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Hamirpur News: ओवरलोडिंग पर दोगुना मुनाफा...रवन्ना न मिलने पर लोकेटर के सहारे चलानी पड़ती गाड़ियां
Sat, 15 Nov 2025 12:23 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Sat, 15 Nov 2025 12:23 AM IST
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फोटो 14 एचएएमपी 29- जिले की एक खदान पर प्रतिबंधित मशीनों से की की जा रही लोडिंग। संवाद
हमीरपुर। जिले में बेतवा और धसान नदियों में कुल 21 मौरंग खदानों का आवंटन है। इनमें 14 खदानें संचालित हैं। इनसे लेकर मंडी तक लोकेटरों का पासिंग नेटवर्क का जाल फैला है। ट्रक चालकों का कहना है कि रवन्ना न मिलने पर लोकेटर के सहारे ही गाड़ियां चलानी पड़ती हैं। ओवरलोडिंग में ट्रक मालिक को दोगुना मुनाफा होता है।
जनपद में बेतवा नदी का 134 किमी का दायरा है। एक अप्रैल 2025 से 14 नवंबर तक 164 करोड़ रुपये का खनिज राजस्व मिला है। वहीं, बीते वर्ष एक अप्रैल से 31 मार्च 25 तक करीब 500 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। खनन विभाग के मुताबिक एक अप्रैल से 14 नवंबर तक कुल 65 ओवरलोड वाहनों को पकड़ा गया है। इन पर 35 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया और कई वाहन सीज किए गए हैं। लखनऊ और उन्नाव में एसटीएफ की कार्रवाई के बाद खनिज विभाग सतर्कता बरत रहा है।
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प्रति वाहन 5-6 हजार देनी पड़ती इंट्री
नाम न छपने की शर्त पर वाहन मालिकों ने बताया कि पहले कई जनपदों में एआरटीओ कार्यालय में 5-6 हजार रुपये प्रति गाड़ी इंट्री देनी पड़ती थी, लेकिन हाल में हुई सख्ती के चलते ओवरलोड वाहनों पर निगरानी बढ़ी है। इंट्रियां भी रोक दी गई हैं। इसके बाद भी खदानों से लेकर मंडियों तक गुप्त कारोबारी नेटवर्क सक्रिय है। इसमें ओवरलोडिंग, पासिंग, लोकेटर और सेटिंग के जरिए कमाई होती है।
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ओवरलोडिंग पर दोगुना कमाई
एक ट्रक संचालक ने बताया कि संचालित 14 खदानों में मौरंग के रेट अलग-अलग हैं। खदान से नियमित पासिंग में मौरंग लेने पर ट्रक मालिक को 4-5 हजार रुपये की बचत होती है। ओवरलोडिंग शुरू होते ही कमाई तेजी से बढ़ जाती है। ओवरलोड गाड़ी में 10-12 हजार की सीधी बचत होती है। बिना रवन्ना ले जाएं तो यह बचत बढ़कर 12-16 हजार तक पहुंच जाती है। इसलिए लोकेटर लगाकर ओवरलोडिंग का खेल चलता है।
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मौरंग के लिए निर्धारित अलग रेट
ट्रक संचालकों के अनुसार जैसी मौरंग चाहिए, उसके वैसे रेट निर्धारित होते हैं।
- ढलाई (छत) के लिए 350-400 रुपया टन।
- चिनाई के लिए 500-550 रुपये टन।
- प्लास्टर के लिए 650-700 रुपये टन।
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रवन्ना न लेने पर मिलती छूट
बताया कि यदि मोटर संचालक रवन्ना नहीं लेता तो 35 टन पर 3,500 रुपये देने पड़ते हैं और 50 टन पर 5,000 रुपये की छूट खदान से मिल जाती है।
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पासिंग: कौन कितनी मौरंग ले जा सकता
- 14 चक्का पर 29 टन पासिंग और ओवरलोड में 50 टन
- 16 चक्का पर 32 टन पासिंग और ओवरलोड में 55 टन
- 18 चक्का में 35 टन पासिंग और ओवरलोड में 55 टन
- 22 चक्का पर 40 टन पासिंग और ओवरलोड में 60 टन
