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Hamirpur News: किताबों से पहले कीचड़ की परीक्षा से गुजर रहे विद्यार्थी
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फोटो22 एचएएमपी 32-पानी भरे रास्ते से गुजरते बच्चे व अभिभावक। संवाद
-डेढ़ किलोमीटर का दलदल पार कर स्कूल पहुंचते छात्र-छात्राएं
-आश्वासन के सहारे मुसीबतों की नदी पार करते बीते छह साल
संवाद न्यूज एजेंसी
बिवांर (हमीरपुर)। इमिलिया-उमरी मार्ग से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर मजरा भादन के डेरा को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाला कच्चा रास्ता बारिश में दलदल में तब्दील हो गया है। इसकी वजह से सबसे अधिक मुसीबत छात्र-छात्राओं को उठानी पड़ रही है। पढ़ लिखकर तरक्की की राह पर आगे बढ़ने का सपना उन्हें कीचड़ में कदम रखने को मजबूर कर रहा है। किताबों से पहले कीचड़ की परीक्षा से गुजरना पड़ता है।
ग्रामीणों के मुताबिक छह साल से सड़क निर्माण के लिए विधायक, ब्लॉक प्रमुख और ग्राम प्रधान से गुहार लगाई जा रही है। हर बार आश्वासन की पोटली थमाई गई। पक्की सड़क के लिए किए गए वादे धरातल पर नहीं उतर सके। यही वजह है कि कच्ची सड़क पक्की नहीं हो सकी। बारिश के दिनों में करीब डेढ़ किलोमीटर का यह रास्ता ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। कीचड़ और फिसलन के बीच उन्हें रोज इसी रास्ते से आना-जाना पड़ता है। किसी ग्रामीण के बीमार पड़ने पर अस्पताल पहुंचाना भी आसान नहीं रहता। जरूरी सामान लेने के लिए बाहर निकलना हो तो भी ग्रामीणों को मौसम साफ होने का इंतजार करना पड़ता है।
अब डीएम से लगाई उम्मीद
ग्रामीण देवी प्रसाद पांडेय, रामौतार अनुरागी, रामदीन, संदीप, प्रदीप, मनोज और श्यामबाबू का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के चक्कर लगाते-लगाते छह साल बीत गए। अब ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि मजरे को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए जल्द पक्की सड़क बनवाई जाए ताकि बच्चों को दलदल पार कर स्कूल न जाना पड़े और बारिश में ग्रामीणों की मुश्किलें खत्म हो सकें।
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वर्जन
बच्चों या अभिभावकों की ओर से मेरे संज्ञान में सड़क की समस्या नहीं लाई गई है। अगर ऐसी स्थिति है तो जो आमजन के हित में आवश्यक होगा वह कदम उठाया जाएगा। -अरुण कुमार सिंह, सीडीओ हमीरपुर
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-डेढ़ किलोमीटर का दलदल पार कर स्कूल पहुंचते छात्र-छात्राएं
-आश्वासन के सहारे मुसीबतों की नदी पार करते बीते छह साल
संवाद न्यूज एजेंसी
बिवांर (हमीरपुर)। इमिलिया-उमरी मार्ग से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर मजरा भादन के डेरा को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाला कच्चा रास्ता बारिश में दलदल में तब्दील हो गया है। इसकी वजह से सबसे अधिक मुसीबत छात्र-छात्राओं को उठानी पड़ रही है। पढ़ लिखकर तरक्की की राह पर आगे बढ़ने का सपना उन्हें कीचड़ में कदम रखने को मजबूर कर रहा है। किताबों से पहले कीचड़ की परीक्षा से गुजरना पड़ता है।
ग्रामीणों के मुताबिक छह साल से सड़क निर्माण के लिए विधायक, ब्लॉक प्रमुख और ग्राम प्रधान से गुहार लगाई जा रही है। हर बार आश्वासन की पोटली थमाई गई। पक्की सड़क के लिए किए गए वादे धरातल पर नहीं उतर सके। यही वजह है कि कच्ची सड़क पक्की नहीं हो सकी। बारिश के दिनों में करीब डेढ़ किलोमीटर का यह रास्ता ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। कीचड़ और फिसलन के बीच उन्हें रोज इसी रास्ते से आना-जाना पड़ता है। किसी ग्रामीण के बीमार पड़ने पर अस्पताल पहुंचाना भी आसान नहीं रहता। जरूरी सामान लेने के लिए बाहर निकलना हो तो भी ग्रामीणों को मौसम साफ होने का इंतजार करना पड़ता है।
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अब डीएम से लगाई उम्मीद
ग्रामीण देवी प्रसाद पांडेय, रामौतार अनुरागी, रामदीन, संदीप, प्रदीप, मनोज और श्यामबाबू का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के चक्कर लगाते-लगाते छह साल बीत गए। अब ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि मजरे को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए जल्द पक्की सड़क बनवाई जाए ताकि बच्चों को दलदल पार कर स्कूल न जाना पड़े और बारिश में ग्रामीणों की मुश्किलें खत्म हो सकें।
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बच्चों या अभिभावकों की ओर से मेरे संज्ञान में सड़क की समस्या नहीं लाई गई है। अगर ऐसी स्थिति है तो जो आमजन के हित में आवश्यक होगा वह कदम उठाया जाएगा। -अरुण कुमार सिंह, सीडीओ हमीरपुर