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Hamirpur News: शिक्षक बनने के लिए बनवाया फर्जी प्रमाण पत्र, शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश
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हमीरपुर। फर्जी दस्तावेजों और भ्रामक तथ्यों के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र हासिल कर बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी पाने का मामला सामने आया है। शिकायत के बाद कराई गई जांच में हकीकत सामने आने पर जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। सबसे पहले जारी किया गया प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया। जिलाधिकारी ने जिला बेसिक शिक्षाधिकारी को विभागीय और वैधानिक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
राठ कस्बे के मोहल्ला चौबट्टा निवासी ओम प्रकाश सिंह का स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र जारी हुआ है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटा से उन्हें शिक्षक की नौकरी मिल गई। सब कुछ ठीक चल रहा था। इसी दौरान जिला प्रशासन के पास शिकायत पहुंच गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी अभिषेक गोयल ने प्रकरण की जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित कर दी। एडीएम राकेश कुमार, उप जिलाधिकारी राठ अभिमन्यु कुमार समेत पांच सदस्यीय टीम ने मामले की जांच की और रिपोर्ट प्रस्तुत की।
जांच रिपोर्ट में सामने आया कि ओम प्रकाश सिंह ने स्वयं को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दिवंगत लोटन सिंह वर्मा का पौत्र बताते हुए वर्ष 2004 में प्रमाण पत्र संख्या 639/2004 प्राप्त किया था। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर वर्ष 2005 में सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति हासिल कर ली। मौजूदा समय में ओमप्रकाश सिंह उच्च प्राथमिक विद्यालय बकरई ब्लॉक राठ में तैनात है। जिलाधिकारी अभिषेक गोयल के अनुमोदन के बाद डिप्टी कलेक्टर एवं प्रभारी अधिकारी (प्रमाण पत्र) कड़ेदीन शर्मा ने ओम प्रकाश सिंह के नाम जारी प्रमाण पत्र तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया।
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अभिलेखों में सत्यप्रकाश के पिता मातवर सिंह
प्रशासनिक जांच में राजस्व अभिलेखों, परिवार रजिस्टर, आधार से जुड़े दस्तावेज खंगाले गए। अभिलेखों में सत्यप्रकाश सिंह के पिता का नाम मातवर सिंह दर्ज मिला। लाभ लेने के उद्देश्य से उन्हें लोटन सिंह वर्मा का दत्तक पुत्र दर्शाया गया। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि कथित दत्तक ग्रहण प्रक्रिया हिन्दू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम 1956 के अनुरूप नहीं थी। उस समय लोटन सिंह वर्मा के दो पुत्र जीवित थे और कोई विधिवत पंजीकृत गोदनामा या सक्षम साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
दत्तक पुत्र नहीं रिश्तेदार है सत्यप्रकाश
पारिवारिक संबंधों की जांच की गई तो इसमें भी विसंगतियां सामने आई हैं। जांच अधिकारी की माने तो सत्यप्रकाश सिंह के पुत्र का विवाह लोटन सिंह वर्मा के वास्तविक पौत्र की पुत्री से हुआ है। इस आधार पर यह दोनों एक-दूसरे के रिश्तेदार हैं। दत्तक संबंधों का दावा यहां पर भी संदिग्ध पाया गया।
फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने वाले भी जांच के घेरे में
जिला प्रशासन जारी किए गए फर्जी प्रमाण पत्र को लेकर गंभीर है। यही वजह है कि अब जारी प्रमाण पत्र जिस पटल से गुजरा वह भी जांच के दायरे में है। तत्कालीन लेखपाल, राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार समेत अन्य कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जाएगी। जांच के बाद
जांच टीम की ओर से दी गई आख्या रिपोर्ट के आधार पर फर्जी दस्तावेजों से बनवाए गए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया है। इसकी रिपोर्ट भेज दी है। - कड़ेदीन शर्मा, उप जिलाधिकारी/प्रभारी अधिकारी हमीरपुर