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नियम के तहत काम करें तो नहीं लगता सुविधा शुल्क
मोटर संचालक ने बताया कि नियम के तहत काम करें तो शुल्क नहीं लगता है। लेकिन, 50-70 टन तक माल ले जाने वाले वाहन एआरटीओ कार्यालय में दलालों के जरिए इंट्री कराते हैं। पकड़े जाने से बचने के लिए लोकेटरों का सहारा लिया जाता है।
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चालान पेंडिंग तो नहीं मिलता रवन्ना
एक चालक ने बताया कि गाड़ियों पर ओवरलोड में लाखों का चालान लंबित है। ऐसे में नंबर कंप्यूटर पर ब्लैकलिस्ट हो जाता है और ऑनलाइन रवन्ना नहीं बनता। मजबूरी में लोकेटर और इंट्री पर गाड़ी चलानी पड़ती है। एक बार गाड़ी पकड़ी जाए तो एक से दो लाख तक का खर्च बैठ जाता है। गाड़ी अलग से खड़ी रहती है।
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जिले से लेकर गोरखपुर-लखनऊ व कानपुर तक फैला जाल
वाहन स्वामियों के अनुसार जिले से मौरंग सबसे ज्यादा कानपुर, उन्नाव, लखनऊ, इटावा को जाती है। इसके अलावा गोंडा, बहराइच, अलीगढ़, गोरखपुर, सीतापुर, बलिया तक भी सप्लाई होती है।
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फीट के हिसाब से बिकती मौरंग
अंडरलोड माल बेचने वाले वाहन स्वामी ने बताया कि माौरंग मंडी में फीट के हिसाब से मौरंग बिकती है। कानपुर में 38 रुपये फीट, उन्नाव में 42 रुपये फीट और लखनऊ में 50 रुपये फीट रेट मिलते हैं। ओवरलोडिंग के कारण अंडरलोड वाहन 2-3 दिन तक खड़े रहते हैं। ओवरलोडिंग पर लगाम लगाना जरूरी है।
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कहां कितनी खदानें संचालित
हमीरपुर में सबसे अधिक चिकासी क्षेत्र में सात खदानें संचालित हैं। जरिया में एक, जलालपुर दो, सदर क्षेत्र में दो और मौदहा तहसील में एक व सुमेरपुर क्षेत्र में एक खदान संचालित है।
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जिले में 21 खदानों का आवंटन है। इनमें से 14 खदानें संचालित हैं। नियम विरुद्ध खनन पर नोटिस जारी कर पैमाइश के बाद जुर्माना लगाया जाता है। अब तक 65 ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई की गई हैं और इनसे 35 लाख का जुर्माना वसूला गया है। अब तक 164 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है। - विकास परमार, खनन अधिकारी हमीरपुर।
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जनपद में बेतवा नदी का 134 किमी का दायरा है। एक अप्रैल 2025 से 14 नवंबर तक 164 करोड़ रुपये का खनिज राजस्व मिला है। वहीं, बीते वर्ष एक अप्रैल से 31 मार्च 25 तक करीब 500 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। खनन विभाग के मुताबिक एक अप्रैल से 14 नवंबर तक कुल 65 ओवरलोड वाहनों को पकड़ा गया है। इन पर 35 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया और कई वाहन सीज किए गए हैं। लखनऊ और उन्नाव में एसटीएफ की कार्रवाई के बाद खनिज विभाग सतर्कता बरत रहा है।
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प्रति वाहन 5-6 हजार देनी पड़ती इंट्री
नाम न छपने की शर्त पर वाहन मालिकों ने बताया कि पहले कई जनपदों में एआरटीओ कार्यालय में 5-6 हजार रुपये प्रति गाड़ी इंट्री देनी पड़ती थी, लेकिन हाल में हुई सख्ती के चलते ओवरलोड वाहनों पर निगरानी बढ़ी है। इंट्रियां भी रोक दी गई हैं। इसके बाद भी खदानों से लेकर मंडियों तक गुप्त कारोबारी नेटवर्क सक्रिय है। इसमें ओवरलोडिंग, पासिंग, लोकेटर और सेटिंग के जरिए कमाई होती है।
