ से आई सिविल सर्वे एलायमेंट की टीम ने निरीक्षण किया। लेखपालों को डिजिटल नक्शा तैयार करने के निर्देश दिए।
राठ-मझगवां-गुरसराय चिरगांव राज्यमार्ग-42 के बीच मझगवां में धसान नदी पर पुल नहीं है। दो दर्जन गांवों के लोगों को झांसी क्षेत्र जाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। लोगों की परेशानी को देखते हुए 9 फरवरी 1987 में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व.बीरबहादुर सिंह ने इस नदी के कचीर घाट पर पुल निर्माण की आधारशिला रखी थी। इसके बाद किसी भी सरकार ने पुल निर्माण की सुध नहीं ली।
पुल निर्माण के लिए कोर्ट में याचिका दायर करने वाले सुखदयाल राठौर ने बताया कि उन्होंने विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह के संज्ञान में मामला लाया। इसके बाद कुंवर मानवेंद्र सिंह व प्रधान मझगवां नीता सिंह के प्रयास से ग्रामीणों का सपना साकार होते दिख रहा है। पिछले बुधवार को सेतु निगम व लोनिवि की टीम ने पुल के लिए रास्ते की नापजोख की थी।
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रविवार को सिविल सर्वेयर एलायमेंट लखनऊ के फूल कुमार वर्मा अपनी टीम के साथ पहुंचे। लेखपालों से जमीन की नापजोख कराई। उन्होंने बताया कि करीब दस हेक्टेयर भूमि वन विभाग की मिली है। वहीं कुछ जमीन किसानों की भी आ रही है। लेखपालों को जमीन की सूची तैयार कर जल्द उपलब्ध कराने के निदेश दिए हैं।
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राठ-मझगवां-गुरसराय चिरगांव राज्यमार्ग-42 के बीच मझगवां में धसान नदी पर पुल नहीं है। दो दर्जन गांवों के लोगों को झांसी क्षेत्र जाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। लोगों की परेशानी को देखते हुए 9 फरवरी 1987 में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व.बीरबहादुर सिंह ने इस नदी के कचीर घाट पर पुल निर्माण की आधारशिला रखी थी। इसके बाद किसी भी सरकार ने पुल निर्माण की सुध नहीं ली।
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पुल निर्माण के लिए कोर्ट में याचिका दायर करने वाले सुखदयाल राठौर ने बताया कि उन्होंने विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह के संज्ञान में मामला लाया। इसके बाद कुंवर मानवेंद्र सिंह व प्रधान मझगवां नीता सिंह के प्रयास से ग्रामीणों का सपना साकार होते दिख रहा है। पिछले बुधवार को सेतु निगम व लोनिवि की टीम ने पुल के लिए रास्ते की नापजोख की थी।
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रविवार को सिविल सर्वेयर एलायमेंट लखनऊ के फूल कुमार वर्मा अपनी टीम के साथ पहुंचे। लेखपालों से जमीन की नापजोख कराई। उन्होंने बताया कि करीब दस हेक्टेयर भूमि वन विभाग की मिली है। वहीं कुछ जमीन किसानों की भी आ रही है। लेखपालों को जमीन की सूची तैयार कर जल्द उपलब्ध कराने के निदेश दिए हैं।