जांच रिपोर्ट मिल गई है। सुनवाई के लिए संबंधित शिक्षक को बुलवाया जाएगा। इसके बाद नियमानुसार विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। - आलोक सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी हमीरपुर
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राठ कस्बे के मोहल्ला चौबट्टा निवासी ओम प्रकाश सिंह का स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र जारी हुआ है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटा से उन्हें शिक्षक की नौकरी मिल गई। सब कुछ ठीक चल रहा था। इसी दौरान जिला प्रशासन के पास शिकायत पहुंच गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी अभिषेक गोयल ने प्रकरण की जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित कर दी। एडीएम राकेश कुमार, उप जिलाधिकारी राठ अभिमन्यु कुमार समेत पांच सदस्यीय टीम ने मामले की जांच की और रिपोर्ट प्रस्तुत की।
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जांच रिपोर्ट में सामने आया कि ओम प्रकाश सिंह ने स्वयं को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दिवंगत लोटन सिंह वर्मा का पौत्र बताते हुए वर्ष 2004 में प्रमाण पत्र संख्या 639/2004 प्राप्त किया था। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर वर्ष 2005 में सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति हासिल कर ली। मौजूदा समय में ओमप्रकाश सिंह उच्च प्राथमिक विद्यालय बकरई ब्लॉक राठ में तैनात है। जिलाधिकारी अभिषेक गोयल के अनुमोदन के बाद डिप्टी कलेक्टर एवं प्रभारी अधिकारी (प्रमाण पत्र) कड़ेदीन शर्मा ने ओम प्रकाश सिंह के नाम जारी प्रमाण पत्र तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया।
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अभिलेखों में सत्यप्रकाश के पिता मातवर सिंह
प्रशासनिक जांच में राजस्व अभिलेखों, परिवार रजिस्टर, आधार से जुड़े दस्तावेज खंगाले गए। अभिलेखों में सत्यप्रकाश सिंह के पिता का नाम मातवर सिंह दर्ज मिला। लाभ लेने के उद्देश्य से उन्हें लोटन सिंह वर्मा का दत्तक पुत्र दर्शाया गया। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि कथित दत्तक ग्रहण प्रक्रिया हिन्दू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम 1956 के अनुरूप नहीं थी। उस समय लोटन सिंह वर्मा के दो पुत्र जीवित थे और कोई विधिवत पंजीकृत गोदनामा या सक्षम साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
दत्तक पुत्र नहीं रिश्तेदार है सत्यप्रकाश
पारिवारिक संबंधों की जांच की गई तो इसमें भी विसंगतियां सामने आई हैं। जांच अधिकारी की माने तो सत्यप्रकाश सिंह के पुत्र का विवाह लोटन सिंह वर्मा के वास्तविक पौत्र की पुत्री से हुआ है। इस आधार पर यह दोनों एक-दूसरे के रिश्तेदार हैं। दत्तक संबंधों का दावा यहां पर भी संदिग्ध पाया गया।
फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने वाले भी जांच के घेरे में
जिला प्रशासन जारी किए गए फर्जी प्रमाण पत्र को लेकर गंभीर है। यही वजह है कि अब जारी प्रमाण पत्र जिस पटल से गुजरा वह भी जांच के दायरे में है। तत्कालीन लेखपाल, राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार समेत अन्य कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जाएगी। जांच के बाद
जांच टीम की ओर से दी गई आख्या रिपोर्ट के आधार पर फर्जी दस्तावेजों से बनवाए गए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया है। इसकी रिपोर्ट भेज दी है। - कड़ेदीन शर्मा, उप जिलाधिकारी/प्रभारी अधिकारी हमीरपुर
जांच रिपोर्ट मिल गई है। सुनवाई के लिए संबंधित शिक्षक को बुलवाया जाएगा। इसके बाद नियमानुसार विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। - आलोक सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी हमीरपुर