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जिले को मिले पांच चिकित्सक अभी 64 की और जरूरत
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हमीरपुर। जिले को पांच डॉक्टर मिले हैं। इनकी अलग-अलग सीएचसी में तैनाती की गई है। जिले को 119 डॉक्टरों की जरूरत है। वर्तमान में मात्र 55 डॉक्टरों ही तैनात हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। अकेले सदर अस्पताल में 15 डॉक्टरों की कमी है।
अस्पतालों में सभी सुविधाएं होने के बावजूद डॉक्टरों की कमी है। ग्रामीण क्षेत्रों में हालात ज्यादा खराब हैं। कई अस्पतालों में डॉक्टरों की तैनाती नहीं है। इस कमी को पूरा करने के लिए एक डॉक्टरों को दो-दो अस्पतालों में हफ्ते में तीन-तीन दिन की तैनाती की गई है। कुछ डॉक्टर तैनाती के बाद भी कभी-कभार ही आते हैं। 64 डॉक्टरों के पद रिक्त हैं। 17 स्टाप नर्स, 13 लैब टेक्नीशियन, 97 एएनएम, लैब अटेंडेट के 11 और फार्मासिस्ट के एक पद रिक्त हैं। स्वास्थ्य विभाग को पांच वर्षों से स्टाप की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग को पांच वर्षों से स्टाप की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग को पांच डॉक्टर मिले हैं। इनमें डॉ. संदीप पाल व डॉ. दीपिका पाल को मौदहा सीएचसी, डॉ. नम्रता राज, डॉ. सुखेंद्र प्रताप सिंह को राठ सीएचसी व डॉ. गौसिया को सरीला में तैनाती दी गई है।
ये स्वास्थ्य सेवाएं मिलतीं
जिले में आठ सीएचसी, तीन पीएचसी व 32 नवीन पीएचसी संचालित हैं। 215 प्रसव स्वास्थ्य उपकेंद्र हैं। इनमें स्वास्थ्य कर्मियों की बेहद कमी है। लोगों को उचित स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया नहीं हो पा रही हैं। ज्यादातर नवीन पीएचसी फार्मासिस्ट के भरोसे संचालित हैं।
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हड्डी रोग विशेषज्ञ की कमी
दो वर्ष से सदर अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं है। इससे मरीजों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। जिला मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एके रावत ने कहा कि जिला अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ न होने से मरीजों को समस्या उठानी पड़ रही है। नियुक्ति के लिए शासन से पत्राचार किया जा रहा है।
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अस्पतालों में सभी सुविधाएं होने के बावजूद डॉक्टरों की कमी है। ग्रामीण क्षेत्रों में हालात ज्यादा खराब हैं। कई अस्पतालों में डॉक्टरों की तैनाती नहीं है। इस कमी को पूरा करने के लिए एक डॉक्टरों को दो-दो अस्पतालों में हफ्ते में तीन-तीन दिन की तैनाती की गई है। कुछ डॉक्टर तैनाती के बाद भी कभी-कभार ही आते हैं। 64 डॉक्टरों के पद रिक्त हैं। 17 स्टाप नर्स, 13 लैब टेक्नीशियन, 97 एएनएम, लैब अटेंडेट के 11 और फार्मासिस्ट के एक पद रिक्त हैं। स्वास्थ्य विभाग को पांच वर्षों से स्टाप की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग को पांच वर्षों से स्टाप की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग को पांच डॉक्टर मिले हैं। इनमें डॉ. संदीप पाल व डॉ. दीपिका पाल को मौदहा सीएचसी, डॉ. नम्रता राज, डॉ. सुखेंद्र प्रताप सिंह को राठ सीएचसी व डॉ. गौसिया को सरीला में तैनाती दी गई है।
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ये स्वास्थ्य सेवाएं मिलतीं
जिले में आठ सीएचसी, तीन पीएचसी व 32 नवीन पीएचसी संचालित हैं। 215 प्रसव स्वास्थ्य उपकेंद्र हैं। इनमें स्वास्थ्य कर्मियों की बेहद कमी है। लोगों को उचित स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया नहीं हो पा रही हैं। ज्यादातर नवीन पीएचसी फार्मासिस्ट के भरोसे संचालित हैं।
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हड्डी रोग विशेषज्ञ की कमी
दो वर्ष से सदर अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं है। इससे मरीजों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। जिला मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एके रावत ने कहा कि जिला अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ न होने से मरीजों को समस्या उठानी पड़ रही है। नियुक्ति के लिए शासन से पत्राचार किया जा रहा है।