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आकाश चूमता है मेरे देश का तिरंगा
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हमीरपुर। स्वतंत्रता दिवस पर आजादी का अमृत महोत्सव के तहत कवि सम्मेलन व मुशायरे का आयोजन जिला पंचायत सभागार में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर जिलाधिकारी विनय प्रकाश श्रीवास्तव ने की।
कार्यक्रम में गजलकार अंशुमान पाठक ने पढ़ा, मुकद्दर और मुस्तकबिल की चिंता छोड़ दो यारो, खतम न हो गमों की रात ऐसी हो नहीं सकती। गीताकार नाथूराम पथिक ने पढ़ा, खुली हवा में सांस लो, देश हुआ आजाद, साथी मिलकर बोलिए भारत जिंदाबाद। रसिक ने पढ़ा, शहीदों के खून को हम पानी समझ बैठे हैं, उनकी कुर्बानी का हम कहानी समझ बैठे हैं। शायर फरीद परछवी ने पढ़ा, आजाद है मेरा भारत आजाद रहेगा, टकराएगा जो हमसे वह बर्बाद रहेगा। लखनलाल जोशी ने पढ़ा, आकाश चूमता है मेरे देश का तिरंगा, यह साक्ष्य दे रही है पावन हमारी गंगा।
मुन्नीलाल अवस्थी ने पढ़ा, शक्ति के तूफान बनकर तुम चलो आगे बढ़ो, आगे बढ़ो। गणेश सिंह विद्यार्थी ने अपनी रचना पढ़ी कि आपस में न हो प्यार मोहब्बत अधरों पर मुस्कान न हो, जात पांत के भेद न हो मेरा ऐसा हिंदुस्तान न हो। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एडीएम विनय प्रकाश श्रीवास्तव ने पढ़ा, जब कानून स्वयं हम मानें तब समझो आजादी आई, शिक्षा केंद्र जब बने थाने तब मानों आजादी आई। इसके अलावा रेवती कुमार पाठक, बद्री प्रसाद द्विवेदी, हरिराम निरपेक्ष, हरिकिशन सेन, दिनेश दुबे, अनवर खान, बद्री प्रसाद वर्मा आदि ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। कार्यक्रम में एसडीएम संजीव शाक्य, एआरटीओ आरपी सिंह, आबकारी अधिकारी अवधेश सोनी रहे।
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कार्यक्रम में गजलकार अंशुमान पाठक ने पढ़ा, मुकद्दर और मुस्तकबिल की चिंता छोड़ दो यारो, खतम न हो गमों की रात ऐसी हो नहीं सकती। गीताकार नाथूराम पथिक ने पढ़ा, खुली हवा में सांस लो, देश हुआ आजाद, साथी मिलकर बोलिए भारत जिंदाबाद। रसिक ने पढ़ा, शहीदों के खून को हम पानी समझ बैठे हैं, उनकी कुर्बानी का हम कहानी समझ बैठे हैं। शायर फरीद परछवी ने पढ़ा, आजाद है मेरा भारत आजाद रहेगा, टकराएगा जो हमसे वह बर्बाद रहेगा। लखनलाल जोशी ने पढ़ा, आकाश चूमता है मेरे देश का तिरंगा, यह साक्ष्य दे रही है पावन हमारी गंगा।
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मुन्नीलाल अवस्थी ने पढ़ा, शक्ति के तूफान बनकर तुम चलो आगे बढ़ो, आगे बढ़ो। गणेश सिंह विद्यार्थी ने अपनी रचना पढ़ी कि आपस में न हो प्यार मोहब्बत अधरों पर मुस्कान न हो, जात पांत के भेद न हो मेरा ऐसा हिंदुस्तान न हो। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एडीएम विनय प्रकाश श्रीवास्तव ने पढ़ा, जब कानून स्वयं हम मानें तब समझो आजादी आई, शिक्षा केंद्र जब बने थाने तब मानों आजादी आई। इसके अलावा रेवती कुमार पाठक, बद्री प्रसाद द्विवेदी, हरिराम निरपेक्ष, हरिकिशन सेन, दिनेश दुबे, अनवर खान, बद्री प्रसाद वर्मा आदि ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। कार्यक्रम में एसडीएम संजीव शाक्य, एआरटीओ आरपी सिंह, आबकारी अधिकारी अवधेश सोनी रहे।
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