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राहत मिली पर मियाद खत्म
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
Updated Fri, 29 May 2015 12:24 AM IST
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एक साल पहले रबी अभियान में दैवी आपदा के शिकार किसान चेक लेकर मारे-मारे
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फिर रहे हैं। कृ षि निवेश में मिली कुल धनराशि में से 5.75 करोड़ रुपये
31 मार्च को वापस कर दिए गए। हालत यह है कि बीती जनवरी और फरवरी में जारी
चेक की मियाद खत्म हो चुकी है। चेक कैश नहीं करा पाए सैकड़ों किसान
तहसीलदार के पास तारीख बढ़वाने आ रहे हैं। वहीं लेखपाल अनुपूरक चेक जारी कर
बेवकूफ बना रहे हैं। तारीख और मोहर लगवाकर बैंक पहुंचने पर ज्यादातर
किसानों का चेक कैश न कर लौटाया जा रहा है।
तहसील परिसर में मंगलवार सुबह तहसीलदार कक्ष में किसानों की भारी भीड़ रही। हाथों में चेक पकड़े दूरदराज से आए किसान अपना दर्द सुनाते रहे। बोले, कि इस वर्ष की रबी में फसलों की क्षतिपूर्ति में ज्यादातर चेक मिल गए।
लेकिन पिछले वर्ष में रबी फसल के चेक भुगतान कराने में लोहे के चने चबाने पड़ रहे हैं। चेकों की तारीख निकल जाने से बैंक वापस कर रहा है। देरी से चेक दिया गया तो कोई बाहर मजदूरी कोचला गया और जब पता चला कि उसके नाम से मुआवजे का चेक मिलेगा, तो वह लौटकर लेखपालों के चक्कर लगाते रहे।
कई बार चक्कर लगाने के बाद लेखपालों ने बाद में चेक दिया। इतना ही नहीं मौजूदा समय पिछले साल में आपदा राहत के नाम पर किसानों को अनुपूरक चेक बनाने का खेल चल रहा है। जबकि इस मद का पैसा नहीं है।
इस तरह के करीब 50 से 60 लाख रुपये का चेक जारी कर दिया गया है। कुछ लेखपालों का कहना है कि कई किसानों की दूसरे गांवों में खेती है। जिनकी सूची देर से मिली।
इसलिए उनकी अनुपूरक चेक देकर मुआवजा देने का प्रयास किया गया। जबकि किसानों का कहना है कि लेखपालों ने ही देर से सर्वे किया है। बैंक ऐसे चेकों को कैश कराने के लिए हाथ खड़े कर रहा है।
तहसील परिसर में मंगलवार सुबह तहसीलदार कक्ष में किसानों की भारी भीड़ रही। हाथों में चेक पकड़े दूरदराज से आए किसान अपना दर्द सुनाते रहे। बोले, कि इस वर्ष की रबी में फसलों की क्षतिपूर्ति में ज्यादातर चेक मिल गए।
लेकिन पिछले वर्ष में रबी फसल के चेक भुगतान कराने में लोहे के चने चबाने पड़ रहे हैं। चेकों की तारीख निकल जाने से बैंक वापस कर रहा है। देरी से चेक दिया गया तो कोई बाहर मजदूरी कोचला गया और जब पता चला कि उसके नाम से मुआवजे का चेक मिलेगा, तो वह लौटकर लेखपालों के चक्कर लगाते रहे।
कई बार चक्कर लगाने के बाद लेखपालों ने बाद में चेक दिया। इतना ही नहीं मौजूदा समय पिछले साल में आपदा राहत के नाम पर किसानों को अनुपूरक चेक बनाने का खेल चल रहा है। जबकि इस मद का पैसा नहीं है।
इस तरह के करीब 50 से 60 लाख रुपये का चेक जारी कर दिया गया है। कुछ लेखपालों का कहना है कि कई किसानों की दूसरे गांवों में खेती है। जिनकी सूची देर से मिली।
इसलिए उनकी अनुपूरक चेक देकर मुआवजा देने का प्रयास किया गया। जबकि किसानों का कहना है कि लेखपालों ने ही देर से सर्वे किया है। बैंक ऐसे चेकों को कैश कराने के लिए हाथ खड़े कर रहा है।