फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hamirpur News ›   diwali

श्रीगणेश लक्ष्मी की पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना की

Sun, 07 Nov 2021 12:18 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 07 Nov 2021 12:18 AM IST
विज्ञापन
diwali
शहर में वृद्घा आश्रम में वृद्घों को फल वितरित करती आकांक्षा समिति की अध्यक्ष व अन्य लोग। - फोटो : HAMIRPUR
हमीरपुर। जिले में दिवाली पर्व उत्साह व उमंग के साथ आस्था पूर्वक मनाया गया। भैयादूज पर बहनों ने भाइयों को तिलक लगाकर दीर्घायु होने की कामना की। इसके साथ ही गोवर्धन पूजा व मौन व्रत की परंपरा भी निभाई गई। जगह-जगह पर दीवारी नृत्य के आयोजन चलते रहे।
विज्ञापन

धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दिवाली, गोवर्धन पूजा व भैयादूज पर्वो का सम्मिलित प्रकाश पर्व पूरे उत्साह व आशा के साथ जिले भर में मनाया गया। व्यापारिक प्रतिष्ठानों में भी पूजा अर्चना की गई। दिवाली के अगले दिन परेवा पर गोवर्धन पूजा भी विधि-विधान से की गई। मौनियों ने मौन व्रत धारण कर मोर पंखों के साथ श्रीकृष्ण की उपासना की और मौन चराने की परंपरा को निभाया। कुरारा संवाद के अनुसार अकेहरा हार में सैय्यदबाबा की मजार पर डामर, कुतुबपुर, सरसई, जैसकपुर, कुसमरा, खोड़, शिवनी आदि गांवों के मौनिया एकत्र हुए। पुरानी परम्परा के अनुसार व्रत धारण किए मौनियों को परात में पानी पिलाया गया। ग्रामीणों में जमकर दीवारी नृत्य हुआ, एक दूसरे के गले मिलकर त्योहार की बधाई दी।
विज्ञापन

भरुआसुमेरपुर। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति से ओतप्रोत मौनिया परंपरा का निर्वहन करने में साधक को कड़ी परीक्षा से गुजरना पड़ता है। प्रतिपदा को जहां उसे निर्जला व्रत करना पड़ता है। वहीं उस दिन उसे नंगे पैर रहकर खेत, खलिहान और जंगलों के रास्ते से गुजर कर मठ मंदिरों तक जाना होता है। साथ ही मशहूर दिवारी नृत्य भी चलता है। ढोल की थाप गूंजते ही बच्चे, बूढ़े, जवान थिरक उठते हैं। लाठियों से विभिन्न तरह की कलाओं को दर्शाते हैं। यम द्वितीया पर कस्बा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में भाई बहनों के प्रेम स्नेह की झलक साफ नजर आई। इस मौके पर बहनों ने भाइयों को तिलक लगाकर उनके दीर्घायु होने की कामना की। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

