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एचटी लाइन से लगी आग, 15 बीघे फसल राख
अमर उजाला ब्यूरो, हमीरपुर
Updated Wed, 06 Apr 2016 11:52 PM IST
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आग से जला खेत।
- फोटो : अमर उजाला
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थानाक्षेत्र के ग्राम टेढ़ा में बुधवार दोपहर हाईटेंशन लाइन से निकली चिंगारी खेत में गिरने से 15 बीघे गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। ग्रामीणों ने किसी तरह आग बुझाई। पीड़ित ने बताया कि आग से उसका करीब दो लाख का नुकसान हुआ है।
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बुधवार दोपहर टेढ़ा गांव में बांदा मार्ग के किनारे बरदानी सिंह के खेत के ऊपर से गुजरी हाईटेंशन लाइन से निकली चिंगारी से उसकी गेहूं की फसल में आग लग गई। आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग मौके पर पहुंचे और आग बुझाने में जुट गए। बरदानी सिंह ने नलकूप चलाकर पानी का इंतजाम किया। लेकिन तब तक पूरी फसल राख हो गई।
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15 बीघे फसल के जलने से किसान मायूस हो गया। उसने कहा कि फायर ब्रिगेड समय से पहुंच जाती तो उसकी कुछ फसल बच सकती थी। गौरतलब है कि पूरे क्षेत्र में गेहूं पककर तैयार है। एक चिंगारी इस समय खेतों में खड़ी फसल को बर्बाद कर सकती है। सुमेरपुर कस्बा स्थित 33 केवीए सब स्टेशन के अवर अभियंता जगदीश प्रसाद ने बताया कि किसान की गेहूं की फसल हार्वेस्टर से कट चुकी थी। खेत में सिर्फ डंठल के अवशेष थे। फिर भी वह मामले की जांच कर रहे हैं। अगर फसल जली है तो नियमानुसार मुआवजा किसान को दिया जाएगा।
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फसल जलने पर ऐसे मिलता है मुआवजा
अज्ञात कारणों से खेत या खलिहान में रखी किसान की फसल में आग लगने पर क्षति के मुआवजे के लिए मंडी समिति द्वारा खलिहान अग्निकांड सहायता योजना के अंतर्गत नियमानुसार धनराशि दी जाती है। घटना में किसान के नुकसान की रिपोर्ट लेखपाल द्वारा प्रारूप में भरकर तहसीलदार के माध्यम से संबधित मंडी समिति भेजी जाती है। मंडी समिति इंस्पेक्टर नुकसान की जांच कर उसकी रिपोर्ट मंडी सचिव को देता है। उसके बाद मंडी सचिव द्वारा नियमानुसार मुआवजा स्वीकृत किया जाता है। कुरारा मंडी समिति सचिव आएएस वर्मा ने बताया कि मुआवजे के लिए किसानों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। जिसमें लघु किसान को अधिकतम दस हजार, सीमांत किसान को बीस हजार व वृहद किसान को तीस हजार की धनराशि दी जाती है। कहा कि नुकसान कम होने पर मुआवजा कम दिया जाता है। खेत में रखी फसल को भी खलिहान की तरह माना जाएगा।
दो साल में 23 घटनाएं
हमीरपुर। दमकल विभाग की माने तो 2014 और 2015 में खेत खलिहानों में आग की 23 घटनाएं हुई हैं। जिनमें किसानों को 7.28 लाख रुपये की क्षति हुई। इन मामलों में कितने किसानों को मंडी समिति द्वारा मुआवजा दिया गया, इसका लेखा जोखा जिला स्तरीय कार्यालयों में नहीं है। हालांकि प्रशासन द्वारा दैवी आपदा राहत कार्यालय खोला गया है। कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक गुरुदेव सिंह ने बताया कि आग से फसलों का जलना दैवी आपदा के अंतर्गत नहीं आता है। इसमें मिलने वाले मुआवजे की जानकारी मंडी समितियों के पास ही उपलब्ध है।