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कैदी ने जेल में लगाई फांसी, मौत
Sat, 29 Dec 2018 11:45 PM IST
यशवीर सिंह
हमीरपुर, उत्तर प्रदेश
हमीरपुर, उत्तर प्रदेश
Published by: यशवीर सिंह
Updated Sat, 29 Dec 2018 11:45 PM IST
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अधिवक्ता की हत्या में उम्रकैद की सजा मिलने के 10 दिन बाद कैंसर पीड़ित ने शुक्रवार देर रात जिला कारागार में अस्पताल के शौचालय में फांसी लगा ली। सूचना पर रात में ही एडीएम/प्रभारी जेल अधीक्षक विनय प्रकाश श्रीवास्तव ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। कैदी के भाई, चाचा व पिता भी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
राठ निवासी कैदी नरेंद्र (39) पुत्र अरुण कुमार ने शुक्रवार रात करीब दो बजे शौचालय में फांसी लगाई। जेल कर्मियों ने उसे फांसी के फंदे पर लटकता देखा तो होश उड़ गए। घटना की जानकारी पर जेलर प्रमोद कुमार त्रिपाठी, प्रभारी अधीक्षक एडीएम मौके पर पहुंचे। कोतवाली पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा। एडीएम ने बताया कि कैदी नरेंद्र को एक अधिवक्ता की हत्या में उम्रकैद की सजा मिली थी। उसके भाई, चाचा व पिता भी जेल में बंद है।
नरेंद्र वर्ष 2016 से जेल में बंद है। उन्होंने बताया कैदी के आत्महत्या करने के मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के लिए जेल प्रशासन से पत्र भेजा है। जेलर ने बताया कैदी मुंह के कैंसर से पीड़ित था। उसका उपचार भी चल रहा था। इसीलिए उसे जेल के अस्पताल के वार्ड में रखा गया था। उसने रात दो बजे फांसी लगाकर आत्महत्या की है। उसका भाई धर्मेंद्र, भूपेंद्र, शैलेंद्र व चाचा अजय के अलावा इसका पिता भी जेल में वकील की हत्या में बंद है। राठ कस्बे में 10 फरवरी 2016 की देर रात अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष अशोक कुमार अहिरवार (55) की गोली मारकर हत्या की गई थी।
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इस घटना को लेकर मृतक के भाई बाबूलाल ने मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले की सुनवाई में 20 दिसंबर को अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी द्वितीय की अदालत में दोष साबित होने पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। जिला कारागार के जेलर पीके त्रिपाठी ने बताया उन्हें रात करीब सवा दो बजे सूचना मिली। वह मौके पर गए तब उसकी मौत हो चुकी थी। अब यहां सवाल उठता है। जब कैदी नरेंद्र शौचालय गया। तब पहरे पर लगे कर्मी क्या कर रहे थे। इससे जाहिर है कि जेल प्रशासन की कहीं न कहीं चूक है।
नरेंद्र पर दर्ज हैं छह मुकदमे
राठ। दो साल पहले 10 फरवरी 2016 को कस्बे के सिकंदरपुरा मोहल्ले में अधिवक्ता अशोक अहिरवार की गोली मारकर हत्या की गई थी। नरेंद्र की पुत्री रेनू ने बताया उसके पिता मैकेनिक थे। नरेंद्र पर कोतवाली में एनएसए सहित छह विभिन्न धाराओं में मुकदमे पंजीकृत हैं। 2004 में पहला मुकदमा घर में घुसकर मारपीट करने का दर्ज हुआ था। कोतवाल मनोज कुमार ने बताया 2013 व 2015 व 2016 में हत्या और एनएसए की कार्रवाई की गई थी।
उसके परिजन व रिश्तेदारों ने एडीएम विनय प्रकाश से गुहार लगाई कि अंतिम संस्कार के समय जिला कारागार में निरुद्घ मृतक के पिता, भाइयों को पुलिस अभिरक्षा में कुछ देर के लिए शामिल होने की अनुमति दी जाए, मगर ऐसा न होने पर पुत्र शिवा ने मुखाग्नि दी। एडीएम ने बताया नियम में यह नहीं है। इसलिए किसी को नहीं भेजा गया।
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राठ निवासी कैदी नरेंद्र (39) पुत्र अरुण कुमार ने शुक्रवार रात करीब दो बजे शौचालय में फांसी लगाई। जेल कर्मियों ने उसे फांसी के फंदे पर लटकता देखा तो होश उड़ गए। घटना की जानकारी पर जेलर प्रमोद कुमार त्रिपाठी, प्रभारी अधीक्षक एडीएम मौके पर पहुंचे। कोतवाली पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा। एडीएम ने बताया कि कैदी नरेंद्र को एक अधिवक्ता की हत्या में उम्रकैद की सजा मिली थी। उसके भाई, चाचा व पिता भी जेल में बंद है।
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नरेंद्र वर्ष 2016 से जेल में बंद है। उन्होंने बताया कैदी के आत्महत्या करने के मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के लिए जेल प्रशासन से पत्र भेजा है। जेलर ने बताया कैदी मुंह के कैंसर से पीड़ित था। उसका उपचार भी चल रहा था। इसीलिए उसे जेल के अस्पताल के वार्ड में रखा गया था। उसने रात दो बजे फांसी लगाकर आत्महत्या की है। उसका भाई धर्मेंद्र, भूपेंद्र, शैलेंद्र व चाचा अजय के अलावा इसका पिता भी जेल में वकील की हत्या में बंद है। राठ कस्बे में 10 फरवरी 2016 की देर रात अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष अशोक कुमार अहिरवार (55) की गोली मारकर हत्या की गई थी।
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इस घटना को लेकर मृतक के भाई बाबूलाल ने मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले की सुनवाई में 20 दिसंबर को अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी द्वितीय की अदालत में दोष साबित होने पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। जिला कारागार के जेलर पीके त्रिपाठी ने बताया उन्हें रात करीब सवा दो बजे सूचना मिली। वह मौके पर गए तब उसकी मौत हो चुकी थी। अब यहां सवाल उठता है। जब कैदी नरेंद्र शौचालय गया। तब पहरे पर लगे कर्मी क्या कर रहे थे। इससे जाहिर है कि जेल प्रशासन की कहीं न कहीं चूक है।
नरेंद्र पर दर्ज हैं छह मुकदमे
राठ। दो साल पहले 10 फरवरी 2016 को कस्बे के सिकंदरपुरा मोहल्ले में अधिवक्ता अशोक अहिरवार की गोली मारकर हत्या की गई थी। नरेंद्र की पुत्री रेनू ने बताया उसके पिता मैकेनिक थे। नरेंद्र पर कोतवाली में एनएसए सहित छह विभिन्न धाराओं में मुकदमे पंजीकृत हैं। 2004 में पहला मुकदमा घर में घुसकर मारपीट करने का दर्ज हुआ था। कोतवाल मनोज कुमार ने बताया 2013 व 2015 व 2016 में हत्या और एनएसए की कार्रवाई की गई थी।
उसके परिजन व रिश्तेदारों ने एडीएम विनय प्रकाश से गुहार लगाई कि अंतिम संस्कार के समय जिला कारागार में निरुद्घ मृतक के पिता, भाइयों को पुलिस अभिरक्षा में कुछ देर के लिए शामिल होने की अनुमति दी जाए, मगर ऐसा न होने पर पुत्र शिवा ने मुखाग्नि दी। एडीएम ने बताया नियम में यह नहीं है। इसलिए किसी को नहीं भेजा गया।