मौदहा। भैया दूज का त्यौहार नगर सहित ग्रामीण क्षेत्र में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह पर्व प्रेम, सद्भावना व स्नेह का प्रतीक है। इस पर्व में बहनें अपने भाई को टीका कर मुंह मीठा कराती है। गांव की गलियों व चौपालों में दीवारी नृत्य कर एक दूसरे पर लाठियों से वार कर बचाव की कला का प्रदर्शन किया गया। संवाद
हमीरपुर। दिवाली की मुख्य पहचान जगह-जगह लगने वाले मेलों की शान तथा शारीरिक सौष्ठव की पहचान, द्वापर युग की दीवारी नृत्यकला बुंदेलखंड में आज भी जीवंत है। दिवारी नृत्य के प्रति बाल कलाकारों का रुझान देखकर तो ऐसा लगता है कि यह कला आगे भी निरंतर चलती रहेगी। यह पर्व त्रेता युग से ताल्लुक रखता है। जबकि मौन व्रत पूजा, गोवर्धन पूजा का संबंध द्वापर युग से है। दिवारी नृत्य का संबंध भी द्वापर युग से जुड़ा हुआ है। बुंदेलखंड में प्रकाश पर्व आने के 15 दिन पहले से दीवारी नृत्य पर अभ्यास शुरू हो जाता है।
जो प्रकाश पर्व के बाद महीनों तक चलता रहता है। दीवारी नृत्य के बुजुर्ग कलाकार इस विधा को बाल कलाकारों को सिखाकर बुंदेलखंड में लंबे समय तक कायम रखने के लिए जुटे हुए हैं। कलाकारों का कहना है कि इस कला से शारीरिक सौष्ठव के साथ किसी भी शत्रु का सामना करने का आत्मबल बना रहता है। संगठन में शक्ति का भाव पैदा होता है। इसके साथ ही द्वापर युग के योगी श्रीकृष्ण की उपासना, गायन व वादन के साथ नाचते गाते मस्ती से झूमते हुए आनंद प्राप्त होता है। कलाकार बताते हैं कि दीवारी नृत्य बुंदेलखंड की शान है। बिना इसके दीपावली की परंपराएं संपन्न नहीं होती है।
सरीला। बरगवां में शुक्रवार को धूंगर दाई परिसर में दिवारी नृत्य व लोकगीत कार्यक्रम हुए। विधायक मनीषा अनुरागी, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि संतराम राजपूत पहुंचे। लोकगीत पार्टी में जय सिंह राजा व रानी कुशवाहा, रामदेवी रैकवार ललितपुर ने भजन पेश कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। बुंदेलखंडी लोकगीत ओझे कपड़ा छोड़ साड़ी पहनो, जइयो जइयो हो ससुराल ज्यादा दीना रुके न रहियो नहीं तो हो जे बंटाधार, गीत पर दर्शक लोट पोट हो गए। वर्षो के बाद राम का आवास गया, राजा तुम चाहे जितनो मारो न काटहे हमसे चारों, कलाकारों ने मनमोहक गीत, राई नृत्य व लोकगीत से दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। वहीं क्षेत्र के मोनियों ने भी कार्यक्रम का आनंद लिया। भक्तों ने धूंगर दाई के दर्शन कर पूजा अर्चना की। उधर करियारी में भैया दूज पर सुरौरा मठ के प्राचीन हनुमान मंदिर में दीवारी नृत्य व मेले का आयोजन हुआ। अच्छा प्रदर्शन करने वाली दीवारी टीम को पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाता है। संवाद

गहरौली। परेवा पर मौन पूजा के साथ खड़ेही में सैकड़ों वर्ष से चली आ रही गाय व सूअर को लड़ाने की पुरानी परंपरा का निर्वाह किया गया। सूअर को रस्सी में बांधकर गलियों घसीटते हुए गाय से लड़ाई का कार्यक्रम हुआ। पाही पाल, मुन्ना पाल, अर्जुन यादव, सुरेंद्र यादव सिद्धगोपाल, बृजेंद्र ने बताया कि सूअर के एक बच्चे के माथे पर अक्षत व रोली का टीका लगाने के बाद रस्सी से बांध कर दिवाली खेल रहे लोगों को सौंपा। फिर उसे गांव की गलियों से घसीटते हुए सभी मंदिरों के रास्ते होकर मौन पूजा करने बाले रहुनिया मुहाल बाली जगह पहुचे। इसके बाद गाय व सूअर का खेल खिलाने के कार्य शुरू कराया। जिसे देखने भारी भीड़ एकत्रित हुई। संवाद

सरीला में दीवारी नृत्य करते कलाकार।

सरीला में दीवारी नृत्य करते कलाकार।- फोटो : HAMIRPUR

सुमेरपुर के बिदोखर गांव में दिवारी खेलते वृद्घ।

सुमेरपुर के बिदोखर गांव में दिवारी खेलते वृद्घ।- फोटो : HAMIRPUR

सुमेरपुर के बिदोखर गांव में मौन साधकों को अन्न से उतारा करती मां व बहनें। संवाद

सुमेरपुर के बिदोखर गांव में मौन साधकों को अन्न से उतारा करती मां व बहनें। संवाद- फोटो : HAMIRPUR

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed