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घर के लिए भाई को भाला-कुल्हाड़ी से काट डाला
अमर उजाला ब्यूरो, हमीरपुर
Updated Fri, 30 Sep 2016 12:04 AM IST
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पुलिस की गिरफ्त में हत्यारोपी राजाबाबू
- फोटो : अमर उजाला
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थाना सिसोलर क्षेत्र में केन नदी किनारे स्थित बीहड़ी गांव भुलसी में बुधवार रात मकान के विवाद में खून के रिश्ते ने ही खून बहा दिया। एक युवक ने अपने बड़े भाई की भाला और कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी। हत्या के बाद घर के बाहर शव को फेंक दिया। भुलसी गांव निवासी सेवक अहिरवार के चार बेटों में दो शादीशुदा व दो अविवाहित हैं।
बड़ा बेटा सुखलाल और तीसरे नंबर का मुनुवा एक साथ रहते हैं। उधर, छोटा राजाबाबू मजदूरी के लिए अहमदाबाद गया तो वहीं उसने शादी कर ली। जून में वह चार बच्चों और पत्नी को लेकर गांव आया तो दूसरे नंबर के भाई कामता (38) के साथ रहने लगा। अविवाहित कामता गांव में झाड़फूंक का काम करता था। सबसे बड़े भाई सुखलाल ने बताया कि कामता भी शादी करना चाहता था। उसे सरकारी आवास का पैसा मिला तो घर की जमीन पर निर्माण करा लिया और राजाबाबू भी उसी के साथ रहने लगा। जुलाई में वह झाड़फूंक के चक्कर में दिल्ली चला गया था। 27 सितंबर को वापस आया तो घर को लेकर राजाबाबू से उसका विवाद हुआ।
प्रधान प्रतिनिधि मंगल सिंह परिहार सहित अन्य संभ्रांत लोगों के साथ दोनों भाइयों की पंचायत कराई थी पर मामला नहीं सुलझा। राजाबाबू व अन्य भाइयों का कहना था कि जमीन पुश्तैनी है। निर्माण उसने जरूर कराया है पर जमीन में उनका भी हिस्सा है। उधर, कामता का कहना था कि वह अब यह मकान पुलिस से शिकायत कर खाली कराएगा। सुखलाल ने बताया कि इसी खुन्नस को लेकर बुधवार रात राजाबाबू ने कामता के सोते समय भाला घोंपा और सिर में कुल्हाड़ी से कई वार कर उसकी हत्या कर दी। घर के बाहर उसका शव फेंक दिया। सुबह उसके पास पहुंचा और कामता की हत्या की जानकारी भी दी।
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सूचना पर पहुंचे क्षेत्राधिकारी उमरदराज खां व थाना प्रभारी अजीत सिंह यादव पुलिस बल के साथ घटना स्थल पर पहुंचे। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। तहरीर सुखलाल ने थाना सिसोलर में दी है। इसमें उसने कहा है कि मकान के विवाद में छोटे भाई ने उसके भाई कामता की हत्या की है।
बड़े भाई सुखलाल ने कहा कि राजाबाबू ने कामता को मौत के घाट उतारा। वह सुबह उसके पास आया और भाई कामता की हत्या करने की बात उससे बताई। मकान के मामूली विवाद पर खून का यह रिश्ता एक झटके में टूट गया। गुजरात से शादी कर लाई गई पत्नी व चार बच्चों को ग्रामीणों की राय पर उन्हें उसके मायके रवाना कर दिया गया। इस घटना से जहां मोहल्ले में ही नहीं बल्कि इस पूरे गांव में मातम का माहौल है। लोग दबी जुबान से इस घटना की निंदा कर रहे हैं। वहीं जिस कालोनी को लेकर विवाद हुआ, वहां न अब बच्चों की किलकारियां गूंज रही हैं और न उसमें रहने वाला ही कोई है।
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बड़ा बेटा सुखलाल और तीसरे नंबर का मुनुवा एक साथ रहते हैं। उधर, छोटा राजाबाबू मजदूरी के लिए अहमदाबाद गया तो वहीं उसने शादी कर ली। जून में वह चार बच्चों और पत्नी को लेकर गांव आया तो दूसरे नंबर के भाई कामता (38) के साथ रहने लगा। अविवाहित कामता गांव में झाड़फूंक का काम करता था। सबसे बड़े भाई सुखलाल ने बताया कि कामता भी शादी करना चाहता था। उसे सरकारी आवास का पैसा मिला तो घर की जमीन पर निर्माण करा लिया और राजाबाबू भी उसी के साथ रहने लगा। जुलाई में वह झाड़फूंक के चक्कर में दिल्ली चला गया था। 27 सितंबर को वापस आया तो घर को लेकर राजाबाबू से उसका विवाद हुआ।
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प्रधान प्रतिनिधि मंगल सिंह परिहार सहित अन्य संभ्रांत लोगों के साथ दोनों भाइयों की पंचायत कराई थी पर मामला नहीं सुलझा। राजाबाबू व अन्य भाइयों का कहना था कि जमीन पुश्तैनी है। निर्माण उसने जरूर कराया है पर जमीन में उनका भी हिस्सा है। उधर, कामता का कहना था कि वह अब यह मकान पुलिस से शिकायत कर खाली कराएगा। सुखलाल ने बताया कि इसी खुन्नस को लेकर बुधवार रात राजाबाबू ने कामता के सोते समय भाला घोंपा और सिर में कुल्हाड़ी से कई वार कर उसकी हत्या कर दी। घर के बाहर उसका शव फेंक दिया। सुबह उसके पास पहुंचा और कामता की हत्या की जानकारी भी दी।
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सूचना पर पहुंचे क्षेत्राधिकारी उमरदराज खां व थाना प्रभारी अजीत सिंह यादव पुलिस बल के साथ घटना स्थल पर पहुंचे। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। तहरीर सुखलाल ने थाना सिसोलर में दी है। इसमें उसने कहा है कि मकान के विवाद में छोटे भाई ने उसके भाई कामता की हत्या की है।
बड़े भाई सुखलाल ने कहा कि राजाबाबू ने कामता को मौत के घाट उतारा। वह सुबह उसके पास आया और भाई कामता की हत्या करने की बात उससे बताई। मकान के मामूली विवाद पर खून का यह रिश्ता एक झटके में टूट गया। गुजरात से शादी कर लाई गई पत्नी व चार बच्चों को ग्रामीणों की राय पर उन्हें उसके मायके रवाना कर दिया गया। इस घटना से जहां मोहल्ले में ही नहीं बल्कि इस पूरे गांव में मातम का माहौल है। लोग दबी जुबान से इस घटना की निंदा कर रहे हैं। वहीं जिस कालोनी को लेकर विवाद हुआ, वहां न अब बच्चों की किलकारियां गूंज रही हैं और न उसमें रहने वाला ही कोई है।