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ओवरलोडिंग पर दोगुना कमाई
एक ट्रक संचालक ने बताया कि संचालित 14 खदानों में मौरंग के रेट अलग-अलग हैं। खदान से नियमित पासिंग में मौरंग लेने पर ट्रक मालिक को 4-5 हजार रुपये की बचत होती है। ओवरलोडिंग शुरू होते ही कमाई तेजी से बढ़ जाती है। ओवरलोड गाड़ी में 10-12 हजार की सीधी बचत होती है। बिना रवन्ना ले जाएं तो यह बचत बढ़कर 12-16 हजार तक पहुंच जाती है। इसलिए लोकेटर लगाकर ओवरलोडिंग का खेल चलता है।
मौरंग के लिए निर्धारित अलग रेट
ट्रक संचालकों के अनुसार जैसी मौरंग चाहिए, उसके वैसे रेट निर्धारित होते हैं।
- ढलाई (छत) के लिए 350-400 रुपया टन।
- चिनाई के लिए 500-550 रुपये टन।
- प्लास्टर के लिए 650-700 रुपये टन।
रवन्ना न लेने पर मिलती छूट
बताया कि यदि मोटर संचालक रवन्ना नहीं लेता तो 35 टन पर 3,500 रुपये देने पड़ते हैं और 50 टन पर 5,000 रुपये की छूट खदान से मिल जाती है।
पासिंग: कौन कितनी मौरंग ले जा सकता
- 14 चक्का पर 29 टन पासिंग और ओवरलोड में 50 टन
- 16 चक्का पर 32 टन पासिंग और ओवरलोड में 55 टन
- 18 चक्का में 35 टन पासिंग और ओवरलोड में 55 टन
- 22 चक्का पर 40 टन पासिंग और ओवरलोड में 60 टन
नियम के तहत काम करें तो नहीं लगता सुविधा शुल्क
मोटर संचालक ने बताया कि नियम के तहत काम करें तो शुल्क नहीं लगता है। लेकिन, 50-70 टन तक माल ले जाने वाले वाहन एआरटीओ कार्यालय में दलालों के जरिए इंट्री कराते हैं। पकड़े जाने से बचने के लिए लोकेटरों का सहारा लिया जाता है।
चालान पेंडिंग तो नहीं मिलता रवन्ना
एक चालक ने बताया कि गाड़ियों पर ओवरलोड में लाखों का चालान लंबित है। ऐसे में नंबर कंप्यूटर पर ब्लैकलिस्ट हो जाता है और ऑनलाइन रवन्ना नहीं बनता। मजबूरी में लोकेटर और इंट्री पर गाड़ी चलानी पड़ती है। एक बार गाड़ी पकड़ी जाए तो एक से दो लाख तक का खर्च बैठ जाता है। गाड़ी अलग से खड़ी रहती है।
जिले से लेकर गोरखपुर-लखनऊ व कानपुर तक फैला जाल
वाहन स्वामियों के अनुसार जिले से मौरंग सबसे ज्यादा कानपुर, उन्नाव, लखनऊ, इटावा को जाती है। इसके अलावा गोंडा, बहराइच, अलीगढ़, गोरखपुर, सीतापुर, बलिया तक भी सप्लाई होती है।
फीट के हिसाब से बिकती मौरंग
अंडरलोड माल बेचने वाले वाहन स्वामी ने बताया कि माौरंग मंडी में फीट के हिसाब से मौरंग बिकती है। कानपुर में 38 रुपये फीट, उन्नाव में 42 रुपये फीट और लखनऊ में 50 रुपये फीट रेट मिलते हैं। ओवरलोडिंग के कारण अंडरलोड वाहन 2-3 दिन तक खड़े रहते हैं। ओवरलोडिंग पर लगाम लगाना जरूरी है।
कहां कितनी खदानें संचालित
हमीरपुर में सबसे अधिक चिकासी क्षेत्र में सात खदानें संचालित हैं। जरिया में एक, जलालपुर दो, सदर क्षेत्र में दो और मौदहा तहसील में एक व सुमेरपुर क्षेत्र में एक खदान संचालित है।
जिले में 21 खदानों का आवंटन है। इनमें से 14 खदानें संचालित हैं। नियम विरुद्ध खनन पर नोटिस जारी कर पैमाइश के बाद जुर्माना लगाया जाता है। अब तक 65 ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई की गई हैं और इनसे 35 लाख का जुर्माना वसूला गया है। अब तक 164 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है। - विकास परमार, खनन अधिकारी हमीरपुर।

फोटो 14 एचएएमपी 29- जिले की एक खदान पर प्रतिबंधित मशीनों से की की जा रही लोडिंग। संवाद