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किसानों को मानसून का बेसब्री से इंतजार
ब्यूरो अमर उजाला, हमीरपुर
Updated Mon, 13 Jun 2016 12:20 AM IST
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कृषि भवन का निरीक्षण
- फोटो : अमर उजाला
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दैवी आपदाओं का दंश झेल रहे किसानों को मानसून का बेसब्री से इंतजार है। इधर बीते दिनों हुई हल्की बारिश में भी किसान खेतों की जुताई करने से नहीं चूके हैं। किसान मानसून की बरसात शुरू होते ही खरीफ में खेतों तैयार कर बिना मौका गंवाए फसलों की बुआई करने को बेचैन है। मानसून आने का समय 15 जून के बाद का है, पर काले मेघ उमड़ घुमड़कर आते और चले जाते हैं। किसानों का कहना है कि अगर बरसात में देरी हुई तो खरीफ फसल पर भी आफत आ जाएगी।
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कई सालों से मौसम की बेरुखी से किसान बेजार है। इधर बीते दो वर्षों से खरीफ की फसलें किसान नहीं कर सके हैं। समय से मानसूनी बरसात न होना किसानों के लिए घातक साबित हुआ है। वहीं रबी अभियान भी औंधे मुंह गिरा है। जमीनों के परती पड़ने से ज्यादातर किसान पलायन कर गए हैं।
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आर्थिक रूप से टूट चुके किसानों को मानसूनी बरसात का बेसब्री से इंतजार है। 15 जून तक मानसून आ गया तो इस माह के अंतिम सप्ताह से लेकर जुलाई के प्रथम सप्ताह तक बुआई भी तेजी से शुरू हो जाएगी। जिले में एक लाख सात हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में खरीफ की फसल पैदा की जाती है। इसमें धान का क्षेत्रफल 500 हेक्टेयर है।
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ज्वार का 40 हजार हेक्टेयर, उड़द का 36 हजार हेक्टेयर, अरहर का 16900 हेक्टेयर, मूंग का एरिया 6200 हेक्टेयर और तिल 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल है। किसानों के लिए सरकार ने अनुदान पर तिल सहित अन्य बीज उपलब्ध कराए हैं। मूंग बीज टीडी 129 प्रजाति जिसे सम्राट के नाम से जानते हैं कृषि गोदामों 10.75 क्विंटल भेजा गया है।
इसका रेट 125.80 रुपये प्रति किलो है। उड़द का उत्रा प्रजाति का बीज चार क्विंटल आया है। जिसे 170 रुपये प्रति किलो वितरित किया जाएगा। ऊषा बासमती 1509 प्रजाति का धान बीज पांच क्विंटल आया है। जिले 41 रुपये किलो में मिलेगा। 100 क्विंटल तिल बीज आरटी 351 प्रजाति का 111.70 रुपये प्रति किलो के हिसाब से किसानों को मिलेगा।
इसमें 100 रुपये अनुदान है। 128.10 क्विंटल ढैंचा बीज आया है, जो 36 रुपये प्रति किलो की दर से मिलेगा। बहुजन किसान दल के जिलाध्यक्ष भगवानदास दीक्षित कहते हैं कि मौसम ने साथ दिया तो मौत के मुंह में जा रहे किसानों को राहत मिल जाएगी। इससे वह लिया कर्ज भी चुकता कर सकेंगे। कहा कि बुंदेलखंड में किसानों की सरकार सुन नहीं रही है।
फसलें बर्बाद हुईं लेकिन ज्यादातर किसानों को राहत राशि ही नहीं दी गई है। प्रगतिशील किसान आशीष पालीवाल बोले कि किसान भले ही टूटा हुआ है। लेकिन खरीफ फसल को लेकर गंभीर है। अगर इस बार बरसात समय से ठीकठाक हुई तो बिना कुछ सोचे समझे ज्यादा से ज्यादा एरिया में खरीफ फसल की बुआई करने से नहीं चूकेगा।
जिला कृषि अधिकारी डा. धर्मराज सिंह ने कहा कि जिले के सभी कृषि गोदामों पर खरीफ फसल के लिए बीज उपलब्ध करा दिया गया है। अभी 100 क्विंटल तिल बीज और आएगा। अरहर बीज की डिमांड की गई है। किसानों को अनुदान पर बीज मिलेगा। इसमें किसान को पिछली बार की तरह गोदाम पर बीज के बदले पूरा पैसा अदा करना होगा। इसके बाद उसे आरटीजीएस के माध्यम से धन की वापसी होगी।