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Hamirpur News: गोवत्स पूजन के साथ शुरू हुआ पांच दिवसीय दिवाली पर्व
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संवाद न्यूज एजेंसी
भरुआ सुमेरपुर। गुरुवार को बुंदेलखंड में गोवत्स पूजन के साथ पांच दिवसीय दिवाली पर्व का आगाज हो गया। यदुवंश ने गुरुवार को घर-घर गोवत्स पूजन करके इस महापर्व का आगाज किया।
बुंदेलखंड में दिवाली पर्व पांच दिन मनाया जाता है। इस पर्व पर गोवंश की पूजन का चलन आज भी मौजूद है। यदुवंशी आज भी गाय को बहुत तवज्जो देते हैं। गुरुवार को कस्बा सहित गांवों में यदुकुल की महिलाओं ने दिनभर व्रत रखा और शाम को विविध प्रकार के व्यंजन तैयार करके सूप में सजाकर दरवाजे पर ढोल बाजे के साथ दिवारी नृत्य और गायन के मध्य विधि विधान के साथ गाय व बछड़े का पूजन किया।
इसके बाद सूप में सजाकर लाए गए व्यंजनों को व्रती महिलाओं ने गाय बछड़े को खिलाकर व्रत का पारण किया। विदोखर निवासी डॉ रामबहादुर यादव ने बताया कि यह परंपरा सदियों से बुंदेलखंड में विद्यमान है। इस परंपरा को यदुवंश आज भी जीवंत किए हैं। कुंडौरा निवासी अवधेश यादव ने बताया कि यह परंपरा द्वापर युग से चली आ रही है। इस परंपरा को यादव समाज आज भी जीवंत किए हैं। गोवत्स द्वादशी से शुरू होने वाला दीपावली पर्व धनतेरस,दिवाली, अन्नकूट, भैयादूज के साथ संपन्न होता है।
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उन्होंने बताया कि यादव हमेशा से गोपालक रहा है और आज भी है। उससे बड़ा गौभक्त और कोई नहीं है। इसी वजह से वह प्रतिवर्ष दिवाली पर्व गोवत्स पूजन के साथ शुरू करता है और अन्नकूट पर गोचर की व्यवस्था कराकर उन्हें भरपूर भोजन के इंतजाम आज भी गांव-गांव में करता है।
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भरुआ सुमेरपुर। गुरुवार को बुंदेलखंड में गोवत्स पूजन के साथ पांच दिवसीय दिवाली पर्व का आगाज हो गया। यदुवंश ने गुरुवार को घर-घर गोवत्स पूजन करके इस महापर्व का आगाज किया।
बुंदेलखंड में दिवाली पर्व पांच दिन मनाया जाता है। इस पर्व पर गोवंश की पूजन का चलन आज भी मौजूद है। यदुवंशी आज भी गाय को बहुत तवज्जो देते हैं। गुरुवार को कस्बा सहित गांवों में यदुकुल की महिलाओं ने दिनभर व्रत रखा और शाम को विविध प्रकार के व्यंजन तैयार करके सूप में सजाकर दरवाजे पर ढोल बाजे के साथ दिवारी नृत्य और गायन के मध्य विधि विधान के साथ गाय व बछड़े का पूजन किया।
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इसके बाद सूप में सजाकर लाए गए व्यंजनों को व्रती महिलाओं ने गाय बछड़े को खिलाकर व्रत का पारण किया। विदोखर निवासी डॉ रामबहादुर यादव ने बताया कि यह परंपरा सदियों से बुंदेलखंड में विद्यमान है। इस परंपरा को यदुवंश आज भी जीवंत किए हैं। कुंडौरा निवासी अवधेश यादव ने बताया कि यह परंपरा द्वापर युग से चली आ रही है। इस परंपरा को यादव समाज आज भी जीवंत किए हैं। गोवत्स द्वादशी से शुरू होने वाला दीपावली पर्व धनतेरस,दिवाली, अन्नकूट, भैयादूज के साथ संपन्न होता है।
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उन्होंने बताया कि यादव हमेशा से गोपालक रहा है और आज भी है। उससे बड़ा गौभक्त और कोई नहीं है। इसी वजह से वह प्रतिवर्ष दिवाली पर्व गोवत्स पूजन के साथ शुरू करता है और अन्नकूट पर गोचर की व्यवस्था कराकर उन्हें भरपूर भोजन के इंतजाम आज भी गांव-गांव में करता है।